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शहर में नहीं रहेगी पानी की किल्लत
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा
Updated Tue, 20 Oct 2015 01:59 AM IST
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कई देशों का दौरा करने के बाद सिंचाई विभाग ने यमुना पर रबर चेकडेम का खाका तैयार कर लिया है। इसके तहत एक ताजमहल और दूसरा सिकंदरा पर रबर के चेक डेम बनाकर नदी के पानी को रोका जाएगा। इससे नदी की हालत तो सुधरेगी ही, दोनों वाटर वर्क्स को भी सालभर भरपूर पानी उपलब्ध रहेगा। इस प्रोजेक्ट को एशियाई विकास बैंक के माध्यम से मूर्तरूप प्रदान करने की तैयारी की जा रही है।
बता दें कि शहर में पानी की काफी किल्लत है। भूमिगत जल तो खारा हो रहा है। जल संस्थान को भी सप्लाई के लिए भरपूर पानी उपलब्ध नहीं हो पाता। दरअसल, जल संस्थान के दोनों वाटर वर्क्स (जीवनी मंडी व सिकंदरा) यमुना नदी पर ही निर्भर हैं। आमतौर पर नदी में पानी के बजाय सिल्ट ही दिखाई देती है। बारिश का पानी भी बह जाता है। इसी को रोकने के लिए काफी समय से कवायद चल रही है। पहले बैराज का प्रस्ताव था, अब शासन की तरफ से ताजमहल और सिकंदरा के पास रबर चेकडेम बनाने की अनुमति मिली है। इस पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने कई देशों का दौरा कर यमुना का पानी रोकने के लिए रबर चेकडेम का प्रोजेक्ट तैयार कर लिया है। सरकार इसके लिए एशियाई विकास बैंक से फंड जुटाने के प्रयास कर रही है। बैंक के प्रजेंटेशन भी देने की तैयारी है। हरी झंडी मिलती है, रबर के डेम बनाने के लिए निविदा निकाली जाएगी। इसमें कई देशों की कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा। इसे बनाने की तकनीक देश में नहीं है। गौरतलब है कि इन दो चेकडेम के अलावा रबर का एक चेकडेम मथुरा में भी बनेगा।
कम जगह घेरेगा
रबर चेकडेम को संचालित करने के लिए ज्यादा जगह की जरूरत नहीं पड़ेगी। नदी में लगभग 350 मीटर लंबा रबर का डेम बनाया जाएगा। इसको संचालित करने के लिए बैराज की तरह से नदी के आसपास अन्य जगह की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस डेम के माध्यम से जब नदी में पानी रोकना होगा तो रबर में पानी या हवा भरकर उसे फुला दिया जाएगा। इससे पानी रुक जाएगा।
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ताज के पार्श्व में ज्यादा पानी नहीं रोका जाएगा
सुरक्षा कारणों के चलते ताजमहल के पार्श्व में यमुना में ज्यादा पानी नहीं रोका जाएगा। वहां 2.5 मीटर की ऊंचाई का डेम बनाया जाएगा। सिकंदरा पर लगभग चार मीटर ऊंचा चेकडेम बनाने की योजना है।
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बता दें कि शहर में पानी की काफी किल्लत है। भूमिगत जल तो खारा हो रहा है। जल संस्थान को भी सप्लाई के लिए भरपूर पानी उपलब्ध नहीं हो पाता। दरअसल, जल संस्थान के दोनों वाटर वर्क्स (जीवनी मंडी व सिकंदरा) यमुना नदी पर ही निर्भर हैं। आमतौर पर नदी में पानी के बजाय सिल्ट ही दिखाई देती है। बारिश का पानी भी बह जाता है। इसी को रोकने के लिए काफी समय से कवायद चल रही है। पहले बैराज का प्रस्ताव था, अब शासन की तरफ से ताजमहल और सिकंदरा के पास रबर चेकडेम बनाने की अनुमति मिली है। इस पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने कई देशों का दौरा कर यमुना का पानी रोकने के लिए रबर चेकडेम का प्रोजेक्ट तैयार कर लिया है। सरकार इसके लिए एशियाई विकास बैंक से फंड जुटाने के प्रयास कर रही है। बैंक के प्रजेंटेशन भी देने की तैयारी है। हरी झंडी मिलती है, रबर के डेम बनाने के लिए निविदा निकाली जाएगी। इसमें कई देशों की कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा। इसे बनाने की तकनीक देश में नहीं है। गौरतलब है कि इन दो चेकडेम के अलावा रबर का एक चेकडेम मथुरा में भी बनेगा।
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कम जगह घेरेगा
रबर चेकडेम को संचालित करने के लिए ज्यादा जगह की जरूरत नहीं पड़ेगी। नदी में लगभग 350 मीटर लंबा रबर का डेम बनाया जाएगा। इसको संचालित करने के लिए बैराज की तरह से नदी के आसपास अन्य जगह की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस डेम के माध्यम से जब नदी में पानी रोकना होगा तो रबर में पानी या हवा भरकर उसे फुला दिया जाएगा। इससे पानी रुक जाएगा।
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ताज के पार्श्व में ज्यादा पानी नहीं रोका जाएगा
सुरक्षा कारणों के चलते ताजमहल के पार्श्व में यमुना में ज्यादा पानी नहीं रोका जाएगा। वहां 2.5 मीटर की ऊंचाई का डेम बनाया जाएगा। सिकंदरा पर लगभग चार मीटर ऊंचा चेकडेम बनाने की योजना है।