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सीवर लाइन योजना: ढाई करोड़ लीटर पानी हर रोज होगा ट्रीट
Updated Mon, 09 Apr 2018 11:01 PM IST
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डीरेका शुरू हुआ काम, शाम छह बजे तक चल रहा कार्य
- फोटो : अमर उजाला
एटा।
शहर की सीवर लाइन परियोजना मंजूर हो गई है और कार्य भी शुरू हो चुका है। इस पर आने वाली लागत 106 करोड़ रुपये हैं। इतनी बड़ी लागत से शहर को गंदगी से मुक्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बता दें कि शहर के सीवर लाइन की लंबाई 20 किमी है। सीवर लाइन का कार्य निर्माण खंड जल निगम की देख-रेख में पूरा किया जा रहा है। शहर में चार जोन में बांटा गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जो अब तक शहर का करोड़ों लीटर पानी रोज बर्र्बाद हो रहा था उसका उपयोग हो सकेगा। उस पानी से किसानों की फसल की सिंचाई भी होगी और बचा हुआ पानी किसी अन्य कार्य में उपयोग किया जा सकेगा।
निर्माण खंड जल निगम सहायक अभियंता संचय शुक्ला ने बताया है कि वाटर ट्रीट प्लांट किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। इस प्लांट में हर रोज ढाई करोड़ पानी ट्रीट हो सकेगा। इस पानी को किसान अपनी खेती में प्रयोग कर सकेंगे। ट्रीट हुए पानी से किसी भी तरह का नुकसान होने की गुंजाइश नहीं रह जाती है। किसानों के प्रयोग के बाद भी अगर पानी बच जाता है तो उसका प्रयोग भी किसी न किसी रूप में किया जा सकता है। इनका कहना है कि सीवर लाइन का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू हो चुका है। 20 किमी लम्बी इस सीवर लाइन को तेज गति से बनाने के प्रयास जारी हैं।
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शहर की सीवर लाइन परियोजना मंजूर हो गई है और कार्य भी शुरू हो चुका है। इस पर आने वाली लागत 106 करोड़ रुपये हैं। इतनी बड़ी लागत से शहर को गंदगी से मुक्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बता दें कि शहर के सीवर लाइन की लंबाई 20 किमी है। सीवर लाइन का कार्य निर्माण खंड जल निगम की देख-रेख में पूरा किया जा रहा है। शहर में चार जोन में बांटा गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जो अब तक शहर का करोड़ों लीटर पानी रोज बर्र्बाद हो रहा था उसका उपयोग हो सकेगा। उस पानी से किसानों की फसल की सिंचाई भी होगी और बचा हुआ पानी किसी अन्य कार्य में उपयोग किया जा सकेगा।
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निर्माण खंड जल निगम सहायक अभियंता संचय शुक्ला ने बताया है कि वाटर ट्रीट प्लांट किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। इस प्लांट में हर रोज ढाई करोड़ पानी ट्रीट हो सकेगा। इस पानी को किसान अपनी खेती में प्रयोग कर सकेंगे। ट्रीट हुए पानी से किसी भी तरह का नुकसान होने की गुंजाइश नहीं रह जाती है। किसानों के प्रयोग के बाद भी अगर पानी बच जाता है तो उसका प्रयोग भी किसी न किसी रूप में किया जा सकता है। इनका कहना है कि सीवर लाइन का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू हो चुका है। 20 किमी लम्बी इस सीवर लाइन को तेज गति से बनाने के प्रयास जारी हैं।
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