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Agra News: स्मॉग की छाई चादर, उखड़ रही सांसें, आंखों में जलन-खुजली
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सांसो पर संकट...शमसाबाद रोड इंद्रापुरम सौ फुटा रोड पर सीएम ग्रिड के विकास कार्यों के लिए हुई खो
आगरा। धूल-धुआं और हवा में बढ़ते प्रदूषण से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। आंखों में एलर्जी होने से जलन और खुजली हो रही है। स्मॉग की चादर छाए रहने से सबसे ज्यादा दिक्कत अस्थमा-सांस रोगियों के लिए है। इनकी सांस उखड़ रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बृहस्पतिवार को शहर में 39 चौराहों में से 31 की हवा बेहद खराब और खराब श्रेणी में रही है। सबसे ज्यादा प्रदूषित वाले तीन क्षेत्रों में शहीद नगर, बारहखंभा और राजामंडी रहे, जहां सड़कों की खोदाई ने लोगों का सांस लेना भी मुहाल कर दिया है।
वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि हवा में धूल और कार्बन तत्व की संख्या बढ़ रही है। ये सांस नली में पहुंचकर संक्रमण कर रही हैं। इससे सांस लेने में कठिनाई हो रही है। फेफड़ों पर भी दबाव पड़ रहा है। तेज खांसी हो रही है। हालत खराब होने पर इनको भर्ती कर ऑक्सीजन दी जा रही है। पुराने मरीजों की डोज बढ़ाकर देनी पड़ रही है। नेत्र रोग विभाग के डॉ. निखिल गुप्ता ने बताया कि आंखों में धूल-धुआं पहुंचने से करकराहट, जलन, खुजली, लाल होना और पानी आने की परेशानी ज्यादा मिल रही है। आंखों को रगड़ने से बच्चों की कॉर्निया पर धब्बा और जख्म भी मिल रहे हैं।
स्मॉग से हो रहा गले में संक्रमण
ईएनटी रोग विभाग के डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि मौसम में बदलाव और धूल-धुआं के कण से गले में संक्रमण हो रहा है। इससे खराश, दर्द, सूजन और भोजन-पानी निगलने में दर्द की परेशानी हो रही है। नाक की एलर्जी भी बढ़ गई है। इससे बार-बार छींक आना, नाक बंद होना या फिर पानी आने की दिक्कत हो रही है। जुकाम-बुखार भी हो रहा है। ऐसे मरीजों को दवा देने के साथ बचाव के बारे में भी जागरूक कर रहे हैं।
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इन बातों का रखें ध्यान -
बाहर जाते वक्त मास्क और चश्मा लगाएं।
अस्थमा-सांस रोगी डॉक्टर को दिखाकर दवाएं एडजस्ट कराएं।
आंखों में धूल जाने पर रगड़े नहीं, साफ पानी से धोएं।
सुबह-शाम भाप लें, गर्म पानी में सेंधा नमक डालकर गरारे करें।
यह हैं सबसे प्रदूषित इलाके
जगह एक्यूआई पीएम-10 कण
शहीद नगर 403 439
बारहखंभा 378 412
राजामंडी 337 378
आईएसबीटी 314 314
टेढ़ी बगिया 312 338
सदर भट्ठी 313 346
छीपीटोला 312 317
बाग फरजाना 309 316
राजेश्वर मंदिर 307 332
नरीपुरा 303 307
(एक्यूआई स्मार्ट सिटी के सेंसरों का है)
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक्यूआई ये रहा
फतेहपुर सीकरी - 278
संजय प्लेस - 242
शास्त्रीपुरम - 162
रोहता - 158
आवास विकास - 154
मनोहरपुर - 127
(एक्यूआई सीपीसीबी के स्टेशनों का है)
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वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि हवा में धूल और कार्बन तत्व की संख्या बढ़ रही है। ये सांस नली में पहुंचकर संक्रमण कर रही हैं। इससे सांस लेने में कठिनाई हो रही है। फेफड़ों पर भी दबाव पड़ रहा है। तेज खांसी हो रही है। हालत खराब होने पर इनको भर्ती कर ऑक्सीजन दी जा रही है। पुराने मरीजों की डोज बढ़ाकर देनी पड़ रही है। नेत्र रोग विभाग के डॉ. निखिल गुप्ता ने बताया कि आंखों में धूल-धुआं पहुंचने से करकराहट, जलन, खुजली, लाल होना और पानी आने की परेशानी ज्यादा मिल रही है। आंखों को रगड़ने से बच्चों की कॉर्निया पर धब्बा और जख्म भी मिल रहे हैं।
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स्मॉग से हो रहा गले में संक्रमण
ईएनटी रोग विभाग के डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि मौसम में बदलाव और धूल-धुआं के कण से गले में संक्रमण हो रहा है। इससे खराश, दर्द, सूजन और भोजन-पानी निगलने में दर्द की परेशानी हो रही है। नाक की एलर्जी भी बढ़ गई है। इससे बार-बार छींक आना, नाक बंद होना या फिर पानी आने की दिक्कत हो रही है। जुकाम-बुखार भी हो रहा है। ऐसे मरीजों को दवा देने के साथ बचाव के बारे में भी जागरूक कर रहे हैं।
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इन बातों का रखें ध्यान -
बाहर जाते वक्त मास्क और चश्मा लगाएं।
अस्थमा-सांस रोगी डॉक्टर को दिखाकर दवाएं एडजस्ट कराएं।
आंखों में धूल जाने पर रगड़े नहीं, साफ पानी से धोएं।
सुबह-शाम भाप लें, गर्म पानी में सेंधा नमक डालकर गरारे करें।
यह हैं सबसे प्रदूषित इलाके
जगह एक्यूआई पीएम-10 कण
शहीद नगर 403 439
बारहखंभा 378 412
राजामंडी 337 378
आईएसबीटी 314 314
टेढ़ी बगिया 312 338
सदर भट्ठी 313 346
छीपीटोला 312 317
बाग फरजाना 309 316
राजेश्वर मंदिर 307 332
नरीपुरा 303 307
(एक्यूआई स्मार्ट सिटी के सेंसरों का है)
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक्यूआई ये रहा
फतेहपुर सीकरी - 278
संजय प्लेस - 242
शास्त्रीपुरम - 162
रोहता - 158
आवास विकास - 154
मनोहरपुर - 127
(एक्यूआई सीपीसीबी के स्टेशनों का है)