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बदल रही बेटियों की सोच, खुद के साथ गलत होने पर बिना झिझके ले रहीं ऐसे फैसले

Wed, 21 Feb 2018 01:59 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Wed, 21 Feb 2018 01:59 PM IST
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agra changing the thinking of girls in braj
demo pic - फोटो : अमर उजाला
दहेज प्रथा और बेमेल शादियों के खिलाफ समाज और सरकार के प्रयास सार्थक नहीं हो पाए तो अब बेटियों ने खुद ही कमान संभाल ली है। ऐसे मामलों में अब वे खुलकर आवाज बुलंद कर रही हैं। 
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इसका असर है कि पिछले दिनों आगरा, मैनपुरी, एटा सहित कई जिलों में दहेज को लोभियों को बिना दुल्हन के ही लौटना पड़ा है। सरकार ने नियम तो बना दिए कि दहेज लेना और देना अपराध है। 
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बेटा या बेटी की मर्जी के खिलाफ शादी करना भी गलत है, लेकिन यह नियम कारगर सिद्ध नहीं हुए। लगातार दहेज की खातिर दुल्हनों को जलाने के मामले सामने आ रहे हैं। 
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dowry
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 2017 में आगरा में करीब 73 दहेज हत्या के मामले दर्ज किए गए हैं। अनुमान है कि ब्रज क्षेत्र में यह आंकड़ा 300 पार कर चुका है। 

वहीं पिता की मजबूरी की वजह से लड़कियों को अपनी उम्र से काफी बड़े व्यक्ति का साथ शादी करनी पड़ रही हैं। कहीं-कहीं अभी भी नाबालिगों का विवाह किया जा रहा है, लेकिन अब महिलाएं अपने अधिकार के प्रति जागरूक हो रही हैं। 

ऐसी शादियों के खिलाफ बागी तेवर अपना लिए हैं। आगरा में फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में एक युवती 50 वर्ष के दूल्हे को लौटा देती है तो रकाबंगज मोटर साइकिल की मांग करने वाले दूल्हे को लेने के देने पड़ जाते हैं।  

पिस रहा मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग 

दहेज प्रथा का सबसे अधिक आघात मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग पर हुआ है। अपर क्लास में तो दहेज कोई मुद्दा था, नहीं लेकिन मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग में यह दहेज लेना और देना प्रतिष्ठा का प्रश्न हो जाता है। 

समाज विज्ञान संस्थान प्रोफेसर असद खान कहते हैं कि दहेज के खातिर जलाई जा रही लड़कियों को देखकर अब समाज रिएक्ट करने लगा है। यही वजह से ऐसे मामलों में लड़कियां खुलकर विरोध करने लगी हैं। 

समाज में आ रहे इस बदलाव में मीडिया की अहम भूमिका है। प्रोफेसर सीके गौतम कहते हैं कि जब कहीं इस तरह घटना की होती है कि जहां दहेज लोभी दूल्हे से दुल्हन शादी करने से किया इनकार या दहेज लोभी बारातियों को बंधक बनाया। 

या फिर बेमेल शादी से दुल्हन ने किया इनकार। इन खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया जाता है और दिखाया जाता है तो ऐसे दुल्हनें उन लड़कियों के लिए रोल माडल बन जाती हैं और युवतियों में आत्मविश्वास पैदा होता है। 

यहां उठाया साहसिक कदम 

-रकाबगंज में 17 फरवरी को मथुरा से बारात आई थी। दूल्हे ने अपाचे बाइक मांगी थी तो दुल्हन ने ससुराल जाने से कर दिया इनकार। 
-फतेहपुर सीकरी के गांव चौमा शाहपुर में दूल्हे के पिता ने दहेज में बुलट बाइक और एक लाख रुपये की मांग की तो बारात को बंधक बनाया। बाद में हुआ समझौता। 
-19 फरवरी को खेड़ा राठौर के उदयपुर कला गांव में 50 वर्ष का दूल्हा देखकर युवती ने किया फेरे लेने से इनकार। 
-20 फरवरी को मैनपुरी के बिछवां में लड़की भगाने के आरोपी दूल्हे के साथ से दुल्हन ने ससुराल जाने से इनकार किया। लड़की पक्ष के लोगों ने दूल्हा और बारातियों को बंधक बना लिया। 
-20 फरवरी को एटा में सामूहिक विवाह समारोह में दहेज की मांग करने वाला दूल्हा मंडप से भाग गया। दुल्हन के परिजनों ने कोतवाली नगर में तैनात एक सिपाही पर दूल्हे को भगाने का आरोप लगाया।
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