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करवाचौथ की साड़ी पर चीन की कारीगरी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Oct 2016 11:51 PM IST
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साड़ी, सूट, ब्लाऊज के बार्डर, कसीदाकारी में चीन का कब्जा, सस्ते और फिनिशिंग के बूते 90 फीसदी बाजार चीन ने क ब्जाया
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दिवाली हो या होली या अन्य कोई भी त्योहार, चीन के उत्पाद ही भारतीय त्योहारों में छाए हुए हैं। जूते, फर्नीचर, एलईडी लाइटों की तरह ही चीन ने कपड़ा बाजार को भी कब्जा लिया है। करवाचौथ पर सजने-संवरने के लिए महिलाएं जिस साड़ी-ब्लाऊज और सूट को पहनेंगी, उसमें डिजायनिंग और गोटेदार बार्डर चीन से ही सप्लाई हो रहा है। हाल ये है कि साड़ियों और सूट के बार्डर बनाने के कारोबार पर चीन ने 90 फीसदी से ज्यादा कब्जा कर लिया है, जबकि चार साल पहले तक यह घर-घर में बैठे भारतीय कारीगर ही करते थे।
साड़ी का फैब्रिक कोई भी हो, लेकिन उस पर एंब्रोयडरी, जरी, गोटे, बेलपत्र और नगीनों का काम चीन से सप्लाई हो रहा है। हाथ के उलट चीन इन्हें मशीनों से तैयार कराकर भेज रहा है। हर सप्ताह डिजायन बदलने के साथ इसकी फिनिशिंग और रेट ऐसे हैं कि भारतीय कारोबारी इससे मुकाबला कर ही नहीं पा रहे। लागत में यह डिजाइन भारतीय कारीगरों द्वारा तैयार किए गए बार्डर से महज एक चौथाई है।
लुहार गली, सुभाष बाजार में 90 फीसदी बाजार पर चीन के इन्हीं उत्पादों का कब्जा है। आगरा के कई कारोबारी हर सप्ताह दर्जनों कंटेनर मंगवा रहे हैं। महीने में तीन से चार बार वह चीन की यात्रा कर आर्डर और डिजाइन में बदलाव कराते हैं। साड़ी, सूट और ब्लाउज के इस बाजार से भारतीय कारीगराें का पत्ता पूरी तरह से साफ हो चुका है। साड़ी में केवल उन्हें लगाने भर का काम उनके पास है।
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आगरा व्यापार मंडल अध्यक्ष टीएन अग्रवाल के मुताबिक, साड़ी से लेकर जूतों तक में चीन के उत्पादों का बहिष्कार तेज होना चाहिए। सरकार को भी कुछ कदम उठाने की जरूरत है। कारीगर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और चीन के मशीनी उत्पाद बाजार में है। कारोबारी अभिनव अग्रवाल के मुताबिक चीन से केवल भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश को ही सस्ते उत्पाद सप्लाई होते हैं। अन्य देश क्वालिटी से समझौता नहीं कर रहे।
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साड़ी का फैब्रिक कोई भी हो, लेकिन उस पर एंब्रोयडरी, जरी, गोटे, बेलपत्र और नगीनों का काम चीन से सप्लाई हो रहा है। हाथ के उलट चीन इन्हें मशीनों से तैयार कराकर भेज रहा है। हर सप्ताह डिजायन बदलने के साथ इसकी फिनिशिंग और रेट ऐसे हैं कि भारतीय कारोबारी इससे मुकाबला कर ही नहीं पा रहे। लागत में यह डिजाइन भारतीय कारीगरों द्वारा तैयार किए गए बार्डर से महज एक चौथाई है।
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लुहार गली, सुभाष बाजार में 90 फीसदी बाजार पर चीन के इन्हीं उत्पादों का कब्जा है। आगरा के कई कारोबारी हर सप्ताह दर्जनों कंटेनर मंगवा रहे हैं। महीने में तीन से चार बार वह चीन की यात्रा कर आर्डर और डिजाइन में बदलाव कराते हैं। साड़ी, सूट और ब्लाउज के इस बाजार से भारतीय कारीगराें का पत्ता पूरी तरह से साफ हो चुका है। साड़ी में केवल उन्हें लगाने भर का काम उनके पास है।
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आगरा व्यापार मंडल अध्यक्ष टीएन अग्रवाल के मुताबिक, साड़ी से लेकर जूतों तक में चीन के उत्पादों का बहिष्कार तेज होना चाहिए। सरकार को भी कुछ कदम उठाने की जरूरत है। कारीगर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और चीन के मशीनी उत्पाद बाजार में है। कारोबारी अभिनव अग्रवाल के मुताबिक चीन से केवल भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश को ही सस्ते उत्पाद सप्लाई होते हैं। अन्य देश क्वालिटी से समझौता नहीं कर रहे।