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फर्जी मुकदमे में गिरी गाज: आगरा के पुलिस कमिश्नर का तबादला, जे रविंद्र गौड़ संभालेंगे ताजनगरी की कमान
Tue, 09 Jan 2024 01:38 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 09 Jan 2024 01:38 PM IST
सार
आगरा के पुलिस कमिश्नर डॉ. प्रीतिंदर सिंह का तबादला कर दिया गया है। वे आगरा के पहले पुलिस कमिश्नर बनाए गए थे। अब नई जिम्मेदारी आईपीएस जे रविंद्र गौड़ को सौंपी गई है।
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जे. रविंद्र गौड़
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
आगरा के थाना जगदीशपुरा में करोड़ों की जमीन पर कब्जा कराने के लिए 5 निर्दोष लोगों को जेल भेजने का मामला सुर्खियों में है। लखनऊ तक खादी-खाकी के गठजोड़ से जमीन के खेल की चर्चा हो रही है। एक माननीय का नाम सामने आने के बाद माहौल गर्माया तो पुलिस आयुक्त डाॅ. प्रीतिंदर सिंह पर गाज गिर गई। मंगलवार को उनको हटा दिया गया। डीजी कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया। गोरखपुर परिक्षेत्र के आईजी जे रवींद्र गौड़ को पुलिस आयुक्त बनाया गया है। जगदीशपुरा में करोड़ों की जमीन पर केयरटेकर के रूप में रहने वाले रवि कुशवाहा और उनके भाई शंकरलाल सहित तीन को एनडीपीएस एक्ट में जेल भेजा गया था। इसके बाद पैरवी करने वाली पत्नी पूनम, बहन पुष्पा को शराब बरामद करने के बाद आबकारी अधिनियम में जेल भेज दिया गया था।
मामले में पीड़ित परिवार ने डीजीपी से गुहार लगाई थी। पूरे प्रकरण की गोपनीय जांच कराई गई। मामले में तत्कालीन एसओ जगदीशपुरा जितेंद्र कुमार, बिल्डर कमल चौधरी उनके बेटे सहित 18 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की गूंज लखनऊ तक हुई थी। एक माननीय का नाम भी सामने आया था। फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर भी खुलकर प्रकरण में बोले थे। तब से ही लखनऊ तक मामला तूल पकड़ गया था।
पहले पुलिस आयुक्त है डाॅ. प्रीतिंदर सिंह
आगरा को नवंबर 2022 में पुलिस कमिश्नरेट का दर्जा मिला था। पहले कमिश्नर के रूप में आईपीएस डाॅ. प्रीतिंदर सिंह को नियुक्ति मिली थी। उन्होंने कमिश्नरेट में अपराध और अपराधियों पर नियंत्रण से लेकर यातायात व्यवस्था में सुधार की खूब कवायद की। वह 14 महीने तक पुलिस आयुक्त के पद पर रहे।
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2005 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं नए आयुक्त
वर्ष 2005 के आईपीएस अधिकारी जे रवींद्र गौड़ को पुलिस आयुक्त बनाया गया है। अभी उन्होंने चार्ज नहीं लिया है। महकमे में आने से पहले ही उनकी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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मामले में पीड़ित परिवार ने डीजीपी से गुहार लगाई थी। पूरे प्रकरण की गोपनीय जांच कराई गई। मामले में तत्कालीन एसओ जगदीशपुरा जितेंद्र कुमार, बिल्डर कमल चौधरी उनके बेटे सहित 18 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की गूंज लखनऊ तक हुई थी। एक माननीय का नाम भी सामने आया था। फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर भी खुलकर प्रकरण में बोले थे। तब से ही लखनऊ तक मामला तूल पकड़ गया था।
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पहले पुलिस आयुक्त है डाॅ. प्रीतिंदर सिंह
आगरा को नवंबर 2022 में पुलिस कमिश्नरेट का दर्जा मिला था। पहले कमिश्नर के रूप में आईपीएस डाॅ. प्रीतिंदर सिंह को नियुक्ति मिली थी। उन्होंने कमिश्नरेट में अपराध और अपराधियों पर नियंत्रण से लेकर यातायात व्यवस्था में सुधार की खूब कवायद की। वह 14 महीने तक पुलिस आयुक्त के पद पर रहे।
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2005 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं नए आयुक्त
वर्ष 2005 के आईपीएस अधिकारी जे रवींद्र गौड़ को पुलिस आयुक्त बनाया गया है। अभी उन्होंने चार्ज नहीं लिया है। महकमे में आने से पहले ही उनकी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।