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होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल को जनरेटर के लिए ईंधन, पानी के लिए बोरिंग की लेनी होगी अनुमति

Sun, 11 Oct 2020 12:02 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 11 Oct 2020 12:02 AM IST
सार

  • आगरा में हवा, पानी, भूगर्भ जल और ध्वनि प्रदूषण को लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने होटल, रेस्टोरेंट, मोटल्स, बैंक्वेट हॉल पर कड़ा शिकंजा कस दिया है। 

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Central Pollution Control Board issued guidelines for hotels, restaurants, banquet in agra
एनजीटी

विस्तार

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल- एनजीटी) के आदेश पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी की गई गाइडलाइन को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सार्वजनिक नोटिस के जरिए जारी कर दिया है। इसमें होटलों, रेस्टोरेंट पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई निर्देश दिए गए हैं, जिनका पालन उन्हें करना होगा।

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साल में दो बार नियमों के पालन के लिए राज्य बोर्ड जांच रिपोर्ट तैयार करेंगे। ताजनगरी में 650 से ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट है जिन्हें प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई उपाय करने होंगे। छोटे होटलों, रेस्टोरेंट, मैरिज होम आदि के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा तय मानकों में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) लगाना प्रमुख है। 
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सितारा होटलों के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाना अनिवार्य है। 20 या इससे कम कमरों वाले होटल, 100 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले बैंक्वेट हॉल और 36 लोगों की क्षमता वाले रेस्टोरेंट को ईटीपी लगाना होगा। ईटीपी से होने वाले डिस्चार्ज में पर्यावरणीय मानकों का पालन करना होगा। 

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जल प्रदूषण नियंत्रण के लिए ये करना होगा
- एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) लगाना अनिवार्य होगा, जिससे किचन, लांड्री और घरेलू सीवेज का शोधन किया जा सके।
- शोधित सीवेज का उपयोग टॉयलेट फ्लशिंग, फर्श धोने और बगीचे में किया जाएगा।
- पानी की खपत के लिए मीटर लगाना होगा। ईटीपी पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्लो मीटर लगाना होगा।
- भूगर्भ जल के दोहन के लिए बोरिंग को संबंधित विभाग की अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति के भूगर्भ जल दोहन पर कार्रवाई की जाएगी।
- रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा।

वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए ये करना होगा
- जनरेटर में उसी ईंधन का उपयोग किया जा सकेगा, जिसके लिए अनुमति होगी।
- खाना पकाने और रसोई से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए उचित इंतजाम करने होंगे
- कमरों में रोशनी, पानी गर्म करने में सौर ऊर्जा का उपयोग करना होगा।
- पर्यावरण को क्षति पहुंचाने पर सीपीसीबी और यूपीपीसीबी जुर्माना कर सकेंगे।

कूड़ा निस्तारण के लिए ये करना होगा
- 100 किग्रा प्रतिदिन का कूड़ा जनरेट करने वाले मैरिज होम को बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखा जाएगा।
- बगीचे से निकलने वाले कचरे को अलग करना होगा। बाहर फेंकने के बजाय अपने परिसर में ही एकत्र करेंगे।
- खाद्य सामग्री के कचरे को अन्य कचरे के बजाय अलग रखकर खाद बनानी होगी।
- डिस्पोजेबल प्लास्टिक का कम से कम उपयोग और रिसाइकिलिंग करनी होगी।
- नगर निगम व नगर निकायों को कूड़ा लेने और निस्तारण की व्यवस्था करनी होगी।

वेबसाइट पर भी डाली गाइडलाइन
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भुवन प्रकाश यादव ने कहा कि एनजीटी के आदेश पर तैयार गाइडलाइन सार्वजनिक प्रकाशित की गई है। हमारी वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। अब इसी गाइडलाइन का पालन कराया जाएगा। होटल, रेस्टोरेंट और मैरिज होम को अनुमति देने से पूर्व संबंधित विभागों को गाइडलाइन के मानकों पर ध्यान देना होगा।  

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