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ग्राम संगठन को खराब फर्नीचर देने के मामले में बीएमएम दोषी
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मैनपुरी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित ग्राम संगठन को खराब फर्नीचर व सामान की आपूर्ति के मामले में ब्लॉक मिशन मैनेजर (बीएमएम) को दोषी पाया गया है। जांच समिति की रिपोर्ट पर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने बीएमएम पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
विकास खंड जागीर के गांव कछपुरा में संचालित उजाला महिला आजीविका ग्राम संगठन ने जबरन खराब गुणवत्ता के सामान और फर्नीचर की आपूर्ति की शिकायत की थी। मामले में मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने अपर जिलाधिकारी बी. राम और परियोजना निदेशक सुरेश चंद्र मिश्रा को जांच के आदेश दिए थे।
जांच की गई तो सामान की गुणवत्ता कुल सामान की कीमत साढ़े 24 हजार के सापेक्ष खराब पाई गई। शिकायत में बताए गए शैलेंद्र और संतोष नाम का कोई भी कर्मचारी जांच अधिकारियों को भी विभाग में कार्यरत नहीं मिला। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में ये भी लिखा कि ब्लॉक पर तैनात एनआरएलएम के ब्लॉक मिशन मैनेजर की ये जिम्मेदारी है कि वह ग्राम संगठन को सामान की गुणवत्ता देखकर सामान उपलब्ध कराए, लेकिन इसमें लापरवाही की गई।
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ऐसे में समिति ने जागीर में तैनात ब्लॉक मिशन मैनेजर देवेंद्र मालवीय को दोषी ठहराते हुए सीडीओ को रिपोर्ट भेजी थी। रिपोर्ट के आधार पर सीडीओ ईशा प्रिया ने ब्लॉक मिशन मैनेजर के खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश जारी किया गया है। उन्होंने उपायुक्त एनआरएलएम रंजीत सिंह को कार्रवाई कर अवगत कराने के आदेश दिए हैं।
ये था मामला
उजाला महिला आजीविका ग्राम संगठन कछपुरा की अध्यक्ष बीना कुमारी और सचिव सुनीता देवी ने सीडीओ से 14 अक्तूबर को शिकायत की थी। इसमें कहा था कि उन्हें कार्यालय के लिए खराब गुणवत्ता का सामान दे दिया गया और जबरन भुगतान करने के लिए भी शैलेंद्र और संतोष नाम के दो युवकों द्वारा दबाव बनाया जा रहा है। मामले में जांच कर कार्रवाई की मांग की गई थी।
कितनी कीमत का क्या भेजा गया सामान
अलमारी-8000
कुर्सियां-5600
मेज-4200
पंखा-1800
मिल्टन-1200
घड़ी-250
व्हाइट बोर्ड-1500
दरी-1800
कैल्कुलेटर-150
ग्राम संगठन के पदाधिकारियों की शिकायत पर एडीएम और परियोजना निदेशक को जांच सौंपी थी। जांच में ब्लॉक मिशन मैनेजर की लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।
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विकास खंड जागीर के गांव कछपुरा में संचालित उजाला महिला आजीविका ग्राम संगठन ने जबरन खराब गुणवत्ता के सामान और फर्नीचर की आपूर्ति की शिकायत की थी। मामले में मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने अपर जिलाधिकारी बी. राम और परियोजना निदेशक सुरेश चंद्र मिश्रा को जांच के आदेश दिए थे।
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जांच की गई तो सामान की गुणवत्ता कुल सामान की कीमत साढ़े 24 हजार के सापेक्ष खराब पाई गई। शिकायत में बताए गए शैलेंद्र और संतोष नाम का कोई भी कर्मचारी जांच अधिकारियों को भी विभाग में कार्यरत नहीं मिला। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में ये भी लिखा कि ब्लॉक पर तैनात एनआरएलएम के ब्लॉक मिशन मैनेजर की ये जिम्मेदारी है कि वह ग्राम संगठन को सामान की गुणवत्ता देखकर सामान उपलब्ध कराए, लेकिन इसमें लापरवाही की गई।
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ऐसे में समिति ने जागीर में तैनात ब्लॉक मिशन मैनेजर देवेंद्र मालवीय को दोषी ठहराते हुए सीडीओ को रिपोर्ट भेजी थी। रिपोर्ट के आधार पर सीडीओ ईशा प्रिया ने ब्लॉक मिशन मैनेजर के खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश जारी किया गया है। उन्होंने उपायुक्त एनआरएलएम रंजीत सिंह को कार्रवाई कर अवगत कराने के आदेश दिए हैं।
ये था मामला
उजाला महिला आजीविका ग्राम संगठन कछपुरा की अध्यक्ष बीना कुमारी और सचिव सुनीता देवी ने सीडीओ से 14 अक्तूबर को शिकायत की थी। इसमें कहा था कि उन्हें कार्यालय के लिए खराब गुणवत्ता का सामान दे दिया गया और जबरन भुगतान करने के लिए भी शैलेंद्र और संतोष नाम के दो युवकों द्वारा दबाव बनाया जा रहा है। मामले में जांच कर कार्रवाई की मांग की गई थी।
कितनी कीमत का क्या भेजा गया सामान
अलमारी-8000
कुर्सियां-5600
मेज-4200
पंखा-1800
मिल्टन-1200
घड़ी-250
व्हाइट बोर्ड-1500
दरी-1800
कैल्कुलेटर-150
ग्राम संगठन के पदाधिकारियों की शिकायत पर एडीएम और परियोजना निदेशक को जांच सौंपी थी। जांच में ब्लॉक मिशन मैनेजर की लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।