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Ahoi Ashtami 2020: रोक के बावजूद राधाकुंड पहुंचे हजारों श्रद्धालु, स्नान न कर पाने से मायूस लौटे

Mon, 09 Nov 2020 01:02 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 09 Nov 2020 01:02 AM IST
सार

  • कोरोना संक्रमण के कारण इस बार राधाकुंड में अहोई अष्टमी मेला नहीं लगा। इसके बावजूद हजारों श्रद्धालु राधारानी कुंड में स्नान करने पहुंचे। दोपहर बाद पुलिस ने प्रवेश पर रोक लगाई। 

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Ahoi Ashtami 2020: devotees did not enter Radhakund on Ahoi Ashtami in Mathura
राधाकुंड में प्रवेश न मिलने पर मायूस लौटे दंपती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मथुरा में कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर रविवार को अहोई अष्टमी का पर्व मनाया गया। महिलाओं ने संतान की लंबी आयु की कामना के लिए व्रत रखा। निसंतान महिलाओं ने इस दिन व्रत कर माता पार्वती की अहोई रूप में पूजा की। उधर, राधाकुंड में इस बार अहोई अष्टमी मेला नहीं लगा। 

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प्रशासन ने कोरोना संक्रमण के कारण मेले पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद हजारों की संख्या नि:संतान दंपती राधारानी कुंड में स्नान करने के लिए पहुंचे। दोपहर दो बजे तक तो प्रशासन ने ढिलाई बरती। इसके बाद प्रशासन ने सख्ती कर दी। राधाकुंड में किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश की मनाही रही। 
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मन में आस्था और सूनी गोद में किलकारी गूंजने की उम्मीद लगाए दंपतियों ने राधारानी के दरबार में अरदास की। दो बजे तक तो स्नान होता रहा, इसके बाद किसी को कुंड में स्नान नहीं करने दिया गया। बंगाल, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, असम, बिहार, त्रिपुरा, नागालैंड, मणिपुर आदि राज्यों के श्रद्धालुओं ने स्नान किया। 
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पुलिस ने दोपहर दो बजे राधाकुंड की सीमाओं को सील कर दिया। परिक्रमा मार्ग को रामलीला मैदान होते हुए स्टेट बैंक चौराहे पर निकाला गया। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को राधाकुंड में प्रवेश नहीं करने दिया गया।

श्रद्धा के साथ मनाई गई अहोई अष्टमी 

मथुरा में सुबह महिलाओं ने बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखा और शाम के समय तारों को जल अर्पित करके व्रत खोला। इस अवसर पर महिलाओं ने दीवार पर आठ कोनों वाली एक पुतली बनाई। पुतली के पास ही स्याउ माता व उनके बच्चे बनाए। 

मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान की उम्र लंबी होती है। आचार्य श्यामदत्त चतुर्वेदी ने बताया कि अहोई अष्टमी के दिन माताएं अपने बच्चों की आयु और स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत को दीपावली की शुरुआत भी माना जाता है। 

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