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कांग्रेसी आंगन में खामोश है चुनावी किलकारी
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मैनपुरी। कभी मैनपुरी की सीट पर कांग्रेस की बादशाहत हुआ करती थी, लेकिन वक्त बदला तो जनता का रुझान भी बदल गया। इसके बाद कांग्रेस के टिकट पर कोई भी प्रत्याशी संसद तक नहीं पहुंच सका। इस बार भी कांग्रेसी आंगन में चुनावी किलकारी पूरी तरह खामोश है। पार्टी कार्यालय में ताला लटक रहा है। नेता और कार्यकर्ता अपने-अपने कारोबार संभाले हुए हैं।
1952 में जब पहली लोकसभा का चुनाव हुआ तो कांग्रेस से बादशाह गुप्ता सांसद चुने गए। इसके बाद 1984 के चुनाव में पांचवीं और आखिरी बार कांग्रेस का सांसद मैनपुरी से चुना गया। इस बीच कांग्रेस की हार जीत का सिलसिला चलता रहा। लेकिन 1984 के चुनाव के बाद मैनपुरी में कांग्रेस का सूरज दिन डूबता चला गया। हर बार कांग्रेस ने चुनाव लड़ा, लेकिन नतीजा सिफर रहा। हाल ये हुआ कि इसके चलते कांग्रेस का अस्तित्व ही मैनपुरी में खतरे में पड़ गया। लिहाजा पार्टी ने भी समय की नजाकत को समझते हुए वर्ष 2004 के चुनाव के बाद हाथ खड़े कर दिए।
पिछले चार लोकसभा क्षेत्र के चुनावों से पार्टी ने कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा। ऐसे में कांग्रेस पदाधिकारियों से लेकर कार्यकर्ताओं तक हर कोई मायूस है। मंडी धर्मदास स्थित कार्यालय पर मंगलवार को ताला लटका हुआ था। बाहर पड़ी गंदगी इस बात की गवाही दे रही थी कि पिछले कई दिनों से कार्यालय का गेट तक नहीं खुला है। वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष संकोच गौड़ भी अपने प्रतिष्ठान पर बैठे थे। चुनावी माहौल से दूर वे अपने काम में लगे थे। क्यों कि जब उनकी पार्टी ने कोई उम्मीदवार ही नहीं उतारा तो आखिर वे किसके लिए मेहनत करते।
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आखिरी बार सुमन चौहान लड़ी थीं चुनाव
वर्ष 2004 में मुलायम सिंह यादव ने अपने भतीजे धर्मेंद्र यादव के लिए मैनपुरी की सीट छोड़ी थी। तब उपचुनाव में कांग्रेस ने सुमन चौहान को प्रत्याशी बनाया था। उन्हें कुल 11 हजार 391 वोट ही मिल सके थे। इसके बाद से अब तक हर बार कांग्रेस चुनाव में हाथ खड़े करती आई है।
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1952 में जब पहली लोकसभा का चुनाव हुआ तो कांग्रेस से बादशाह गुप्ता सांसद चुने गए। इसके बाद 1984 के चुनाव में पांचवीं और आखिरी बार कांग्रेस का सांसद मैनपुरी से चुना गया। इस बीच कांग्रेस की हार जीत का सिलसिला चलता रहा। लेकिन 1984 के चुनाव के बाद मैनपुरी में कांग्रेस का सूरज दिन डूबता चला गया। हर बार कांग्रेस ने चुनाव लड़ा, लेकिन नतीजा सिफर रहा। हाल ये हुआ कि इसके चलते कांग्रेस का अस्तित्व ही मैनपुरी में खतरे में पड़ गया। लिहाजा पार्टी ने भी समय की नजाकत को समझते हुए वर्ष 2004 के चुनाव के बाद हाथ खड़े कर दिए।
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पिछले चार लोकसभा क्षेत्र के चुनावों से पार्टी ने कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा। ऐसे में कांग्रेस पदाधिकारियों से लेकर कार्यकर्ताओं तक हर कोई मायूस है। मंडी धर्मदास स्थित कार्यालय पर मंगलवार को ताला लटका हुआ था। बाहर पड़ी गंदगी इस बात की गवाही दे रही थी कि पिछले कई दिनों से कार्यालय का गेट तक नहीं खुला है। वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष संकोच गौड़ भी अपने प्रतिष्ठान पर बैठे थे। चुनावी माहौल से दूर वे अपने काम में लगे थे। क्यों कि जब उनकी पार्टी ने कोई उम्मीदवार ही नहीं उतारा तो आखिर वे किसके लिए मेहनत करते।
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आखिरी बार सुमन चौहान लड़ी थीं चुनाव
वर्ष 2004 में मुलायम सिंह यादव ने अपने भतीजे धर्मेंद्र यादव के लिए मैनपुरी की सीट छोड़ी थी। तब उपचुनाव में कांग्रेस ने सुमन चौहान को प्रत्याशी बनाया था। उन्हें कुल 11 हजार 391 वोट ही मिल सके थे। इसके बाद से अब तक हर बार कांग्रेस चुनाव में हाथ खड़े करती आई है।