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सफाई में संसाधन बड़ा संकट
अागरा ब्यूूराे
Updated Thu, 18 Feb 2016 01:17 AM IST
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स्वच्छता सर्वे में ताजनगरी के पिछड़ने की प्रमुख वजह सफाई संसाधनों का अभाव रहा। जिस रफ्तार से शहर बढ़ा है, उस गति से नगर निगम के संसाधन नहीं बढ़ें हैं। शहर में दर्जनों कालोनियां ऐसी हैं, जहां अभी तक निगम के सफाई कर्मी नहीं है। हेल्थ मैनुअल के मुताबिक आगरा शहर में करीब 7500 सफाई कर्मचारी होने चाहिए लेकिन लगभग 3000 हजार कर्मचारी ही हैं। नगर निगम में सफाई उपकरणों का भी संकट है। ऐसे में सफाई व्यवस्था पटरी पर कैसे आए, यह बड़ा सवाल है।
2011 के जनगणना के मुताबिक शहर की आबादी करीब 20 लाख है। पुराने हेल्थ मैनुअल के मुताबिक प्रति 10 हजार की आबादी करीब 60 सफाई कर्मचारी तैनात होने चाहिए थे। सफाई व्यवस्था में आधुनिक उपकरणों के प्रयोग और शहरों में सीवर लाइनों का जाल बिछ जाने के बाद हेल्थ मैनुअल में संशोधन किया गया है। संशोधन होने के पश्चात प्रति दस हजार की आबादी पर 28 से 35 कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए। इस स्थिति में नए हेल्थ मैनुअल के मुताबिक कर्मचारियों की गणना की जाए तो करीब आगरा जैसे शहर में करीब 7350 कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए लेकिन वर्तमान में नगर निगम में करीब 3000 कर्मचारी हैं। इनमें से करीब 1600 कर्मचारी स्थायी हैं और करीब 1600 ठेके और संविदा पर तैनात हैं। यही कारण है कि शहर में तमाम गली, मुहल्लों और कालोनियों में सफाई कर्मियों की नियुक्त तक नहीं की गई है। जरूरत पड़ने पर वहां ठेके के कर्मचारियों की गैंग लगाकर सफाई कराई जाती है। शासन ने आगरा नगर निगम के लिए करीब 1670 संविदा सफाई कर्मियों की भर्ती निकाली थी लेकिन अब भर्ती प्रक्रिया पर ही रोक लग गई है। यही नहीं, निगम में उपकरणों की भी भारी कमी है। निगम की सीमा में करीब 90 वार्ड हैं। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक सभी वार्ड कार्यालयों में कम से कम एक ट्रैक्टर, एक जेसीबी और एक ट्रिपर होना चाहिए लेकिन यहां महज 45 ट्रैक्टर, 15 जेसीबी और करीब 15 ट्रिपर हैं। इनमें से भी अधिकांश वाहन खराब रहते हैं।
अपर्याप्त संसाधनों में आगरा जैसे बड़े शहर की सफाई करना चुनौती पूर्ण कार्य है लेकिन कुशल रणनीति के आधार पर नगर निगम की टीम बेहतर सफाई व्यवस्था देने का प्रयास कर रही है। बस जनता से सहयोग की दरकार है। - सीपी शर्मा, जेएडएसओ
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बोर्ड परीक्षा में लगा दी सफाई इंस्पेक्टरों की ड्यूटी
शहर की सफाई व्यवस्था खस्ताहाल है, इसके बावजूद नगर निगम के सफाई इंस्पेक्टरों की ड्यूटी बोर्ड परीक्षा में लगा दी गई है। जेएडएसओ सीपी शर्मा सहित 10 इंस्पेक्टरों को स्ट्रैटिक मजिस्ट्रेट बनाया गया है। यही नहीं उनकी ड्यूटी आगरा से कई किलोमीटर दूर बाह, पिनाहट जैसे ब्लाकों में लगाई है। उन्हें सुबह सात बजे से शाम की परीक्षा समाप्त होने तक वहां रहना होगा। जिससे शहर की सफाई व्यवस्था और प्रभावित होगी। हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि नगर आयुक्त ने ड्यूटी कटवाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से वार्ता की है।
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2011 के जनगणना के मुताबिक शहर की आबादी करीब 20 लाख है। पुराने हेल्थ मैनुअल के मुताबिक प्रति 10 हजार की आबादी करीब 60 सफाई कर्मचारी तैनात होने चाहिए थे। सफाई व्यवस्था में आधुनिक उपकरणों के प्रयोग और शहरों में सीवर लाइनों का जाल बिछ जाने के बाद हेल्थ मैनुअल में संशोधन किया गया है। संशोधन होने के पश्चात प्रति दस हजार की आबादी पर 28 से 35 कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए। इस स्थिति में नए हेल्थ मैनुअल के मुताबिक कर्मचारियों की गणना की जाए तो करीब आगरा जैसे शहर में करीब 7350 कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए लेकिन वर्तमान में नगर निगम में करीब 3000 कर्मचारी हैं। इनमें से करीब 1600 कर्मचारी स्थायी हैं और करीब 1600 ठेके और संविदा पर तैनात हैं। यही कारण है कि शहर में तमाम गली, मुहल्लों और कालोनियों में सफाई कर्मियों की नियुक्त तक नहीं की गई है। जरूरत पड़ने पर वहां ठेके के कर्मचारियों की गैंग लगाकर सफाई कराई जाती है। शासन ने आगरा नगर निगम के लिए करीब 1670 संविदा सफाई कर्मियों की भर्ती निकाली थी लेकिन अब भर्ती प्रक्रिया पर ही रोक लग गई है। यही नहीं, निगम में उपकरणों की भी भारी कमी है। निगम की सीमा में करीब 90 वार्ड हैं। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक सभी वार्ड कार्यालयों में कम से कम एक ट्रैक्टर, एक जेसीबी और एक ट्रिपर होना चाहिए लेकिन यहां महज 45 ट्रैक्टर, 15 जेसीबी और करीब 15 ट्रिपर हैं। इनमें से भी अधिकांश वाहन खराब रहते हैं।
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अपर्याप्त संसाधनों में आगरा जैसे बड़े शहर की सफाई करना चुनौती पूर्ण कार्य है लेकिन कुशल रणनीति के आधार पर नगर निगम की टीम बेहतर सफाई व्यवस्था देने का प्रयास कर रही है। बस जनता से सहयोग की दरकार है। - सीपी शर्मा, जेएडएसओ
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बोर्ड परीक्षा में लगा दी सफाई इंस्पेक्टरों की ड्यूटी
शहर की सफाई व्यवस्था खस्ताहाल है, इसके बावजूद नगर निगम के सफाई इंस्पेक्टरों की ड्यूटी बोर्ड परीक्षा में लगा दी गई है। जेएडएसओ सीपी शर्मा सहित 10 इंस्पेक्टरों को स्ट्रैटिक मजिस्ट्रेट बनाया गया है। यही नहीं उनकी ड्यूटी आगरा से कई किलोमीटर दूर बाह, पिनाहट जैसे ब्लाकों में लगाई है। उन्हें सुबह सात बजे से शाम की परीक्षा समाप्त होने तक वहां रहना होगा। जिससे शहर की सफाई व्यवस्था और प्रभावित होगी। हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि नगर आयुक्त ने ड्यूटी कटवाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से वार्ता की है।