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अमर उजाला एक्सक्लूसिव: एसएन मेडिकल कॉलेज में निगेटिव ग्रुप का रक्त खत्म

Thu, 17 Dec 2020 10:44 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 17 Dec 2020 10:44 AM IST
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Blood of Negative Group Ends In SN Medical College Bank
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
आगरा एसएन मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक में रक्त की कमी हो गई है। निगेटिव ग्रुप का रक्त खत्म हो गया है। इससे मरीजों के इलाज में दिक्कत आ रही है। ब्लड बैंक में औसतन 300 से अधिक यूनिट का स्टॉक रहता था, लेकिन अब 60 से 80 यूनिट ही रह गया है।
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एसएन में हर महीने 450 से 500 यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है। इसमें से 300 यूनिट एक्सचेंज में मिल जाता है, बाकी की कमी रक्तदान शिविर में जुटे रक्त से हो जाती है। लेकिन, कोरोना वायरस के कारण शिविर कम लगने से स्टॉक खत्म हो रहा है।
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ए और एबी पॉजिटिव ग्रुप के रक्त की भी कमी
एसएन में ए निगेटिव, बी निगेटिव, ओ निगेटिव और एबी निगेटिव का स्टॉक खत्म हो गया है। इसके अलावा ए और एबी पॉजिटिव ग्रुप के रक्त की कमी है। इससे जननी सुरक्षा योजना, कैंसर रोग, आयुष्मान योजना, थैलेसीमिया, लावारिस मरीजों के इलाज को दिक्कत आ रही है। इन मरीजों को एसएन से बिना डोनर के ही रक्त उपलब्ध कराया जाता है।
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मरीजों की जान बचाने को रक्तदान करें
निगेटिव ग्रुप स्टॉक में नहीं हैं, किसी इमरजेंसी में मरीज के लिए रक्तदाताओं से संपर्क करते हैं। ए और एबी पॉजिटिव ग्रुप के रक्त की भी कमी है। लोगों से अपील है कि वह मरीजों की जान बचाने के लिए रक्तदान करें। -डॉ. नीतू चौहान, प्रभारी ब्लड बैंक एसएन

प्राइवेट ब्लड बैंक में भी स्टॉक कम
 जिले में 14 चैरिटेबल ब्लड बैंक हैं। यहां मरीजों के इलाज के लिए रोजाना 320 से 360 यूनिट रक्त की सप्लाई होती है। रक्त की कमी के कारण ब्लड बैंक में एबी पॉजिटिव, ए पॉजिटिव और ए निगेटिव, बी निगेटिव, ओ निगेटिव और एबी निगेटिव ब्लड की भारी कमी हो गई है। समर्पण ब्लड बैंक और लोकहितम् ब्लड बैंक में तो रक्त की कमी से थैलेसीमिया के मरीजों के लिए रक्त जुटाना मुश्किल हो रहा है।

कोरोना वायरस के चलते ज्यादा दिक्कत
मरीजों के रक्त की जरूरत को सामाजिक संगठनों के शिविर में जुटे रक्त से पूर्ति कर लेते थे, लेकिन कोरोना वायरस के कारण आठ महीने से रक्तदान शिविरों की भारी कमी हुई है। जहां औसतन हर महीने 30 से 40 शिविर लगते थे, वह दो से पांच शिविर ही रह गए हैं।

केस स्टडी एक: तीन ब्लड बैंक में नहीं मिला एबी पॉजिटिव
बोदला निवासी गौरव कुमार में हीमोग्लोबिन की कमी पर चिकित्सकों ने दो यूनिट रक्त की जरूरत बताई। एबी पॉजिटिव ब्लड ग्रुप के लिए तीन ब्लड बैंक में गया, लेकिन इस ग्रुप का रक्त नहीं था। इस ग्रुप के लोगों से रक्तदान कर ब्लड उपलब्ध कराने को सोशल मीडिया का सहारा लिया है।

केस स्टडी दो: तीसरे दिन मिला रक्त
बरहन निवासी राजवीर सिंह का 12 साल का बच्चा एसएन में भर्ती है। रक्त के लिए दो दिन चक्कर काटने पर उसके ग्रुप का रक्त नहीं मिला। तीसरे दिन संबंधित ग्रुप के रक्तदान करने पर मरीज के लिए रक्त की व्यवस्था हो पाई।
 

रक्त के लिए इंतजार करना पड़ रहा
सभी निगेटिव ग्रुप और ए, एबी पॉजिटिव ग्रुप के रक्त की कमी चली आ रही है। कोरोना वायरस के कारण शिविर कम लगने से स्थिति ज्यादा खराब हुई है। इस ग्रुप के मरीजों को रक्त आने तक इंतजार करना पड़ रहा है। -अखिलेश अग्रवाल, निदेशक लोकहितम ब्लड बैंक

समाजसेवी और रक्तदाताओं से व्यवस्था करा रहे
- थैलेसीमिया, डायलिसिस के मरीजों को बिना डोनर के रक्त उपलब्ध कराते थे, लेकिन इनके लिए भी रक्त की कमी है। पहले से समाजसेवी और रक्तदाताओं से दान कराते हुए व्यवस्था करा रहे हैं। -अजय कंसल, निदेशक समर्पण ब्लड बैंक
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