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कोरोना: देश के दस बड़े शहरों से अच्छी है आगरा की स्थिति, डीएम ने बताए बचाव के मंत्र
Tue, 29 Sep 2020 12:33 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 29 Sep 2020 12:33 AM IST
सार
- चेन्नई, पुणे जैसे शहरों की वृद्धि दर 282 गुना तक है। इसके रोजाना सैंपल लेने में भी 20 सितंबर से अब तक करीब 3 फीसद की गिरावट आई है।
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कोरोना संक्रमित मिलने के बाद हॉटस्पॉट एरिया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ताजनगरी में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ तो रहे हैं लेकिन देश के दस बड़े शहरों से हमारी स्थिति अच्छी है... इस रिपोर्ट के साथ डीएम प्रभु एन सिंह ने प्रदेश के अन्य डीएम को प्रस्तुतिकरण दिया है।
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इसमें बताया है कि ताजनगरी में कोरोना के संक्रमण से बचाव से लेकर संक्रमितों के उपचार के लिए क्या-क्या बंदोबस्त किए गए। इसमें सबसे महत्वपूर्ण संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उनकी जांच कराना है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार की देर शाम प्रदेश के सभी मंडलायुक्त और डीएम से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात की थी। इसी में आगरा के डीएम ने प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने बताया कि ताजनगरी में 27 अप्रैल से 27 सितंबर तक कोरोना के मामलों में 14 गुना की वृद्धि हुई है जबकि चेन्नई, पुणे जैसे शहरों की वृद्धि दर 282 गुना तक है। ताजनगरी में कुल नमूनों में से मिल रहे संक्रमितों में तीन प्रतिशत की गिरावट आई है।
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| शहर | 27 अप्रैल | 27 सितंबर | वृद्धि (गुना में) |
| आगरा | 384 | 5483 | 14 |
| जोधपुर | 375 | 18,859 | 50 |
| मुम्बई | 5407 | 1,96,585 | 36 |
| अहमदाबाद | 2378 | 36049 | 15 |
| इंदौर | 1207 | 22129 | 18 |
| पुणे | 1052 | 2,82,266 | 268 |
| जयपुर | 833 | 19,841 | 24 |
| ठाणे | 738 | 1,80,838 | 245 |
| चेन्नई | 575 | 162,125 | 282 |
| सूरत | 556 | 27,989 | 50 |
| भोपाल | 428 | 16,460 | 38 |
सात दिनों में और आया सुधार कुल नमूनों में से संक्रमित
ये है बचाव का मंत्र
1. 55 टीमों का गठन : जिले में 55 रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) गठित की गईं। ये 24 घंटे काम करती हैं।
2. सहयोगी टीम का गठन : दूसरी टीम संक्रमित के नजदीकी संपर्क के लोगों की स्क्रीनिंग करती है और नमूने लेती है।
3. घरों का सैनिटाइजेशन : नगर निगम की टीम संक्रमित के घर जाकर सैनिटाइजेशन करती है।
4. शहर का सैनिटाइजेशन : दमकल की टीमों ने शहर में बड़े पैमाने पर सैनिटाइजेशन किया।
5. निष्पक्ष मूल्यांकन : तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) से निरीक्षण कर बचाव कार्य का मूल्यांकन कराया गया।
| 20 सितंबर | 5.98 फीसद |
| 21 सितम्बर | 5.95 |
| 22 सितम्बर | 5.83 |
| 23 सितम्बर | 4.74 |
| 24 सितम्बर | 4.40 |
| 25 सितम्बर | 4.04 |
| 26 सितम्बर | 3.52 |
| 27 सितम्बर | 3.00 |
ये है बचाव का मंत्र
1. 55 टीमों का गठन : जिले में 55 रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) गठित की गईं। ये 24 घंटे काम करती हैं।
2. सहयोगी टीम का गठन : दूसरी टीम संक्रमित के नजदीकी संपर्क के लोगों की स्क्रीनिंग करती है और नमूने लेती है।
3. घरों का सैनिटाइजेशन : नगर निगम की टीम संक्रमित के घर जाकर सैनिटाइजेशन करती है।
4. शहर का सैनिटाइजेशन : दमकल की टीमों ने शहर में बड़े पैमाने पर सैनिटाइजेशन किया।
5. निष्पक्ष मूल्यांकन : तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) से निरीक्षण कर बचाव कार्य का मूल्यांकन कराया गया।
उपचार में ये खास
1. जांच की संख्या बढ़ाई : संक्रमितों का जल्दी पता लगाया, ट्रूनेट मशीन से जांच की संख्या बढ़ाई।
2. बेहतर दवाइयों का प्रयोग : रेमडेसिविर, फेविपिराविर जैसी ड्रग्स का इस्तेमाल संक्रमितों के उपचार में कर रहे हैं।
3. प्लाज्मा थेरेपी का प्रयोग : संक्रमण की प्रारंभिक अवस्था में मरीज को प्लाज्मा थेरेपी दे रहे हैं।
4. सीसीटीवी से निगरानी : उपचार व्यवस्था पर नजर रखने के लिए यह व्यवस्था की गई है।
5. तालमेल : बेहतर उपचार के लिए आईएमए के साथ तालमेल बनाया है।
आगरा में दर्ज हुआ था पहला मुकदमा
डीएम ने यह भी बताया कि संक्रमित के यात्रा का इतिहास न बताने पर पहला मुकदमा आगरा में दर्ज किया गया था। आगरा में लॉकडाउन के दौरान 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम बनाया गया। हेल्पलाइन नंबर पर 55 हजार कॉल आईं।
1. जांच की संख्या बढ़ाई : संक्रमितों का जल्दी पता लगाया, ट्रूनेट मशीन से जांच की संख्या बढ़ाई।
2. बेहतर दवाइयों का प्रयोग : रेमडेसिविर, फेविपिराविर जैसी ड्रग्स का इस्तेमाल संक्रमितों के उपचार में कर रहे हैं।
3. प्लाज्मा थेरेपी का प्रयोग : संक्रमण की प्रारंभिक अवस्था में मरीज को प्लाज्मा थेरेपी दे रहे हैं।
4. सीसीटीवी से निगरानी : उपचार व्यवस्था पर नजर रखने के लिए यह व्यवस्था की गई है।
5. तालमेल : बेहतर उपचार के लिए आईएमए के साथ तालमेल बनाया है।
आगरा में दर्ज हुआ था पहला मुकदमा
डीएम ने यह भी बताया कि संक्रमित के यात्रा का इतिहास न बताने पर पहला मुकदमा आगरा में दर्ज किया गया था। आगरा में लॉकडाउन के दौरान 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम बनाया गया। हेल्पलाइन नंबर पर 55 हजार कॉल आईं।