आगरा: नदी में न बहाएं शव, नगर निगम कराएगा अंतिम संस्कार, पार्षद करेंगे लोगों को जागरूक
11 लोगों की कमेटी हर वार्ड में बनाई जाएगी, जो लोगों को नदी में शव प्रवाहित करने से रोकेगी। साथ ही यह कमेटी को लोगों को संक्रमण से बचाव के प्रति जागरूक भी करेगी।
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नदियों में शव न बहाए जाएं। अंतिम संस्कार कराने में अगर किसी को आर्थिक समस्या है तो नगर निगम नि:शुल्क अंतिम संस्कार कराएगा। सोमवार को नगर निगम के कार्यकारिणी कक्ष में मेयर नवीन जैन की अध्यक्षता में कमेटी की बैठक में बताया गया कि नदी किनारे क्षेत्रों वाले 11 पार्षद अपने अपने वार्ड में यह जानकारी पहुंचाएं और लोगों को जागरूक करें। हर वार्ड में 11 सदस्यों की कमेटी बनाएं जो नदी में शव प्रवाहित करने वालों को रोकें।
प्रदेश सरकार के निर्देश पर बनी कमेटी की पहली बैठक सोमवार को मेयर नवीन जैन की अध्यक्षता में हुई, जिसमें संयोजक सदस्य नगर आयुक्त निखिल टीकाराम फुंडे ने बताया कि नदियों में शवों को प्रवाहित होने व जल समाधि से रोकने और कोविड व नॉन कोविड मृतकों के अंतिम संस्कार में आ रही समस्याओं को दूर करना है। धार्मिक या आर्थिक आधार पर जो लोग ऐसा कर रहे हैं, उन्हें रोकना होगा। नगर निगम कोविड मृतकों का अंतिम संस्कार निशुल्क करा रहा है। सभी श्मशान घाटों पर ऐसे होर्डिंग लगवाए गए हैं।
पार्षद करेंगे लोगों को जागरूक
मेयर ने नदी किनारे के 11 क्षेत्रों के पार्षदों से कहा कि वह अपने अपने क्षेत्रों में लोगों को प्रमुख हस्तियों के जरिए जागरूक करें। उनके क्षेत्र में कोई भी शव नदी में प्रवाहित नहीं होना चाहिए। नदी में शव प्रवाहित करने से रोकने के साथ ही शमशान घाट में अंतिम संस्कार कराने आ रहे मृतकों के परिजनों को कोई गंभीर समस्या का सामना तो नहीं करना पड़ रहा है, यह भी देखें।
बैठक में मुख्य अभियंता निर्माण बी एल गुप्ता, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अतुल भारती, जगदीश पचौरी, जितेंद्र वर्मा, भूपेंद्र शर्मा, अनुराग चतुर्वेदी, जगमोहन सिंह, अमित अग्रवाल ग्वाला, हरिओम गोयल, रवि शर्मा, अमित दिवाकर, राजेश्वरी देवी, विकलेश यादव आदि मौजूद रहे।
नदियों से हो रही है जलापूर्ति
मेयर नवीन जैन ने बताया कि यमुना नदी के किनारे वाले वार्डो के पार्षद 11-11 सक्रिय लोगों की एक कमेटी बनाएं जो हर समय यह निगरानी करेगी कि कोई नदियों में शव को प्रवाहित तो नहीं कर रहा है या फिर जल समाधि तो नहीं दे रहा है। लोगों को समझाएं कि यह गलत है। इससे जल प्रदूषण भी बढ़ेगा। नदियों से ही जलापूर्ति हो रही है।