जाने के बाद भी बटेश्वर में ऐसे यादों में जिंदा रहेंगे अटल जी
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भले ही पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक गांव बटेश्वर को अब तक उपेक्षित रखा गया हो, लेकिन अब उनकी स्मृतियों को सहेजकर उन्हें मन में जिंदा रखने की कवायद शुरू हो गई है। उनके पैतृक गांव को अटल जी के नाम पर संरक्षित किया जा रहा है। पैतृक निवास के अवशेषों का संरक्षण करके स्मृति भवन बनाया जाएगा। यज्ञ स्थल पर प्रतिमा लगेगी और क्रांति स्थल भी सहेजा जाएगा।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की बटेश्वर से जुड़ी यादों को सहेजने के लिए कवायद शुरू हो गई है। अटलजी के पैतृक निवास के साथ उनकी स्मृतियों से जुड़े अन्य स्थलों को संरक्षित किया जाएगा। विधायक रानी पक्षालिका और पूर्व मंत्री अरिदमन सिंह के साथ सोमवार को बटेश्वर पहुंचे जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार ने क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए।
वर्ष 1942 में अटलजी ने अन्य क्रांतिकारियों के साथ जिस कोठी को तहस-नहस कर राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर खुद को आजाद घोषित किया था, उसे क्रांति स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। डीएम ने वन और राजस्व विभाग को जंगल के बीच स्थित इस जगह की पैमाइश कर इसे संरक्षित करने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए संपर्क मार्ग भी बनाया जाएगा।
अधिकारियों ने अटलजी का पैतृक निवास स्थल भी देखा। घर के नाम पर सिर्फ इसके अवशेष ही शेष हैं। डीएम ने आंगन में खड़े बबूल हटाने के साथ इस जगह पर स्मृति भवन बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। जिस स्थान पर अटलजी हवन किया करते थे, उसे भी संरक्षित कर वहां प्रतिमा स्थापित की जाएगी। बटेश्वर के मंदिर और घाट के जीर्णोद्धार का भी प्रस्ताव तैयार करने का आदेश दिया है।
जैन तीर्थ स्थल शौरीपुर का भी जीर्णोद्धार होगा। निरीक्षण के बाद डीएम ने बताया कि शासन के निर्देश पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के स्मृति स्थल और बटेश्वर, शौरीपुर के मंदिरों के विकास का प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। यह प्रस्ताव जल्द ही शासन को भेजे जाएंगे। इस दौरान एसएसपी अमित पाठक भी साथ थे।