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पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे बांग्लादेशी, सुबह और शाम बदलते हैं ठिकाने

Sun, 14 Oct 2018 12:02 PM IST
चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला, आगरा
चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला, आगरा Updated Sun, 14 Oct 2018 12:02 PM IST
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Bangladeshi are changing their whereabouts after arrest of Rohingya Muslims
रुनकता स्थित नट बस्ती। - फोटो : अमर उजाला

आगरा में स्थान- रुनकता नट बस्ती, समय- दोपहर 12 बजे। बस्ती के गेट पर ही पांच-छह महिलाएं खड़ी हैं। कुछ बच्चे खेल रहे हैं। तभी बाइक पर एक पुलिसकर्मी आता है। महिलाएं उससे गुजारिश करने लगती हैं कि गिरफ्तार किए गए सइदुलगाजी को छोड़ दिया जाए। 

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सिपाही बस्ती के अंदर झांकता है तो महिलाएं कहने लगती हैं कि यहां और कोई बांग्लादेशी नहीं है, सभी बस्ती छोड़कर जा चुके हैं। सिपाही चला जाता है, लेकिन आसपास के लोगों का कहना है कि महिलाएं पुलिस की आंखों में धूल झोंक रही हैं। 
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बांग्लादेशी कहीं नहीं गए हैं। वे सुबह फरह चले जाते हैं और शाम को फिर यहीं लौट आते हैं। इस बस्ती में बांग्लादेशी, रोहिंग्या, पश्चिमी बंगाल और झारखंड के लोग रह रहे हैं। बांग्लादेशियों के सात-आठ परिवार हैं। सभी लोग कबाड़ का काम करते हैं। 
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युनूस रोहिंग्या मुस्लिम है। वह सात साल पहले आया था, उसने ही 16 रोहिंग्या मुस्लिमों को बुलाया है। युनूस की झोपड़ी के पास ही बांग्लादेशियों की झोपड़ियां हैं। इन पर ताला लगा है, लेकिन अंदर घर का पूरा सामान है। टीवी लगा है। केबिल का डिश एंटिना भी लगा है। साइकिल भी खड़ी है।

पड़ोस के एक दुकानदार ने बताया कि रोहिंग्या मुस्लिमों के आने के अगले दिन पुलिस आई थी। अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी उसी दिन से टेंशन में आ गए थे। अगले दिन सुबह पुरुष फरह चले गए, वहां भी ऐसी ही बस्ती है। फरह पास में ही है।

Bangladeshi are changing their whereabouts after arrest of Rohingya Muslims
रुनकता स्थित नट बस्ती में बातचीत करती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला

लोगों ने सोचा कि अब वापस नहीं आएंगे, लेकिन अगले दिन सुबह को वे फिर नजर आए। तब पता चला कि वे सुबह को जाते हैं, शाम को लौट आते हैं। अगर पुलिस रात में आए तो वे वहीं मिलेंगे। बस्ती की महिलाएं पुलिस के आते ही कहने लगती हैं कि बांग्लादेशी यहां से जा चुके हैं। वे अपना सामान क्यों नहीं ले गए? इस पर कहती हैं कि शायद बाद में ले जाएंगे।

आधार कार्ड बन गए, बिजली कनेक्शन भी हैं

अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार करना भी आसान नहीं है। पुलिस को पहले उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाने होंगे। इसके लिए पड़ताल करनी होगी। कारण यह है कि इन लोगों ने वोटर कार्ड, आधार कार्ड सब बनवा लिए हैं। इनके पास बिजली का कनेक्शन भी है। यह गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशी गाजी के नाम से हैं।

पड़ोसी से किराये पर ले रखा है प्लाट

Bangladeshi are changing their whereabouts after arrest of Rohingya Muslims
रुनकता स्थित नट बस्ती। - फोटो : अमर उजाला

बांग्लादेश के नागरिक गाजी ने नट बस्ती के पड़ोस में रहने वाले दुकानदार सुरेंद्र से प्लाट किराये पर ले रखा है। वह आठ हजार रुपये महीने किराया दे रहा था। बस्ती में रहने वाले लोगों को जगह उसने किराये पर दे रखी थी, उन्हें ब्याज पर पैसा भी देता था। सभी को कबाड़ के काम में लगा रखा था। गाजी की ठीकठाक कमाई थी, उसने एक प्लाट खरीदा था, जो पास में ही है, उसने दो गाड़ियां भी खरीदी थीं।

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