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गमगीन माहौल में ताजिए किए गए सुपुर्द-ए-खाक
Updated Sun, 01 Oct 2017 11:48 PM IST
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ताजिया
- फोटो : amar ujala
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मैनपुरी। नगर में हजरत इमाम हुसैन की याद में मुहर्रम परंपरागत ढंग से मनाया गया। ताजियों के जुलूस निकाले गए। करबला पर मरसिए पढ़े गए और देर रात ताजिये सुपुर्दे ए खाक किए गए। करबला में ताजियों के दफन के साथ ही मुहर्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया।
हजरत इमाम हुसैन की याद में मनाए जाने वाले मुहर्रम पर ताजियों की जियारत के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। ताजियों का काफिला करबला पहुंचा। इसके बाद फातिहा हुई। हजरत इमाम हुसैन की शहादत पर कई जगह लंगर में खाना खिलाने का कार्य हुआ।
नमाज के बाद विभिन्न स्थानों से ताजियों का उठना शुरू हुआ और सभी ताजियेदार ताजियों के जुलूस को लेकर बड़े चौराहा पर एकत्रित हुए। बड़े चौराहे पर अखाड़ा हुआ। अखाड़े में नौजवानों ने हैरत अंगेज करतब दिखाकर लोगों को दांतों तले उंगुलियां दबाने को मजबूर कर दिया।
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मुहर्रम कमेटी के अध्यक्ष आजम खां, मोहम्मद एजाज उर्फ गुड्ड्, सलीम खां, नदीम इलाही, सादाब असलम, सिराज, रवि, वसीम, फैसल, सकीर, गुलाब हुसैन, इमरान आदि ने ताजियेदारों को पगड़ी बांधकर हौसला अफजाही की। ताजियेदारों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
बड़े चौराहे से ताजियों का जुलूस शुरू हुआ। ताजियों की छटा देखने के लिए हजारों हिंदू और मुसलिमों का सैलाब सड़कों पर उमड़ पड़ा। ताजियों पर चांदी अबरक और पन्नी के अलावा प्लास्टिक शीट पर नक्काशी की गई थी। बड़े चौराहे से शुरू हुआ ताजिये का जुलूस कृष्णा टाकीज रोड, देवी रोड, कटरा होता हुआ मदार दरवाजा पहुंचा। वहां लोगों ने रोशनी का इंतजाम किया था। मदार दरवाजे पर अखाड़े के कलाकारों ने हैरत अंगेज करतब दिखाए। मदार दरवाजे पर अखाड़ेदारों को पुरस्कृत व सम्मानित किया गया।
इसके पश्चात सभी ताजिए सलामी के लिए किले के पीछे दरगाह शरीफ पहुंचे। वहां से मोहल्ला भरतवाल होते हुए देवी रोड चुंगी करबला शरीफ पहुंचे। जहां गमगीन माहौल में ताजिये सुपुर्द ए खाक किए गए। जुलूस में बैंड मातमी धुने बजाकर चल रहे थे। ताजियेदार कंधों पर ताजिये रखकर ढोल पीटकर मातम मनाते हुए चल रहे थे।
वहीं शनिवार की रात बड़े चौराहे पर कुरान ख्वानी का सिलसिला चलता रहा। इस दौरान महिलाओं और बच्चों ने कुरान की तिलावत की। इसके बाद पूरी रात लंगर का आयोजन किया गया। इस दौरान लोगों ने स्टॉल लगाकर हलीम, खीर, बिरयानी, केसर का दूध वितरित किया। इस मौके पर हाजी एहसान राइन, असरफ, चंदा राइन, अकरम, मुवीन आदि ने स्टॉल लगाकर छबील की।
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हजरत इमाम हुसैन की याद में मनाए जाने वाले मुहर्रम पर ताजियों की जियारत के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। ताजियों का काफिला करबला पहुंचा। इसके बाद फातिहा हुई। हजरत इमाम हुसैन की शहादत पर कई जगह लंगर में खाना खिलाने का कार्य हुआ।
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नमाज के बाद विभिन्न स्थानों से ताजियों का उठना शुरू हुआ और सभी ताजियेदार ताजियों के जुलूस को लेकर बड़े चौराहा पर एकत्रित हुए। बड़े चौराहे पर अखाड़ा हुआ। अखाड़े में नौजवानों ने हैरत अंगेज करतब दिखाकर लोगों को दांतों तले उंगुलियां दबाने को मजबूर कर दिया।
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मुहर्रम कमेटी के अध्यक्ष आजम खां, मोहम्मद एजाज उर्फ गुड्ड्, सलीम खां, नदीम इलाही, सादाब असलम, सिराज, रवि, वसीम, फैसल, सकीर, गुलाब हुसैन, इमरान आदि ने ताजियेदारों को पगड़ी बांधकर हौसला अफजाही की। ताजियेदारों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
बड़े चौराहे से ताजियों का जुलूस शुरू हुआ। ताजियों की छटा देखने के लिए हजारों हिंदू और मुसलिमों का सैलाब सड़कों पर उमड़ पड़ा। ताजियों पर चांदी अबरक और पन्नी के अलावा प्लास्टिक शीट पर नक्काशी की गई थी। बड़े चौराहे से शुरू हुआ ताजिये का जुलूस कृष्णा टाकीज रोड, देवी रोड, कटरा होता हुआ मदार दरवाजा पहुंचा। वहां लोगों ने रोशनी का इंतजाम किया था। मदार दरवाजे पर अखाड़े के कलाकारों ने हैरत अंगेज करतब दिखाए। मदार दरवाजे पर अखाड़ेदारों को पुरस्कृत व सम्मानित किया गया।
इसके पश्चात सभी ताजिए सलामी के लिए किले के पीछे दरगाह शरीफ पहुंचे। वहां से मोहल्ला भरतवाल होते हुए देवी रोड चुंगी करबला शरीफ पहुंचे। जहां गमगीन माहौल में ताजिये सुपुर्द ए खाक किए गए। जुलूस में बैंड मातमी धुने बजाकर चल रहे थे। ताजियेदार कंधों पर ताजिये रखकर ढोल पीटकर मातम मनाते हुए चल रहे थे।
वहीं शनिवार की रात बड़े चौराहे पर कुरान ख्वानी का सिलसिला चलता रहा। इस दौरान महिलाओं और बच्चों ने कुरान की तिलावत की। इसके बाद पूरी रात लंगर का आयोजन किया गया। इस दौरान लोगों ने स्टॉल लगाकर हलीम, खीर, बिरयानी, केसर का दूध वितरित किया। इस मौके पर हाजी एहसान राइन, असरफ, चंदा राइन, अकरम, मुवीन आदि ने स्टॉल लगाकर छबील की।