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मूल्यांकन के लिए आए फर्जी परीक्षक, पकड़े
अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 14 Jun 2016 12:45 AM IST
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अंबेडकर विवि
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में अभी तक फर्जी डिग्री और फर्जी छात्रों के मामले सामने आए थे। अब मूल्यांकन में फर्जी परीक्षक भी पहुंचने लगे हैं। मामला तब सामने आया जब प्राचार्य की संस्तुति, शैक्षणिक अनुभव के प्रमाण पत्र फर्जी निकले। इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए जब मूल्यांकन प्रभारी पत्र लिखने लगे तो ये गिड़गिड़ाने लगे। ऐसे में इनसे माफीनामा भरवाकर छोड़ दिया गया। छलेसर कैंपस में मुख्य परीक्षा और खंदारी कैंपस के इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट एंड टूरिज्म में टूरिज्म परीक्षा की कापियों के मूल्यांकन के लिए परीक्षक पहुंच रहे हैं।
सोमवार को खंदारी कैंपस में दो लोगों ने पहुंचकर खुद को गाजीपुर स्थित महाविद्यालय में शिक्षक बताया। इनके पास कालेज की ओर से शिक्षक होने का प्रमाण पत्र, पांच साल का अनुभव होने का पत्र था। जब विषय के बारे में पूछताछ की गई तो वह सही जानकारी नहीं दे सके। कालेज के प्राचार्य का फोन नंबर पूछा तो आनाकानी करने लगे। शंका होने पर सख्ती से पूछताछ की गई तो उनकी पोल खुल गई। कुलसचिव केएन सिंह ने बताया कि फर्जी प्रमाण पत्रों का सहारा लेकर कापियां जांचने आ रहे परीक्षकों की पड़ताल के लिए प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं। मानक उपलब्ध करा दिए हैं, संदेह होने पर ऐसे परीक्षकों पर कार्रवाई को भी कहा गया है। गौरतलब है कि रविवार को भी छलेसर कैंपस में दो फर्जी परीक्षक आए थे जिन्हें माफी मांगने के बाद छोड़ दिया गया था।
कापियां जांचने में हर रोज ढाई हजार रुपये
स्नातक की एक कापी के मूल्यांकन के एवज में परीक्षक को 15 रुपये और परास्नातक की कापी के लिए 18 रुपये मिलते हैं। एक दिन में परीक्षक 150 कापियां जांच सकता है। ऐसे में हर रोज करीब ढाई हजार रुपये से अधिक रुपये बनते हैं।
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परीक्षकों से ले रहे शपथ पत्र
फर्जी परीक्षकों से बचने के लिए अब शपथ पत्र लिया जा रहा है। इसमें परीक्षक का नाम, पिता का नाम, महाविद्यालय का पता और नाम, संबंधित विषय, पैन कार्ड, बैंक की पास बुक जैसी तमाम जानकारी दर्ज हैं। इसमें से कोई भी जानकारी गलत होने पर कानूनी कार्रवाई का भी उल्लेख है।
आनलाइन किया जा रहा डाटा
आईटीएचएम निदेशक डा. लवकुश मिश्रा ने बताया कि मूल्यांकन में आने वाले सभी परीक्षकों का डाटा, शपथ पत्र ऑनलाइन किया जा रहा है। इससे कोई भी इनके बारे में जानकारी कर सकता है। साथ ही मूल्यांकन में गलती पाए जाने पर जिम्मेदारी भी उनकी होगी। इसके लिए उत्तरपुस्तिकाओं की नंबरिंग संबंधित परीक्षक के नाम दर्ज कराई जा रही है।
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सोमवार को खंदारी कैंपस में दो लोगों ने पहुंचकर खुद को गाजीपुर स्थित महाविद्यालय में शिक्षक बताया। इनके पास कालेज की ओर से शिक्षक होने का प्रमाण पत्र, पांच साल का अनुभव होने का पत्र था। जब विषय के बारे में पूछताछ की गई तो वह सही जानकारी नहीं दे सके। कालेज के प्राचार्य का फोन नंबर पूछा तो आनाकानी करने लगे। शंका होने पर सख्ती से पूछताछ की गई तो उनकी पोल खुल गई। कुलसचिव केएन सिंह ने बताया कि फर्जी प्रमाण पत्रों का सहारा लेकर कापियां जांचने आ रहे परीक्षकों की पड़ताल के लिए प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं। मानक उपलब्ध करा दिए हैं, संदेह होने पर ऐसे परीक्षकों पर कार्रवाई को भी कहा गया है। गौरतलब है कि रविवार को भी छलेसर कैंपस में दो फर्जी परीक्षक आए थे जिन्हें माफी मांगने के बाद छोड़ दिया गया था।
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कापियां जांचने में हर रोज ढाई हजार रुपये
स्नातक की एक कापी के मूल्यांकन के एवज में परीक्षक को 15 रुपये और परास्नातक की कापी के लिए 18 रुपये मिलते हैं। एक दिन में परीक्षक 150 कापियां जांच सकता है। ऐसे में हर रोज करीब ढाई हजार रुपये से अधिक रुपये बनते हैं।
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परीक्षकों से ले रहे शपथ पत्र
फर्जी परीक्षकों से बचने के लिए अब शपथ पत्र लिया जा रहा है। इसमें परीक्षक का नाम, पिता का नाम, महाविद्यालय का पता और नाम, संबंधित विषय, पैन कार्ड, बैंक की पास बुक जैसी तमाम जानकारी दर्ज हैं। इसमें से कोई भी जानकारी गलत होने पर कानूनी कार्रवाई का भी उल्लेख है।
आनलाइन किया जा रहा डाटा
आईटीएचएम निदेशक डा. लवकुश मिश्रा ने बताया कि मूल्यांकन में आने वाले सभी परीक्षकों का डाटा, शपथ पत्र ऑनलाइन किया जा रहा है। इससे कोई भी इनके बारे में जानकारी कर सकता है। साथ ही मूल्यांकन में गलती पाए जाने पर जिम्मेदारी भी उनकी होगी। इसके लिए उत्तरपुस्तिकाओं की नंबरिंग संबंधित परीक्षक के नाम दर्ज कराई जा रही है।