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दर्द से आजादी तक: हाथी 'मनु' ने वर्षों तक पीड़ा और दुर्व्यवहार झेला, अब मनाई नई जिंदगी की पहली वर्षगांठ
Sat, 14 Feb 2026 09:48 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 14 Feb 2026 09:48 AM IST
सार
हाथी मनु को पिछले वर्ष मऊ जिले से वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम लेकर आई थी। उसने वर्षों तक पीड़ा और दुर्व्यवहार झेला है। उसकी आजादी की पहली वर्षगांठ मनाई गई।
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58 वर्षीय हाथी मनु
- फोटो : wildlife sos
विस्तार
58 वर्षीय हाथी मनु के जीवन में यह दिन किसी नए जन्म से कम नहीं है। फरह स्थित हाथी संरक्षण केंद्र में उसने अपनी आजादी की पहली वर्षगांठ मनाई। एक ऐसी आजादी, जिसके लिए उसने दशकों का दर्द सहा। सड़कों पर भीख मांगने के लिए मजबूर किया गया। मनु वर्षों तक पीड़ा और दुर्व्यवहार झेलता रहा।
इन्सानी बेरुखी ने उसकी दोनों आंखों की रोशनी छीन ली। शरीर का वजन घट गया, जोड़ों का दर्द उसका स्थायी साथी बन गया। पैरों में फोड़े और पूरे शरीर पर घाव उसकी बीती जिंदगी की मूक गवाही देते रहे। लेकिन, फिर उसकी जिंदगी ने करवट ली। वाइल्डलाइफ एसओएस ने वन विभाग के सहयोग से उसे यातना से बाहर निकाला।
विशेष लिफ्टिंग उपकरणों की मदद से उसे सहारा देकर खड़ा किया गया। जैसे टूटे हुए विश्वास को फिर से संभाला गया हो। आज मनु भले देख नहीं सकता, लेकिन वह महसूस करता है। देखभाल का स्पर्श, सुरक्षा का अहसास और अपनत्व की गर्माहट।
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वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने बताया कि मनु को समय के साथ अधिक सहज और आत्मविश्वासी होते देखना टीम के लिए बेहद सुकून भरा अनुभव है। उसकी हर छोटी प्रगति उत्सव है। मनु की यह वर्षगांठ सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उस उम्मीद का प्रतीक है कि करुणा हमेशा क्रूरता पर भारी पड़ती है।
ऐसे लाया गया था मनु
प्रदेश के मऊ जिले में वन अधिकारियों ने मनु के घायल और असहाय होने की सूचना गत वर्ष फरवरी में वाइल्डलाइफ एसओएस को दी थी। सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और उसे तत्काल जरूरी दवाएं दी गईं। चोटों के लिए लेजर थेरेपी और आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया गया। खराब स्थिति को देखते हुए वन विभाग की अनुमति से मनु को मथुरा स्थित वाइल्डलाइफ एसओएस हाथी अस्पताल लाया गया। अब एक साल बाद मनु बेहतर है। उसकी चाल में पहले जैसी बेबसी नहीं, बल्कि सुकून है।
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इन्सानी बेरुखी ने उसकी दोनों आंखों की रोशनी छीन ली। शरीर का वजन घट गया, जोड़ों का दर्द उसका स्थायी साथी बन गया। पैरों में फोड़े और पूरे शरीर पर घाव उसकी बीती जिंदगी की मूक गवाही देते रहे। लेकिन, फिर उसकी जिंदगी ने करवट ली। वाइल्डलाइफ एसओएस ने वन विभाग के सहयोग से उसे यातना से बाहर निकाला।
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विशेष लिफ्टिंग उपकरणों की मदद से उसे सहारा देकर खड़ा किया गया। जैसे टूटे हुए विश्वास को फिर से संभाला गया हो। आज मनु भले देख नहीं सकता, लेकिन वह महसूस करता है। देखभाल का स्पर्श, सुरक्षा का अहसास और अपनत्व की गर्माहट।
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वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने बताया कि मनु को समय के साथ अधिक सहज और आत्मविश्वासी होते देखना टीम के लिए बेहद सुकून भरा अनुभव है। उसकी हर छोटी प्रगति उत्सव है। मनु की यह वर्षगांठ सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उस उम्मीद का प्रतीक है कि करुणा हमेशा क्रूरता पर भारी पड़ती है।
ऐसे लाया गया था मनु
प्रदेश के मऊ जिले में वन अधिकारियों ने मनु के घायल और असहाय होने की सूचना गत वर्ष फरवरी में वाइल्डलाइफ एसओएस को दी थी। सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और उसे तत्काल जरूरी दवाएं दी गईं। चोटों के लिए लेजर थेरेपी और आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया गया। खराब स्थिति को देखते हुए वन विभाग की अनुमति से मनु को मथुरा स्थित वाइल्डलाइफ एसओएस हाथी अस्पताल लाया गया। अब एक साल बाद मनु बेहतर है। उसकी चाल में पहले जैसी बेबसी नहीं, बल्कि सुकून है।