{"_id":"5807c47f4f1c1b592c704c64","slug":"agra-agra","type":"story","status":"publish","title_hn":"व्हाइट कैटेगरी में आगरा, नहीं लगेंगे उद्योग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
व्हाइट कैटेगरी में आगरा, नहीं लगेंगे उद्योग
व्हाइट कैटेगरी में आगरा, नहीं लगेंगे उद्योग
Updated Thu, 20 Oct 2016 12:37 AM IST
विज्ञापन
ताजमहल
- फोटो : getty
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उद्योगों की कैटेगरी तय करने की नई नीति आगरा के औद्योगिक विकास को रोक सकती है। पर्यावरण मंत्रालय ने उद्योगों की जो चार श्रेणियां तय की हैं। पर्यावरण मंत्रालय की हाल में हुई बैठक में ताज ट्रिपेजियम जोन को नई कैटेगरी ‘व्हाइट’ में रखने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रीन कैटेगरी के कई उद्योगों को अब व्हाइट में शिफ्ट कर दिया गया है। इससे अब आगरा समेत पूरे टीटीजेड क्षेत्र में लेदर फुटवियर, होटल, कोल्ड स्टोरेज, फाउंड्री आदि की नई फैक्ट्री नहीं लग सकेंगी।
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने उद्योगों को नए सिरे से कैटेगरी दी हैं। पूर्व में केवल तीन ही कैटेगरी रेड, ओरेंज और ग्रीन थी, लेकिन अब नई कैटेगरी व्हाइट भी बनाई गई है। इसमें 36 उद्योगों को जगह दी गई है। ताजमहल के कारण ताज ट्रिपेजियम जोन को व्हाइट कैटेगरी में रखा गया है।
पहले ही टीटीजेड में नए उद्योगों पर प्रतिबंध है। नॉन पाल्यूटिंग इंडस्ट्री में जिनको चुना गया है, वह हैरत भरा है और आगरा के औद्योगिक विकास की रफ्तार को आगे नहीं बढ़ने देगा। आगरा का जूता हो या फाउंड्री या जनरेटर उद्योग या फिर पंचतारा होटल, कुछ भी आगरा में करने की इजाजत नहीं मिल पाएगी। आलू बेल्ट में ही कोल्ड स्टोर तक खोलने की अनुमति नई नीति से नहीं मिलेगी।
विज्ञापन
इस नीति के खिलाफ आगरा के व्यापारिक और औद्योगिक संगठन खड़े हो गए हैं। नेशनल चेंबर से लेकर इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन तक इसके विरोध में है और मंत्रालय स्तर तक विरोध दर्ज कराएंगे।
इन 36 उद्योगों को मिलेगी अनुमति
एसी-कूलर की असेंबलिंग, साइकिल, नॉन मोटराइज्ड वेहिकल्स की असेंबलिंग, बायो फर्टिलाइजर, बिस्किट ट्रे, चाय की पैकिंग, ब्लॉक मेकिंग प्रिंटिंग, चॉक, कॉटन वूलन हाजरी, डीजल पंप रिपेयरिंग, इलेक्ट्रिक लैंप सीएफएल असेंबलिंग कर मैन्यूफैक्चरिंग, लेदर कटिंग, स्टिचिंग, फेब्रिकेशन यूनिट, फ्लाइ एश ब्रिक, हैंडलूम कारपेट बुनाई, कोयर निर्माण, मेटल कैप, शू ब्रश और वायर ब्रश निर्माण, जनरेटर रिपेयरिंग, मेडिकल आक्सीजन, सोलर पावर जनरेशन, सर्जिकल मेडिकल उत्पाद एसेंबलिंग ही शामिल है।
ग्रीन कैटेगरी में ये हैं शामिल
कार्ड बोर्ड, दाल मिल, फ्लोर मिल, चिलिंग प्लांट, कोल्ड स्टोरेज, ग्लास पोटरीज, गोल्ड सिल्वर रिफाइनिंग, सेरेमिक, सीमेंट उत्पाद, फर्नीचर निर्माण, पाइप निर्माण, लेदर फुटवियर, 20 कमरों से ज्यादा बड़े होटल, पैकिंग इंडस्ट्री आदि 63 उद्योगों को ग्रीन कैटेगरी में शामिल किया गया है।
इतने उद्योगों को मिली कैटेगरी
कैटेगरी उद्योग
रेड 60
ओरेंज 83
ग्रीन 63
व्हाइट 36
पाल्यूशन इंडेक्स से तय होगी कैटेगरी
कैटेगरी इंडेक्स
रेड 60 से ज्यादा इंडेक्स
ओरेंज 41-59 के बीच
ग्रीन 21-40 के बीच
व्हाइट 20 तक के इंडेक्स
वायु प्रदूषण न हो, इसलिए उद्योगों की कैटेगरी तय की गई है। आगरा में केवल व्हाइट कैटेगरी के उद्योगों को ही अनुमति दी जाएगी। हालांकि अभी फाइनल नोटिफिकेशन आना बाकी है। उसके बाद ही यह लागू किया जाएगा।
रामकरन
क्षेत्रीय अधिकारी, यूपीपीसीबी
‘होटल, कोल्ड स्टोरेज, फर्नीचर आदि में प्रदूषण ही नहीं है तो इन्हें व्हाइट कैटेगरी में क्यों रखा गया है। टीटीजेड के कारण पहले ही आगरा में उद्योग मर चुके हैं। हम इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे। आंदोलन की शुरुआत करेंगे।’
