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कश्मीर में बसने की फिर जागी उम्मीद, सालों पहले पलायन कर चुके कश्मीरियों में खुशी की लहर
Tue, 06 Aug 2019 12:01 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 06 Aug 2019 12:01 AM IST
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कश्मीर से पलायन के बाद आगरा में बसे डॉ. अशोक रैना, आरके कोठा
- फोटो : अमर उजाला
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सालों पहले कश्मीर से पलायन कर चुके कश्मीरियों में धारा 370 हटने के बाद वहां बसने की फिर से उम्मीद जाग गई है। सरकार के फैसले से वे काफी खुशी हैं। कहते हैं, कभी जिस तरह से उन्हें कश्मीर से खदेड़ा गया था, केंद्र सरकार के फैसले के बाद अब वही जमीन फिर से अपनी सी लगने लगी है।
शहर में कई कश्मीरी परिवार रहते हैं। वहां के हालातों के चलते दशकों पहले उन्हें परिवार सहित पलायन करना पड़ा। कई शहरों में कुछ साल गुजारने के बाद उन्होंने आगरा के स्थायी निवासी हो गए। यहां के समाज में पूरी तरह से घुल-मिल चुके हैं। फिर भी कश्मीर जाने की कसक उनके दिल में है।
डॉ. अशोक रैना का कहना है कि हम लोग कठुआ क्षेत्र के रहने वाले हैं। वर्ष 1988 में हमें अपना घर छोड़ना पड़ा। कई शहरों में रहे। बाद में कई साल पहले आगरा आकर बस गए।
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इसके बाद कभी सोचा नहीं था कि हमें फिर से अपने घर लौटने का मौका मिल पाएगा। धारा 370 हटने के बाद से टूटी हुई उम्मीद फिर से जाग गई है। हम जैसे तमाम लोगों का सपना अब पूरा हो सकता है।
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शहर में कई कश्मीरी परिवार रहते हैं। वहां के हालातों के चलते दशकों पहले उन्हें परिवार सहित पलायन करना पड़ा। कई शहरों में कुछ साल गुजारने के बाद उन्होंने आगरा के स्थायी निवासी हो गए। यहां के समाज में पूरी तरह से घुल-मिल चुके हैं। फिर भी कश्मीर जाने की कसक उनके दिल में है।
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डॉ. अशोक रैना का कहना है कि हम लोग कठुआ क्षेत्र के रहने वाले हैं। वर्ष 1988 में हमें अपना घर छोड़ना पड़ा। कई शहरों में रहे। बाद में कई साल पहले आगरा आकर बस गए।
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इसके बाद कभी सोचा नहीं था कि हमें फिर से अपने घर लौटने का मौका मिल पाएगा। धारा 370 हटने के बाद से टूटी हुई उम्मीद फिर से जाग गई है। हम जैसे तमाम लोगों का सपना अब पूरा हो सकता है।
आरके कोठा कहते हैं कि हम मूलरूप से श्रीनगर के रहने वाले हैं। पढ़ाई-लिखाई वहीं पूरी हुई। इसके बाद कुछ साल सरकारी नौकरी भी की। मगर, वहां के हालातों के चलते वर्ष 1989 में हमें श्रीनगर छोड़ना पड़ा।
मैंने कई दूसरे शहरों में नौकरी की। वर्ष 2012 में आगरा में आकर बस गए। लेकिन, श्रीनगर हमेशा दिल में रहा। वहां के खाने की खुशबू, अपने लोगों का अहसास, बहुत याद आता रहा। धारा 370 खत्म होने के बाद फिर से अपने श्रीनगर लौटने की उम्मीद जाग गई है।
मैंने कई दूसरे शहरों में नौकरी की। वर्ष 2012 में आगरा में आकर बस गए। लेकिन, श्रीनगर हमेशा दिल में रहा। वहां के खाने की खुशबू, अपने लोगों का अहसास, बहुत याद आता रहा। धारा 370 खत्म होने के बाद फिर से अपने श्रीनगर लौटने की उम्मीद जाग गई है।