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बैंक की हड़ताल से 50 करोड़ का कारोबार प्रभावित
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एटा। केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में शुक्रवार को जिले की प्रमुख बैंकों के अधिकारी, कर्मचारी अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे। हड़ताल के कारण जिले में करीब 50 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।
केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के क्षेत्रीय सचिव प्रभात कुमार ने बताया है कि पांच सूत्रीय मांगों, न्यूनतम मजदूरी फार्मूला पर मजदूरी संशोधन मांग, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय का विरोध, वेतन चलने के पैमाने की मांग, स्केल एक से सात तक सभी अधिकारियों को सभी बैंकों द्वारा बिना सर्त कबर करने वाले अधिकृत पत्र, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में योजना के आधार पर अधिकारियों का चिकित्सा बीमा योजना, को लेकर हड़ताल की गई। उन्होंने कहा कि न्यूनतम मजदूरी फार्मूला एक आवश्यकता आधारित मजदूरी गणना है जो सामान्य रूप से आवश्यकताओं पर खर्च होती है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रयासों को भारत सरकार अपनी उदार नीति के चलते शुरू किया था। सरकार का मुख्य एजेंडा विलय प्रक्रिया द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण करना है। वेतन के मौजूदा स्केल में किसी व्यक्ति को स्थगित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया है कि हड़ताल के कारण जिले में करीब 50 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित रहा। हड़ताल में एसके वर्मा रीजनल चेयरमैन, हेमंत कुमार एआरएस, आरसेटी निदेशक पीके सेठ, अमित पॉल, गिरजेश श्रीवास्तव, अविनाश अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
बैंक कभी भी अपनी हड़ताल कर देती है। शनिवार को अवकाश रहेगा और फिर रविवार का अवकाश है। इससे सबसे अधिक परेशानी उपभोक्ताओं को झेलनी पड़ती है।
सोवरन खान, उपभोक्ता
बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी मांग मनवाने का दूसरा तरीका अपनाना चाहिए। उपभोक्ता दूर दराज क्षेत्र से आते हैं, जब उन्हें बैंक की हड़ताल होने की जानकारी होती है तो मायूस होकर लौटना पड़ता है।
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राजकुमारी जैन, उपभोक्ता
इन बैंको के कर्मचारी रहे हड़ताल पर
हड़ताल में केनरा बैंक, भारतीय स्टैट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल पर रहे।
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केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के क्षेत्रीय सचिव प्रभात कुमार ने बताया है कि पांच सूत्रीय मांगों, न्यूनतम मजदूरी फार्मूला पर मजदूरी संशोधन मांग, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय का विरोध, वेतन चलने के पैमाने की मांग, स्केल एक से सात तक सभी अधिकारियों को सभी बैंकों द्वारा बिना सर्त कबर करने वाले अधिकृत पत्र, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में योजना के आधार पर अधिकारियों का चिकित्सा बीमा योजना, को लेकर हड़ताल की गई। उन्होंने कहा कि न्यूनतम मजदूरी फार्मूला एक आवश्यकता आधारित मजदूरी गणना है जो सामान्य रूप से आवश्यकताओं पर खर्च होती है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रयासों को भारत सरकार अपनी उदार नीति के चलते शुरू किया था। सरकार का मुख्य एजेंडा विलय प्रक्रिया द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण करना है। वेतन के मौजूदा स्केल में किसी व्यक्ति को स्थगित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया है कि हड़ताल के कारण जिले में करीब 50 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित रहा। हड़ताल में एसके वर्मा रीजनल चेयरमैन, हेमंत कुमार एआरएस, आरसेटी निदेशक पीके सेठ, अमित पॉल, गिरजेश श्रीवास्तव, अविनाश अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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बैंक कभी भी अपनी हड़ताल कर देती है। शनिवार को अवकाश रहेगा और फिर रविवार का अवकाश है। इससे सबसे अधिक परेशानी उपभोक्ताओं को झेलनी पड़ती है।
सोवरन खान, उपभोक्ता
बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी मांग मनवाने का दूसरा तरीका अपनाना चाहिए। उपभोक्ता दूर दराज क्षेत्र से आते हैं, जब उन्हें बैंक की हड़ताल होने की जानकारी होती है तो मायूस होकर लौटना पड़ता है।
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राजकुमारी जैन, उपभोक्ता
इन बैंको के कर्मचारी रहे हड़ताल पर
हड़ताल में केनरा बैंक, भारतीय स्टैट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल पर रहे।