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यूपी: चीनी की जमाखोरी तो दूर, एक-एक बोरी को तरसे व्यापारी, त्योहार से पहले आगरा में गहराया संकट
Fri, 16 Oct 2026 11:29 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 16 Oct 2026 11:29 AM IST
सार
आगरा में त्योहार से पहले चीनी की किल्लत गहराने से थोक कारोबारियों, पेठा निर्माताओं और मिठाई कारोबारियों की परेशानी बढ़ गई है। व्यापारियों का दावा है कि यूपी की मिलों से सात दिन से सप्लाई नहीं मिल रही, जिसके चलते उन्हें महाराष्ट्र से महंगी चीनी खरीदनी पड़ रही है।
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चीनी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
त्योहार से पहले चीनी की किल्लत जारी है। खाद्य विभाग ने चीनी की जमाखोरी करने वालों के विरुद्ध प्राथमिकी और जेल भिजवाने का फरमान जारी कर दिया है। मगर धरातल पर हालात उलट हैं। जमाखोरी तो दूर चीनी कारोबारी एक-एक बोरी के लिए मोहताज हैं। प्रदेश की मिलों से सप्लाई ठप है।
घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति प्रभावित होने से पेठा, मिठाई व अन्य खाद्य कारोबार से जुड़े कारोबारी परेशान हैं। आरोप है कि चीनी मिलें घरेलू के बजाय औद्योगिक सप्लाई कर रही हैं। क्योंकि घरेलू आपूर्ति में कीमत तय है, जबकि बड़ी-बड़ी औद्योगिक कंपनियों के लिए मूल्य निर्धारित नहीं। मुनाफाखोरी के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियों को रैक भेजी जा रहीं हैं। बृहस्पतिवार को अमर उजाला टीम ने खाद्य मंडी मोतीगंज में पड़ताल की, यहां दुकानें और गोदाम खाली पड़े हैं।
चीनी के एजेंट विष्णु खंडेलवाल ने बताया कि सात दिन से माल नहीं आ रहा। सरकार घरेलू कारोबारियों पर शिकंजा कस रही है, लेकिन सट्टेबाजी कर रही मिलों के स्टॉक तक की जांच तक नहीं की जा रही। इनकी कोटे की जांच होनी चाहिए। थोक विक्रेता राम कुमार ने बताया कि यूपी से चीनी नहीं मिलने के कारण महाराष्ट्र की मिलों से महंगी चीनी खरीदनी पड़ रही है। थोक विक्रेता मोहन कुमार गुप्ता ने बताया कि एक हजार कुंतल का कोटा निर्धारित होने के बाद भी व्यापारियों को फुटकर बिक्री के लिए चीनी नहीं मिल रही। व्यापारियों का कहना है कि त्योहार पर चीनी का संकट गहरा रहा है।
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घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति प्रभावित होने से पेठा, मिठाई व अन्य खाद्य कारोबार से जुड़े कारोबारी परेशान हैं। आरोप है कि चीनी मिलें घरेलू के बजाय औद्योगिक सप्लाई कर रही हैं। क्योंकि घरेलू आपूर्ति में कीमत तय है, जबकि बड़ी-बड़ी औद्योगिक कंपनियों के लिए मूल्य निर्धारित नहीं। मुनाफाखोरी के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियों को रैक भेजी जा रहीं हैं। बृहस्पतिवार को अमर उजाला टीम ने खाद्य मंडी मोतीगंज में पड़ताल की, यहां दुकानें और गोदाम खाली पड़े हैं।
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चीनी के एजेंट विष्णु खंडेलवाल ने बताया कि सात दिन से माल नहीं आ रहा। सरकार घरेलू कारोबारियों पर शिकंजा कस रही है, लेकिन सट्टेबाजी कर रही मिलों के स्टॉक तक की जांच तक नहीं की जा रही। इनकी कोटे की जांच होनी चाहिए। थोक विक्रेता राम कुमार ने बताया कि यूपी से चीनी नहीं मिलने के कारण महाराष्ट्र की मिलों से महंगी चीनी खरीदनी पड़ रही है। थोक विक्रेता मोहन कुमार गुप्ता ने बताया कि एक हजार कुंतल का कोटा निर्धारित होने के बाद भी व्यापारियों को फुटकर बिक्री के लिए चीनी नहीं मिल रही। व्यापारियों का कहना है कि त्योहार पर चीनी का संकट गहरा रहा है।
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