{"_id":"5fb72fb00ca886453d092faf","slug":"chhath-puja-2020-today-sun-puja-at-ghat","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"'करिहा क्षमा हे छठी मइया, भूल-चूक हमार’ आज अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
'करिहा क्षमा हे छठी मइया, भूल-चूक हमार’ आज अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा
Fri, 20 Nov 2020 08:24 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 20 Nov 2020 08:24 AM IST
विज्ञापन
छठ पूजा के लिए मौजूद महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
छठ पर्व के दूसरे दिन गुरुवार को व्रती महिलाओं ने खरना की पूजा की। सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्जल व्रत रखा। षष्ठी पूजन के लिए प्रसाद तैयार किया। इस दौरान छठ मैया के गीत ‘पहिले-पहिल हम कईनी हे छठी मइया बरत तोहार, करिहा क्षमा हे छठी मइया भूल-चूक हमार’ व ‘गोड़े-मूड़े तनबो चदरिया, फल मंडी जइबो जरूर, सांझे बेरा देबो अरघिया, भोरे मांगब अशीष’ आदि गीत गाए।
खरना पर शाम को पूजन के बाद व्रतियों ने ईंट व मिट्टी से बने चूल्हे पर खीर बनाई। पूजा स्थल की सफाई की। केले का पत्ता बिछाकर उस पर अर्द्ध चंद्र की आकृति बनाई और सिंदूर लगाकर उसके पास दीपक जलाया। संतान और पति के लिए अग्रासन निकाला गया।
चंद्रमा और छठ मैया की पूजा करने के बाद खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। इसके बाद से ही षष्ठी का व्रत शुरू कर दिया। व्रती अब 21 नवंबर को सुबह उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलेंगी। यमुनापार, नौबस्ता, बल्केश्वर, कमला नगर, नामनेर, लोहामंडी आदि क्षेत्रों में व्रती महिलाओं ने मिलकर पूजन किया। तेज नगर कमला नगर में खरना पर महिला व्रतियों ने पूजा की। खीर बनाकर खाई। षष्ठी पूजन के लिए प्रसाद बनाया। पूजन में गीता देवी, रूपा, नीलम, पुष्पा, मीना देवी, क्रांति देवी मौजूद रहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
खरना पर शाम को पूजन के बाद व्रतियों ने ईंट व मिट्टी से बने चूल्हे पर खीर बनाई। पूजा स्थल की सफाई की। केले का पत्ता बिछाकर उस पर अर्द्ध चंद्र की आकृति बनाई और सिंदूर लगाकर उसके पास दीपक जलाया। संतान और पति के लिए अग्रासन निकाला गया।
विज्ञापन
चंद्रमा और छठ मैया की पूजा करने के बाद खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। इसके बाद से ही षष्ठी का व्रत शुरू कर दिया। व्रती अब 21 नवंबर को सुबह उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलेंगी। यमुनापार, नौबस्ता, बल्केश्वर, कमला नगर, नामनेर, लोहामंडी आदि क्षेत्रों में व्रती महिलाओं ने मिलकर पूजन किया। तेज नगर कमला नगर में खरना पर महिला व्रतियों ने पूजा की। खीर बनाकर खाई। षष्ठी पूजन के लिए प्रसाद बनाया। पूजन में गीता देवी, रूपा, नीलम, पुष्पा, मीना देवी, क्रांति देवी मौजूद रहीं।
विज्ञापन
बल्केश्वर घाट पर सफाई की गई
पूर्वांचल संस्कृति सेवा समिति की ओर से गुरुवार को बल्केश्वर घाट पर सफाई कराई गई। समिति के उपाध्यक्ष मुन्ना मिश्रा ने बताया कि ज्यादातर लोग घरों व कॉलोनियों में पूजा करेंगे। कुछ लोग घाट पर आएंगे और सामाजिक दूरी का ध्यान रखते हुए पूजा करेंगे। इसलिए घाट पर सफाई कराई गई।
महिलाओं ने छठ मैया के गीत गाए
यमुनापार स्थित पीलाखार के आदिशक्ति मां दुर्गा मंदिर में महिलाओं ने छठ मैया पूजा की और ‘कांच ही बांस की बहंगिया, बहंगी लचकत जाए...’ आदि गीत गाए। कार्यक्रम में सुनीता भटनागर, रीना सिंह, अंजलि यादव, रेखा देवी, कृष्णा दुबे, नीलम मौजूद रही।
आज अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा
छठ मैया का व्रत रखने वाली महिलाएं शुक्रवार शाम (षष्ठी तिथि पर) अस्ताचलगामी (डूबते) सूर्य को अर्घ्य देंगी। इस बार अधिकतर लोग घरों व कॉलोनी में ही पूजन करेंगे। कुछ लोग यमुना के घाटों पर भी पहुंचेंगे।
पूर्वांचल संस्कृति सेवा समिति की ओर से गुरुवार को बल्केश्वर घाट पर सफाई कराई गई। समिति के उपाध्यक्ष मुन्ना मिश्रा ने बताया कि ज्यादातर लोग घरों व कॉलोनियों में पूजा करेंगे। कुछ लोग घाट पर आएंगे और सामाजिक दूरी का ध्यान रखते हुए पूजा करेंगे। इसलिए घाट पर सफाई कराई गई।
महिलाओं ने छठ मैया के गीत गाए
यमुनापार स्थित पीलाखार के आदिशक्ति मां दुर्गा मंदिर में महिलाओं ने छठ मैया पूजा की और ‘कांच ही बांस की बहंगिया, बहंगी लचकत जाए...’ आदि गीत गाए। कार्यक्रम में सुनीता भटनागर, रीना सिंह, अंजलि यादव, रेखा देवी, कृष्णा दुबे, नीलम मौजूद रही।
आज अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा
छठ मैया का व्रत रखने वाली महिलाएं शुक्रवार शाम (षष्ठी तिथि पर) अस्ताचलगामी (डूबते) सूर्य को अर्घ्य देंगी। इस बार अधिकतर लोग घरों व कॉलोनी में ही पूजन करेंगे। कुछ लोग यमुना के घाटों पर भी पहुंचेंगे।