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जीएसटी: व्यापारियों को दाखिल करने होंगे चार रिटर्न
Updated Fri, 18 Aug 2017 11:56 PM IST
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बाजार
- फोटो : अमर उजाला
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फिरोजाबाद। जीएसटी को लेकर व्यापारियों की मुश्किलें कम होने के बजाए बढ़ती जा रही हैं। अबतक जहां व्यापारियों को तीन रिटर्न दाखिल करने को कहा गया था, परंतु अब उन्हें चार रिटर्न दाखिल करने होंगे। केंद्र सरकार ने जीएसटीआर-3बी के नाम से नया फार्म शामिल कर दिया है।
केंद्र सरकार द्वारा एक जुलाई से जीएसटी लागू कर दिया है। इसमें पंजीकृत व्यापारियों को प्रत्येक माह तीन रिटर्न दाखिल करने को कहा गया। इसमें पहला बिक्री का रिटर्न अगले माह की 10 तारीख, दूसरा 15 व तीसरा 20 तक दाखिल करने को कहा गया था। जीएसटी में पंजीयन व एआरएन नंबर न मिलने के कारण तमाम व्यापारी पहले से ही काफी परेशान थे।
केंद्र सरकार ने व्यापारियों की समस्या दूर करने के बजाए नया अतिरिक्त फार्म जीएसटी आर-3बी के नाम शामिल कर दिया। व्यापारियों को 20 जुलाई तक चार रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य कर दिया है। रिटर्न दाखिल करने में व्यापारी को खरीद, बिक्री के साथ टैक्स की पूरी जानकारी देनी होगी। यही नहीं समय से रिटर्न दाखिल न करने वाले व्यापारियों पर अर्थदंड भी लग सकता है। इससे व्यापारियों की नींद उड़ गई है।
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केंद्र सरकार ने जीएसटी आर3-बी नया फार्म लांच किया है, जिससे व्यापारी समय से अपना टैक्स जमा कर दें। जीएसटी में पंजीकृत सभी व्यापारियों को 20 अगस्त तक रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है। समाधान योजना वाले व्यापारियों को अभी रिटर्न जमा करना अनिवार्य नहीं है। उन्हें अक्टॅबर में रिटर्न दाखिल करना होगा।
कुशल गुप्ता-सीए
जीएसटी में रिटर्न दाखिल करने के लिए विभाग से अभी तक एआरएन नंबर नहीं मिला है। इसके चलते रिटर्न दाखिल नहीं कर पा रहा हूं। वकीलों के चक्कर काट रहे हैं। विभाग में लिख कर दे चुके हैं हैल्प लाइन नंबर पर भी फोन किया, परंतु समस्या का निदान नहीं हो सका।
मनीष जैन- व्यापारी
जीएसटी में रिर्टन दाखिल करने को मात्र दो दिन का समय रह गया है, परंतु साफ्टवेयर में तकनीकी कमी के चलते विभाग से अभी तक एआरएन नंबर नहीं मिला। ऑनलाइन भी प्रक्रिया अपनाई, उसके बाद भी नंबर नहीं आया। यदि समय पर रिटर्न दाखिल न किया तो जुर्माना भी अदा करना पड़ेगा। मेडिकल लाइन में अलग-अलग स्लैब लागू होने से भी तमाम समस्या आ रही हैं।
अभिषेक गर्ग-दवा व्यापारी
जीएसटी लागू होने के बाद व्यापार करना बहुत मुश्किल हो गया है। रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया बेहद कठिन है। कम जानकारी होने के कारण मुनीम व वकीलों को अधिक फीस देनी पड़ रही है। पहले की अपेक्षा खर्चा अधिक हो गया है। यही स्थिति रही काम बंद करना पड़ेगा।
मो. हाजी रहीश- किराना थोक व्यापारी
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केंद्र सरकार द्वारा एक जुलाई से जीएसटी लागू कर दिया है। इसमें पंजीकृत व्यापारियों को प्रत्येक माह तीन रिटर्न दाखिल करने को कहा गया। इसमें पहला बिक्री का रिटर्न अगले माह की 10 तारीख, दूसरा 15 व तीसरा 20 तक दाखिल करने को कहा गया था। जीएसटी में पंजीयन व एआरएन नंबर न मिलने के कारण तमाम व्यापारी पहले से ही काफी परेशान थे।
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केंद्र सरकार ने व्यापारियों की समस्या दूर करने के बजाए नया अतिरिक्त फार्म जीएसटी आर-3बी के नाम शामिल कर दिया। व्यापारियों को 20 जुलाई तक चार रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य कर दिया है। रिटर्न दाखिल करने में व्यापारी को खरीद, बिक्री के साथ टैक्स की पूरी जानकारी देनी होगी। यही नहीं समय से रिटर्न दाखिल न करने वाले व्यापारियों पर अर्थदंड भी लग सकता है। इससे व्यापारियों की नींद उड़ गई है।
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केंद्र सरकार ने जीएसटी आर3-बी नया फार्म लांच किया है, जिससे व्यापारी समय से अपना टैक्स जमा कर दें। जीएसटी में पंजीकृत सभी व्यापारियों को 20 अगस्त तक रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है। समाधान योजना वाले व्यापारियों को अभी रिटर्न जमा करना अनिवार्य नहीं है। उन्हें अक्टॅबर में रिटर्न दाखिल करना होगा।
कुशल गुप्ता-सीए
जीएसटी में रिटर्न दाखिल करने के लिए विभाग से अभी तक एआरएन नंबर नहीं मिला है। इसके चलते रिटर्न दाखिल नहीं कर पा रहा हूं। वकीलों के चक्कर काट रहे हैं। विभाग में लिख कर दे चुके हैं हैल्प लाइन नंबर पर भी फोन किया, परंतु समस्या का निदान नहीं हो सका।
मनीष जैन- व्यापारी
जीएसटी में रिर्टन दाखिल करने को मात्र दो दिन का समय रह गया है, परंतु साफ्टवेयर में तकनीकी कमी के चलते विभाग से अभी तक एआरएन नंबर नहीं मिला। ऑनलाइन भी प्रक्रिया अपनाई, उसके बाद भी नंबर नहीं आया। यदि समय पर रिटर्न दाखिल न किया तो जुर्माना भी अदा करना पड़ेगा। मेडिकल लाइन में अलग-अलग स्लैब लागू होने से भी तमाम समस्या आ रही हैं।
अभिषेक गर्ग-दवा व्यापारी
जीएसटी लागू होने के बाद व्यापार करना बहुत मुश्किल हो गया है। रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया बेहद कठिन है। कम जानकारी होने के कारण मुनीम व वकीलों को अधिक फीस देनी पड़ रही है। पहले की अपेक्षा खर्चा अधिक हो गया है। यही स्थिति रही काम बंद करना पड़ेगा।
मो. हाजी रहीश- किराना थोक व्यापारी