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#हिंदीहैंहम : 'अन्य विषयों का लिया ज्ञान, सम्मान के लिए हिंदी को अपनाया'

Thu, 27 Aug 2020 01:54 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 27 Aug 2020 01:54 PM IST
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amar ujala hindi hai hum campaign hindi medium people shared the experience
हिंदी हैं हम: कल्पना राजौरिया, अशोक अनुरागी और पूरनपाल सिंह (क्रमश:) - फोटो : अमर उजाला

सफलता के लिए लोग अंग्रेजी एवं अन्य भाषाओं को महत्व देते हैं। हिंदी भाषा सफलता के द्वार भी खोलती है। फिरोजाबाद जिले में कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अंग्रेजी, विज्ञान में जीवन भर शिक्षा हासिल की, सफलता पाने के लिए हिंदी को अपनाया। यह लोग स्वयं मानते हैं कि मातृभाषा हिंदी सफलता और सम्मान की भाषा है। लोगों का भ्रम है कि हिंदी से सफलता नहीं मिलती। 

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'शिक्षक हूं रसायन विज्ञान का, हिंदी से है मेरी पहचान'


राजकीय कॉलेज के प्रधानाचार्य अशोक अनुरागी की नियुक्ति रसायन विज्ञान के प्रवक्ता में हुई थी। किंतु उन्हें हिंदी के रूप में लोग पहचानते हैं। उन्होंने कहा कि कविताएं, कहानियां लिखने का शौक बचपन से रहा। इसलिए मंचों पर जाकर कविताएं सुनाने लगे। शासन-प्रशासन के प्रमुख कार्यक्रमों में हमेशा संचालन करने का मौका मिलता है। वह कहते हैं कि शिक्षक तो कई और भी हैं। मगर मेरी पहचान हिंदी विषय से हुई है। मातृभाषा को बढ़ावा मिलना चाहिए, जो लोग सोचते हैं कि हिंदी से पीछे रह जाएंगे, मेरा अनुभव है कि हिंदी सफलता और सम्मान का रास्ता खोलती है।

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अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की, अब हिंदी है मेरी सफलता

समाजसेविका कल्पना राजौरिया ने कहा कि क्लास नर्सरी से 12वीं तक सीबीएसई बोर्ड से पढ़ाई की। बीएससी, एमएससी में भी अंग्रेजी माध्यम से विज्ञान की पढ़ाई की। मगर मातृभाषा हिंदी मुझे सफलता और सम्मान की भाषा लगी। शुद्ध हिंदी की बदौलत ही मुझे लोग बड़े कार्यक्रमों में संचालन और प्रमुख वक्ता के रूप में बुलाते हैं। प्रशासन के कार्यक्रम में भी कई बार प्रमुख वक्ता के रूप में मैने उद्बोधन दिया है। क्योंकि उस भाषा को लोग बेहतर तरीके से समझते हैं। हिंदी पत्रिकाओं में भी मैने लेख और शोधपत्र लिखे हैं। अगर अंग्रेजी भाषा प्रयोग करती तो शायद इतनी पहचान नहीं होती। 

भारत सरकार में हिंदी अधिकारी के रूप में दी सेवाएं

गौंछ निवासी पूरनपाल सिंह ने कहा कि मेरे जीवन में हिंदी का बहुत ही महत्व है। मैैने हिंदी से एमए और पीएचडी की। मेरा चयन विज्ञान तथा प्रोद्योगिकी विभाग में ज्वाइंट डायरेक्टर ऑफीसर के लिए हुआ। वहां मैं वरिष्ठ हिंदी अधिकारी के रूप में कार्यरत था। हिंदी की सेवाएं देने के लिए मुझे कई पुरस्कार भी मिले और सम्मान भी मिला, जो मुझे याद है। मेरे लिए गौरव की बात तो यह है कि मातृभाषा के लिए ही मुझे सेवाएं देने का मौका मिला और मातृभाषा के लिए ही मुझे कई बार सम्मानित भी किया गया। विदेशों में भी जो लोग रहते हैं, वो हिंदी बोलने पर गौरव महसूस करते हैं।
 
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