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भूल गए सारे वॉर, यूं हुआ चीनी को हिंदी से प्यार
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 29 Aug 2017 05:24 PM IST
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- फोटो : google
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डोकलाम विवाद पर भले ही चीन भारत को आंखें दिखा रहा हो, लेकिन यहां के छात्रों का हिंदी से प्यार बढ़ता ही जा रहा है। इस बार पिछले साल के मुकाबले दोगुने छात्र हिंदी सीखने भारत आ रहे हैं।
चीन ही नहीं अन्य देशों के विद्यार्थियों में भी हिंदी सीखने की ललक बढ़ी है। इस बार 25 देशों के 96 विद्यार्थी हिंदी सीखेंगे, पिछले साल यह संख्या 79 रही। केंद्रीय हिंदी संस्थान में विदेशी छात्रों को हिंदी सिखाने के लिए 100 सीट निर्धारित हैं।
इसमें 96 सीटों पर प्रवेश के लिए प्रस्ताव आ चुका है। इस बार चीन से आठ विद्यार्थी आने वाले हैं। पिछले साल संख्या मात्र चार ही रही थी। सबसे ज्यादा छात्रों की बात करें तो श्रीलंका के 20 हैं। दूसरे स्थान पर थाईलैंड के 13, तजाकिस्तान के आठ हैं।
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साउथ कोरिया से पांच और पौलेंड के चार छात्र हैं। अफगानिस्तान, बांग्लादेश, अरमेनिया, त्रिनिदाद एंड टोबेगो, मंगोलिया, रूस से तीन-तीन विद्यार्थी हिंदी सीखने आ रहे हैं। संस्थान के निदेशक प्रो. एनके पांडे का कहना है कि विभिन्न देशों के छात्र संस्थान में आने लगे हैं। अभी श्रीलंका के छात्र आ चुके हैं। अन्य देशों के छात्र भी जल्द संस्थान आएंगे। अगले महीने से शैक्षणिक सत्र शुरू करा दिया जाएगा।
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चीन ही नहीं अन्य देशों के विद्यार्थियों में भी हिंदी सीखने की ललक बढ़ी है। इस बार 25 देशों के 96 विद्यार्थी हिंदी सीखेंगे, पिछले साल यह संख्या 79 रही। केंद्रीय हिंदी संस्थान में विदेशी छात्रों को हिंदी सिखाने के लिए 100 सीट निर्धारित हैं।
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इसमें 96 सीटों पर प्रवेश के लिए प्रस्ताव आ चुका है। इस बार चीन से आठ विद्यार्थी आने वाले हैं। पिछले साल संख्या मात्र चार ही रही थी। सबसे ज्यादा छात्रों की बात करें तो श्रीलंका के 20 हैं। दूसरे स्थान पर थाईलैंड के 13, तजाकिस्तान के आठ हैं।
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साउथ कोरिया से पांच और पौलेंड के चार छात्र हैं। अफगानिस्तान, बांग्लादेश, अरमेनिया, त्रिनिदाद एंड टोबेगो, मंगोलिया, रूस से तीन-तीन विद्यार्थी हिंदी सीखने आ रहे हैं। संस्थान के निदेशक प्रो. एनके पांडे का कहना है कि विभिन्न देशों के छात्र संस्थान में आने लगे हैं। अभी श्रीलंका के छात्र आ चुके हैं। अन्य देशों के छात्र भी जल्द संस्थान आएंगे। अगले महीने से शैक्षणिक सत्र शुरू करा दिया जाएगा।