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लोकसभा चुनाव: ...जब 'राज' के ग्लैमर में ढह गया था भगवा किला, तीन बार के भाजपा सांसद को सवा लाख से हराया था
Mon, 01 Apr 2024 11:29 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
देश दीपक तिवारी, आगरा
देश दीपक तिवारी, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Mon, 01 Apr 2024 11:29 PM IST
सार
तीन बार के भाजपा सांसद भगवान शंकर रावत को हराकर राजबब्बर ने पहली बार साइकिल पर ‘ताज’सजाया था। उन्होंने 1.12 लाख वोटों से जीत दर्ज की थी।
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पूर्व सांसद राजबब्बर
- फोटो : संवाद
विस्तार
उत्तर प्रदेश के आगरा में जन्मे अभिनेता राजबब्बर, यहीं पढ़े और फिर मायानगरी में चमके। साल था 1999, तब सियासत का दौर कुछ और था। आगरा लोकसभा सीट पर भगवा परचम लहरा रहा था। भगवान शंकर रावत तीन बार के सांसद थे। लेकिन, राजबब्बर के ग्लैमर में भगवा किला ढह गया। पहली बार राजबब्बर ने साइकिल पर ‘ताज’ सजाया।
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मुफीद-ए-आम इंटर कॉलेज से शुरुआती शिक्षा पाने वाले राजबब्बर से 1999 में भाजपा सांसद भगवान शंकर रावत 1.12 लाख वोटों से हार गए थे। इससे एक साल पहले 1998 में सपा ने पहली बार आगरा में उम्मीदवार खड़ा किया था।
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सपा प्रत्याशी रनवीर सिंह की जमानत जब्त हो गई। उन्हें 2513 वोट मिले थे। एक साल बाद मध्यावधि चुनाव हुए। राजबब्बर का ग्लैमर आगरा वालों के सिर चढ़कर बोला और वह पहली बार लोकसभा पहुंचे। इस चुनाव के बाद भगवान शंकर रावत की सियासत खत्म हो गई।
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2004 में फिर चुनाव हुए। राजबब्बर दूसरी बार सपा के टिकट पर मैदान में उतरे। भाजपा ने इस बार मुरारीलाल फतेहपुरिया को प्रत्याशी बनाया। राजबब्बर को जीत तो मिल गई, लेकिन जीत का अंतर घटकर आधा रह गया।
इसके बाद साइकिल की सवारी राजबब्बर को रास नहीं आई। 2006 में सपा ने राजबब्बर को निलंबित कर दिया। इधर, 2009 में आगरा में सियासी समीकरण बदल गए। आगरा लोकसभा की सीट 2009 में अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित हो गई।
इसके बाद राजबब्बर ने फतेहपुर सीकरी का रुख किया। लेकिन, यहां उनका ग्लैमर, बसपा सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे रामवीर उपाध्याय की रणनीति से मात खा गया। रामवीर की पत्नी सीमा उपाध्याय फतेहपुर सीकरी से लोकसभा सांसद बनीं। आगरा सीट पर फिर से भगवा किला बन गई।