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कैंसर यूनिट चालू करने के प्रस्ताव पर शासन ने साधी चुप्पी
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14एमएनपी-16-कैंसर यूनिट
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। कैंसर यूनिट को शुरू कराने में अब शासन भी कोई रुचि लेता नहीं दिख रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा भेजे गए पत्रों का शासन से कोई जवाब नहीं मिल रहा है। संभावना जताई जा रही है कि अब कैंसर यूनिट शायद हाल फिलहाल चालू न हो।
जिले में नौ साल पहले स्थापित की गई कैंसर यूनिट के संचालन को लेकर अब शासन ने भी चुप्पी साध रखी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा बार-बार शासन और उच्चाधिकारियों को पत्र भेजे गए, लेकिन आज तक इन पत्रों का कोई जवाब नहीं मिल सका। पत्रों का जवाब न मिलने से ऐसा लग रहा है कि कैंसर यूनिट संचालन होना अब संभव नहीं होगा। इसके पीछे माना जा रहा है कि कैंसर यूनिट में लगी मशीनें पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं और नई मशीनों के लिए जो खर्चा आएगा उसे सरकार वहन करने को तैयार नहीं है। कैंसर यूनिट की खराब मशीनों को सही कराने के लिए कार्यदायी संस्था सीमेंस ने करीब दो करोड़ का खर्चा बताया है।
अब तक लिखे पत्रस्
कार्यदायी संस्था सीमेंस की रिपोर्ट के बाद सीएमएस ने शासन को कई पत्र लिखे।
पहला पत्र जुलाई
दूसरा पत्र अक्तूबर
तीसरा पत्र नवंबर
जून में कराया गया था सर्वे
पांच महीने पहले मुख्यमंत्री के निर्देश पर 27 जून को जिले में पहुंची डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने यूनिट की जांच की थी। कार्यदायी संस्था सीमेंस के सीनियर मैनेजर डॉ. अशोक चौधरी, स्वास्थ्य विभाग की तरफ से फिरोजाबाद के आरएसओ डॉ. नसीम अहमद, लखनऊ से अभिषेक गहलोत आदि की टीम ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। टीम ने कई महत्वपूर्ण मशीनें खराब होने के साथ ही लगभग दो करोड़ का खर्च आने की बात कही थी।
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वर्ष 2005 में हुई थी यूनिट की स्थापना
जिले में कैंसर के मरीजों की अधिक संख्या को देखते हुए वर्ष 2005 में कैंसर यूनिट के लिए सात करोड़ की धनराशि जारी की गई थी। वर्ष 2010 में 6.50 करोड़ की लागत से यहां मशीनों की स्थापना कराई गई थी। 2015 में मशीनों को सही कराने के लिए एक करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। 550 से अधिक लोग वर्तमान में जिले में कैंसर की बीमारी से जूझ रहे हैं।
शासन से जानकारी मांगी गई थी, जिस पर पत्र भेज दिया गया था। विभागीय निर्देशों के अनुसार पत्राचार किए गए हैं। कैंसर यूनिट के संबंध में कोई आदेश नहीं प्राप्त हुआ है। जैसे निर्देश मिलेंगे उनका पालन किया जाएगा।
डॉ. आरके सागर, सीएमएस
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जिले में नौ साल पहले स्थापित की गई कैंसर यूनिट के संचालन को लेकर अब शासन ने भी चुप्पी साध रखी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा बार-बार शासन और उच्चाधिकारियों को पत्र भेजे गए, लेकिन आज तक इन पत्रों का कोई जवाब नहीं मिल सका। पत्रों का जवाब न मिलने से ऐसा लग रहा है कि कैंसर यूनिट संचालन होना अब संभव नहीं होगा। इसके पीछे माना जा रहा है कि कैंसर यूनिट में लगी मशीनें पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं और नई मशीनों के लिए जो खर्चा आएगा उसे सरकार वहन करने को तैयार नहीं है। कैंसर यूनिट की खराब मशीनों को सही कराने के लिए कार्यदायी संस्था सीमेंस ने करीब दो करोड़ का खर्चा बताया है।
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अब तक लिखे पत्रस्
कार्यदायी संस्था सीमेंस की रिपोर्ट के बाद सीएमएस ने शासन को कई पत्र लिखे।
पहला पत्र जुलाई
दूसरा पत्र अक्तूबर
तीसरा पत्र नवंबर
जून में कराया गया था सर्वे
पांच महीने पहले मुख्यमंत्री के निर्देश पर 27 जून को जिले में पहुंची डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने यूनिट की जांच की थी। कार्यदायी संस्था सीमेंस के सीनियर मैनेजर डॉ. अशोक चौधरी, स्वास्थ्य विभाग की तरफ से फिरोजाबाद के आरएसओ डॉ. नसीम अहमद, लखनऊ से अभिषेक गहलोत आदि की टीम ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। टीम ने कई महत्वपूर्ण मशीनें खराब होने के साथ ही लगभग दो करोड़ का खर्च आने की बात कही थी।
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वर्ष 2005 में हुई थी यूनिट की स्थापना
जिले में कैंसर के मरीजों की अधिक संख्या को देखते हुए वर्ष 2005 में कैंसर यूनिट के लिए सात करोड़ की धनराशि जारी की गई थी। वर्ष 2010 में 6.50 करोड़ की लागत से यहां मशीनों की स्थापना कराई गई थी। 2015 में मशीनों को सही कराने के लिए एक करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। 550 से अधिक लोग वर्तमान में जिले में कैंसर की बीमारी से जूझ रहे हैं।
शासन से जानकारी मांगी गई थी, जिस पर पत्र भेज दिया गया था। विभागीय निर्देशों के अनुसार पत्राचार किए गए हैं। कैंसर यूनिट के संबंध में कोई आदेश नहीं प्राप्त हुआ है। जैसे निर्देश मिलेंगे उनका पालन किया जाएगा।
डॉ. आरके सागर, सीएमएस