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Agra News: नहीं हुई सुनवाई तो भूख हड़ताल पर बैठे दंपती
Tue, 05 Dec 2023 11:17 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Tue, 05 Dec 2023 11:17 PM IST
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मैनपुरी।
गांव बिछिया निवासी दंपती डीएम कार्यालय के बाहर मंगलवार को भूख हड़ताल पर बैठ गया। आरोप लगाया कि जमीन पर कब्जे की कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कार्रवाई नहीं होने पर आत्मदाह की बात कही है। कार्रवाई के लिए नायब तहसीलदार ने सात दिन का समय मांगा, जिस पर दंपती ने हड़ताल समाप्त कर दी।
गांव बिछिया निवासी सुभाष सिंह चौहान मंगलवार को डीएम कार्यालय के बाहर पत्नी के साथ भूख हड़ताल पर बैठ गए। उनका कहना था कि उन्हें वर्ष 2013 में जमीन का पट्टा मिला था। उस पर आरोपियों ने कब्जा कर लिया। शिकायत के बाद उन्हें कब्जा दखल दिला दिया गया। आरोपियों ने दोबारा कब्जा कर लिया। कई बार शिकायत के बाद वर्ष 2016 में पुन: पैमाइश कराई। दखल मिलने के बाद फिर से रसूखदारों ने कब्जा कर लिया। तब से वह अधिकारियों से शिकायत कर रहा है। एक हजार से अधिक प्रार्थनापत्र दे चुका है। इसके बाद भी जमीन कब्जा मुक्त नहीं कराई गई।
सुनवाई न होने पर वह पत्नी के साथ भूख हड़ताल पर बैठ गया। सुनवाई नहीं हुई तो वे आत्मदाह को विवश होंगे। नायब तहसीलदार सदर ने दंपती की समस्या को सुना और आश्वस्त किया कि एक सप्ताह में उनकी शिकायत का निस्तारण किया जाएगा। आश्वासन मिलने के बाद दंपती ने भूख हड़ताल को समाप्त कर दिया।
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गांव बिछिया निवासी दंपती डीएम कार्यालय के बाहर मंगलवार को भूख हड़ताल पर बैठ गया। आरोप लगाया कि जमीन पर कब्जे की कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कार्रवाई नहीं होने पर आत्मदाह की बात कही है। कार्रवाई के लिए नायब तहसीलदार ने सात दिन का समय मांगा, जिस पर दंपती ने हड़ताल समाप्त कर दी।
गांव बिछिया निवासी सुभाष सिंह चौहान मंगलवार को डीएम कार्यालय के बाहर पत्नी के साथ भूख हड़ताल पर बैठ गए। उनका कहना था कि उन्हें वर्ष 2013 में जमीन का पट्टा मिला था। उस पर आरोपियों ने कब्जा कर लिया। शिकायत के बाद उन्हें कब्जा दखल दिला दिया गया। आरोपियों ने दोबारा कब्जा कर लिया। कई बार शिकायत के बाद वर्ष 2016 में पुन: पैमाइश कराई। दखल मिलने के बाद फिर से रसूखदारों ने कब्जा कर लिया। तब से वह अधिकारियों से शिकायत कर रहा है। एक हजार से अधिक प्रार्थनापत्र दे चुका है। इसके बाद भी जमीन कब्जा मुक्त नहीं कराई गई।
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सुनवाई न होने पर वह पत्नी के साथ भूख हड़ताल पर बैठ गया। सुनवाई नहीं हुई तो वे आत्मदाह को विवश होंगे। नायब तहसीलदार सदर ने दंपती की समस्या को सुना और आश्वस्त किया कि एक सप्ताह में उनकी शिकायत का निस्तारण किया जाएगा। आश्वासन मिलने के बाद दंपती ने भूख हड़ताल को समाप्त कर दिया।
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