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UP: विकास कार्यों का हाल देखिए...हवा में लटके-लटके ही पुल की बढ़ गई 71.13 करोड़ लागत, 15 साल से पड़े अधूरे

Sun, 20 Jul 2025 12:44 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: अरुन पाराशर Updated Sun, 20 Jul 2025 12:44 PM IST
सार

यमुना नदी और रेल लाइनों पर प्रस्तावित पुलों का निर्माण नहीं होने से करीब 100 गांव प्रभावित हैं। बन जाने पर करीब 2 लाख लोगों को फायदा होता।

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Bridges lying incomplete for 15 years
अधूरा पुल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा में नदियों और रेलवे लाइनों के ऊपर बनने वाले पुलों की चाल देखिए। आधा दर्जन से अधिक पुल धरातल पर नहीं उतर पा रहे। हवा में लटके-लटके ही इनकी लागत 71.13 करोड़ रुपये बढ़ गई है।
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रावली मंदिर पर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण 15 साल से अधूरा पड़ा है। जबकि दक्षिणी बाईपास पर रुनकता से रोहता मार्ग को जोड़ने वाला आरओबी 7 साल से अधर में है। यमुना नदी पर मेहरा नहारगंज में अनवारे पुल का निर्माण 15 साल से अधूरा पड़ा है। यह पुल बन जाने पर आगरा और फिरोजाबाद को जोड़ता।
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करीब 50 गांव के लोगों को पुल निर्माण नहीं होने से 25 किमी चक्कर लगाना पड़ता है। आनंदी भैरों से डेरा बंजारा तक यमुना नदी पर 2023 में स्वीकृत हुए पुल निर्माण के लिए एक ईंट तक नहीं रखी जा सकी। उधर, रेणुका धाम के पास यमुना नदी पर रुनकता को बल्देव मार्ग से जोड़ने वाले पुल के सिर्फ पिलर खड़े हो सके। यह पुल भी हवा में लटका है।

लेटलतीफी के कारण इस पुल की लागत 24.03 करोड़ रुपये बढ़ गई। दक्षिणी बाईपास पर आरओबी की लागत में 17.92 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। जबकि रुनकता से रोहता मार्ग को जोड़ने वाले आरओबी निर्माण की लागत 20 करोड़ रुपये बढ़ चुकी है। रावली मंदिर आरओबी की लागत 9.13 करोड़ रुपये बढ़ चुकी है।

 
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दो लाख से अधिक लोगों को होता फायदा
यमुना नदी और रेल लाइनों पर प्रस्तावित पुलों का निर्माण नहीं होने से करीब 100 गांव प्रभावित हैं। बन जाने पर करीब 2 लाख लोगों को फायदा होता। उन्हें लंबी दूरी और चक्कर नहीं काटने पड़ते। आरओबी निर्माण से राहगीरों के समय की बचत होती। जन प्रहरी संस्था संयोजक नरोत्तम सिंह का कहना है कि पुलों के निर्माण की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।

 
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इन पुलों का निर्माण लटका
- यमुना नदी पर आनंदी भैरों से डेरा बंजारा गिजौली मार्ग पर 111 करोड़ रुपये से पुल का निर्माण 16 नवंबर 2023 को स्वीकृत हुआ। 31 दिसंबर 2026 तक निर्माण पूर्ण होना है। काम शुरू नहीं हुआ।
- यमुना नदी पर रेणुका धाम के पास रुनकता से बल्देव मार्ग को जोड़ने के लिए 35.58 करोड़ रुपये से पुल निर्माण अक्तूबर 2020 में स्वीकृत हुआ। 30 जून 2025 तक काम पूरा होना था। सिर्फ पिलर खड़े हुए। लागत 24.03 करोड़ बढ़कर अब 59.41 करोड़ हो गई है।
- एनएच-2 को एनएच-3 से जोड़ने के लिए रुनकता से रोहता मार्ग दक्षिणी बाईपास रेल फाटक 11सी-2टी का निर्माण 1 फरवरी 2019 को 60.09 करोड़ से स्वीकृत हुआ। 28 फरवरी 2025 तक काम पूरा होना था। लागत बढ़कर 78.01 करोड़ रुपये हो चुकी है।
- एमजी रोड पर रावली मंदिर के पास आरओबी निर्माण 1 जून 2010 को 10.82 करोड़ से स्वीकृत हुआ। लागत बढ़कर अब 19.95 करोड़ पहुंच गई। 50 फीसदी पुल का निर्माण का पीडब्ल्यूडी ने दावा किया है। 31 दिसंबर 2025 को पुल निर्माण पूरा होना है।

शासन को भेजा है पत्र
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने बताया कि पुलों के निर्माण की समीक्षा की गई है। बजट व अन्य बिंदुओं पर शासन को पत्र भेजा है। संबंधित विभागों से भी जवाब मांगा जाएगा। 

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