{"_id":"5761b2e74f1c1b144311b8cc","slug":"22-5-percent-people-are-not-eligible-in-a-village","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक गांव में 22.5 फीसदी अपात्र परिवार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक गांव में 22.5 फीसदी अपात्र परिवार
अमर उजाला आगरा
Updated Thu, 16 Jun 2016 01:26 AM IST
विज्ञापन
चावल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्र गृहस्थियों की लिस्ट बनाने में बड़ा खेल हुआ है। राशन डीलर और पूर्ति विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से अपात्रों को लाभ दिया जा रहा है। इधर, पात्र परिवार कार्ड बनवाने को भटक रहे हैं। तहसील किरावली के गांव भिलावटी में 22.5 फीसदी ऐसे परिवारों को सूची में शामिल किया गया है, जो या तो गांव में नहीं हैं या जिनके पास कई बीघा खेत, ट्रैक्टर और अन्य सुविधाएं हैं।
पिछले दिनों एडीएम सिविल सप्लाई अतुल कुमार ने तहसील किरावली के भिलावटी गांव में सत्यापन किया तो वहां लगभग 295 परिवारों में से 74 परिवारों के नाम फर्जी पाए गए। इनमें से करीब 38 परिवार ऐसे हैं, जो गांव में रहते ही नहीं हैं। तीन नाम ऐसे हैं, जिनकी मौत हो चुकी है। कुछ ऐसे हैं जिनके यहां यूनिट आठ हैं लेकिन कार्ड 11 यूनिट का है। किसी में एक यूनिट हैं लेकिन कार्ड दो यूनिट का है। एक गृहस्थी ऐसी भी हैै, जिसके पास आठ बीघा खेत और कोआपरेटिव में नौकरी है। तीन परिवारों में मुखिया सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त हैं। कुछ परिवार ऐसे हैं जिनके पास खेत और ट्रैक्टर भी हैं। इस तरह कुल 74 परिवार हैं। अछनेरा के मई गांव में भी ऐसे मामले सामने आए हैं।
शासन का डंडा हुआ तो दौड़ पड़े अधिकारी
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बनीं पात्र गृहस्थियों की सूचियों में गड़बड़ी की शिकायतें बड़े पैमाने पर मिल रही थीं। पिछले दिनों जब मुख्य सचिव आलोक रंजन ने 30 जून तक सत्यापन करने के आदेश दिए तो जिलास्तरीय अधिकारी गांवों की धूल फांकने लगे। छह जून से अब तक करीब 37 डीलरों के यहां 19,028 राशन कार्ड चेक किए गए हैं। इनमें से 1,297 राशन कार्ड अपात्रों के पाए गए हैं। करीब 665 आवेदन पत्र ऐसे परिवारों के मिले हैं जो पात्र हैं लेकिन उनका नाम सूची में नहीं जोड़ा गया है। बुधवार को समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने भी अफसरों को कड़ी चेतावनी दी है।
विज्ञापन
‘खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बनाई गई सूची में गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए जिलास्तरीय अधिकारियों द्वारा गांवों में खुली बैठक की जा रही हैं। जिले में पांच से 10 फीसदी तक गड़बड़ी है। भिलावटी गांव में जरूर यह आंकड़ा करीब 22.5 फीसदी के आसपास है। जरूरी है कि गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। ’
अतुल सिंह, एडीएम नागरिक आपूर्ति
विज्ञापन
पिछले दिनों एडीएम सिविल सप्लाई अतुल कुमार ने तहसील किरावली के भिलावटी गांव में सत्यापन किया तो वहां लगभग 295 परिवारों में से 74 परिवारों के नाम फर्जी पाए गए। इनमें से करीब 38 परिवार ऐसे हैं, जो गांव में रहते ही नहीं हैं। तीन नाम ऐसे हैं, जिनकी मौत हो चुकी है। कुछ ऐसे हैं जिनके यहां यूनिट आठ हैं लेकिन कार्ड 11 यूनिट का है। किसी में एक यूनिट हैं लेकिन कार्ड दो यूनिट का है। एक गृहस्थी ऐसी भी हैै, जिसके पास आठ बीघा खेत और कोआपरेटिव में नौकरी है। तीन परिवारों में मुखिया सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त हैं। कुछ परिवार ऐसे हैं जिनके पास खेत और ट्रैक्टर भी हैं। इस तरह कुल 74 परिवार हैं। अछनेरा के मई गांव में भी ऐसे मामले सामने आए हैं।
विज्ञापन
शासन का डंडा हुआ तो दौड़ पड़े अधिकारी
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बनीं पात्र गृहस्थियों की सूचियों में गड़बड़ी की शिकायतें बड़े पैमाने पर मिल रही थीं। पिछले दिनों जब मुख्य सचिव आलोक रंजन ने 30 जून तक सत्यापन करने के आदेश दिए तो जिलास्तरीय अधिकारी गांवों की धूल फांकने लगे। छह जून से अब तक करीब 37 डीलरों के यहां 19,028 राशन कार्ड चेक किए गए हैं। इनमें से 1,297 राशन कार्ड अपात्रों के पाए गए हैं। करीब 665 आवेदन पत्र ऐसे परिवारों के मिले हैं जो पात्र हैं लेकिन उनका नाम सूची में नहीं जोड़ा गया है। बुधवार को समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने भी अफसरों को कड़ी चेतावनी दी है।
विज्ञापन
‘खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बनाई गई सूची में गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए जिलास्तरीय अधिकारियों द्वारा गांवों में खुली बैठक की जा रही हैं। जिले में पांच से 10 फीसदी तक गड़बड़ी है। भिलावटी गांव में जरूर यह आंकड़ा करीब 22.5 फीसदी के आसपास है। जरूरी है कि गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। ’
अतुल सिंह, एडीएम नागरिक आपूर्ति