{"_id":"60047f898ebc3e2e750b209c","slug":"crime-tundla-news-agr47685731","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोकलाज के भय से कड़ाके की सर्दी में नवजात बच्ची को मंदिर में छोड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोकलाज के भय से कड़ाके की सर्दी में नवजात बच्ची को मंदिर में छोड़ा
विज्ञापन
फिरोजाबाद : टूंडला के मोहम्मदाबाद में नवजात बच्ची को गोद में लिए दंपती।
- फोटो : TUNDLA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टूंडला (फिरोजाबाद)। कोहरे व सर्दी के बीच रविवार सुबह लोकलाज के भय से एक मां ने अपनी नवजात बच्ची को शिव मंदिर परिसर में एक थैले में बंदकर छोड़ दिया। सुबह मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं को नवजात की किलकारी सुनाई दी तो भीड़ एकत्र हो गई। गांव के एक व्यक्ति ने बच्ची को अपनाते हुए मानवता की मिसाल पेश की है।
मामला नगर से सटे गांव मोहम्मदाबाद से जुड़ा है। रविवार सुबह गांव के शिव मंदिर में गांव के ही शेषपाल यादव साफ-सफाई व पूजा-अर्चना करने पहुंचे तो मंदिर में उन्हें एक थैला पड़ा दिखाई दिया। उन्होंने किसी महात्मा का थैला समझकर उसे एक किनारे रख दिया। सफाई-धुलाई के बाद मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू की, तभी थैले में से नवजात के रोने की आवाज सुनकर वह चौंक गए। उन्होंने थैले को खोलकर देखा तो उसके अंदर रुई में लिपटी नवजात बच्ची थी। उन्होंने तुरंत ही पूरे मामले की जानकारी ग्रामीणों एवं अपने परिवार के लोगों को दी। सूचना मिलने पर ग्रामीण एकत्रित हो गए तथा तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गयीं।
इस बीच शेषपाल यादव मानवता और इंसानियत दिखाते हुए नवजात बच्ची को अपनाते हुए अपने घर ले गए। उन्होंने बताया कि यह बच्ची उन्हें मंदिर में थैले के अंदर रखी हुई मिली थी। जिसका नाम वह दुर्गा या लक्ष्मी रखेंगे। बच्ची को पाकर उनके परिवार में खुशियों की लहर दौड़ गई। परिवार में शेषपाल के एक बेटा और एक बेटी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मामला नगर से सटे गांव मोहम्मदाबाद से जुड़ा है। रविवार सुबह गांव के शिव मंदिर में गांव के ही शेषपाल यादव साफ-सफाई व पूजा-अर्चना करने पहुंचे तो मंदिर में उन्हें एक थैला पड़ा दिखाई दिया। उन्होंने किसी महात्मा का थैला समझकर उसे एक किनारे रख दिया। सफाई-धुलाई के बाद मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू की, तभी थैले में से नवजात के रोने की आवाज सुनकर वह चौंक गए। उन्होंने थैले को खोलकर देखा तो उसके अंदर रुई में लिपटी नवजात बच्ची थी। उन्होंने तुरंत ही पूरे मामले की जानकारी ग्रामीणों एवं अपने परिवार के लोगों को दी। सूचना मिलने पर ग्रामीण एकत्रित हो गए तथा तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गयीं।
विज्ञापन
इस बीच शेषपाल यादव मानवता और इंसानियत दिखाते हुए नवजात बच्ची को अपनाते हुए अपने घर ले गए। उन्होंने बताया कि यह बच्ची उन्हें मंदिर में थैले के अंदर रखी हुई मिली थी। जिसका नाम वह दुर्गा या लक्ष्मी रखेंगे। बच्ची को पाकर उनके परिवार में खुशियों की लहर दौड़ गई। परिवार में शेषपाल के एक बेटा और एक बेटी है।
विज्ञापन