मनीष अग्रवाल
पूर्व अध्यक्ष, नेशनल चेंबर
‘नए उद्योग नहीं लगेंगे तो आगरा का विकास कैसे होगा। नई नीति से तो न होटल बन पाएंगे, जबकि पंचतारा होटल शहर के पर्यटन उद्योग की जरूरत है। वैसे भी यह इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा मसला है। इसी तरह कोल्ड स्टोरेज भी कोल्ड चेन का हिस्सा है जो गांव, किसान के लिए जरूरी है।’
इं. उमेश शर्मा
एनवायरमेंटल इंजीनियर
विज्ञापन
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने उद्योगों को नए सिरे से कैटेगरी दी हैं। पूर्व में केवल तीन ही कैटेगरी रेड, ओरेंज और ग्रीन थी, लेकिन अब नई कैटेगरी व्हाइट भी बनाई गई है। इसमें 36 उद्योगों को जगह दी गई है। ताजमहल के कारण ताज ट्रिपेजियम जोन को व्हाइट कैटेगरी में रखा गया है।
विज्ञापन
पहले ही टीटीजेड में नए उद्योगों पर प्रतिबंध है। नॉन पाल्यूटिंग इंडस्ट्री में जिनको चुना गया है, वह हैरत भरा है और आगरा के औद्योगिक विकास की रफ्तार को आगे नहीं बढ़ने देगा। आगरा का जूता हो या फाउंड्री या जनरेटर उद्योग या फिर पंचतारा होटल, कुछ भी आगरा में करने की इजाजत नहीं मिल पाएगी। आलू बेल्ट में ही कोल्ड स्टोर तक खोलने की अनुमति नई नीति से नहीं मिलेगी।
विज्ञापन
इस नीति के खिलाफ आगरा के व्यापारिक और औद्योगिक संगठन खड़े हो गए हैं। नेशनल चेंबर से लेकर इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन तक इसके विरोध में है और मंत्रालय स्तर तक विरोध दर्ज कराएंगे।
इन 36 उद्योगों को मिलेगी अनुमति
एसी-कूलर की असेंबलिंग, साइकिल, नॉन मोटराइज्ड वेहिकल्स की असेंबलिंग, बायो फर्टिलाइजर, बिस्किट ट्रे, चाय की पैकिंग, ब्लॉक मेकिंग प्रिंटिंग, चॉक, कॉटन वूलन हाजरी, डीजल पंप रिपेयरिंग, इलेक्ट्रिक लैंप सीएफएल असेंबलिंग कर मैन्यूफैक्चरिंग, लेदर कटिंग, स्टिचिंग, फेब्रिकेशन यूनिट, फ्लाइ एश ब्रिक, हैंडलूम कारपेट बुनाई, कोयर निर्माण, मेटल कैप, शू ब्रश और वायर ब्रश निर्माण, जनरेटर रिपेयरिंग, मेडिकल आक्सीजन, सोलर पावर जनरेशन, सर्जिकल मेडिकल उत्पाद एसेंबलिंग ही शामिल है।
ग्रीन कैटेगरी में ये हैं शामिल
कार्ड बोर्ड, दाल मिल, फ्लोर मिल, चिलिंग प्लांट, कोल्ड स्टोरेज, ग्लास पोटरीज, गोल्ड सिल्वर रिफाइनिंग, सेरेमिक, सीमेंट उत्पाद, फर्नीचर निर्माण, पाइप निर्माण, लेदर फुटवियर, 20 कमरों से ज्यादा बड़े होटल, पैकिंग इंडस्ट्री आदि 63 उद्योगों को ग्रीन कैटेगरी में शामिल किया गया है।
इतने उद्योगों को मिली कैटेगरी
कैटेगरी उद्योग
रेड 60
ओरेंज 83
ग्रीन 63
व्हाइट 36
पाल्यूशन इंडेक्स से तय होगी कैटेगरी
कैटेगरी इंडेक्स
रेड 60 से ज्यादा इंडेक्स
ओरेंज 41-59 के बीच
ग्रीन 21-40 के बीच
व्हाइट 20 तक के इंडेक्स
वायु प्रदूषण न हो, इसलिए उद्योगों की कैटेगरी तय की गई है। आगरा में केवल व्हाइट कैटेगरी के उद्योगों को ही अनुमति दी जाएगी। हालांकि अभी फाइनल नोटिफिकेशन आना बाकी है। उसके बाद ही यह लागू किया जाएगा।
रामकरन
क्षेत्रीय अधिकारी, यूपीपीसीबी
‘होटल, कोल्ड स्टोरेज, फर्नीचर आदि में प्रदूषण ही नहीं है तो इन्हें व्हाइट कैटेगरी में क्यों रखा गया है। टीटीजेड के कारण पहले ही आगरा में उद्योग मर चुके हैं। हम इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे। आंदोलन की शुरुआत करेंगे।’
मनीष अग्रवाल
पूर्व अध्यक्ष, नेशनल चेंबर
‘नए उद्योग नहीं लगेंगे तो आगरा का विकास कैसे होगा। नई नीति से तो न होटल बन पाएंगे, जबकि पंचतारा होटल शहर के पर्यटन उद्योग की जरूरत है। वैसे भी यह इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा मसला है। इसी तरह कोल्ड स्टोरेज भी कोल्ड चेन का हिस्सा है जो गांव, किसान के लिए जरूरी है।’
इं. उमेश शर्मा
एनवायरमेंटल इंजीनियर