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तेज हवा व बारिश से गेहूं की फसल चौपट
Updated Thu, 12 Apr 2018 11:33 PM IST
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बेमौसम तेज मूसलाधार बारिश के बाद खेत मे जल भराव होने से पानी मे डूबी गेंहू की पूलियां। अमर उजाला
कासगंज।
जिले में लगातार दो दिन से तेज हवा एवं बारिश ने गेहूं की फसल को चौपट कर दिया है। खेतों में कटी लाक भीग चुकी है। जबकि खेतों में खड़ी फसल बिछ गई है। फसल की बर्बादी ने किसान को चिंता में डाल रखा है। मौसम की मार के बाद कटाई व गहाई का कार्य रुक गया है, जिससे फसल के बाजार में आने में विलंब होने की उम्मीद है।
जिले में बारिश व तेज हवा का सबसे अधिक असर कासगंज तहसील क्षेत्र में हुआ है। इस क्षेत्र में 10 अप्रैल की रात को आंधी आने के साथ बारिश हुई। रात में 1.5 एमएम बारिश हुई। इसके बाद 11 अप्रैल को फिर से सुबह के समय बारिश हो गई। रात के समय भी तेज हवा के साथ बारिश हुई। करीब 2.2 एमएम बारिश हो गई। पटियाली व सहावर तहसील क्षेत्र में भी तेज हवा के साथ हल्की बूंदाबांदी हुई। खेतों में गेहूं की लाक भीग गई। जबकि खेतों में खड़ी फसल बिछ गई। फसल की बर्बादी ने किसान की नींद उड़ा दी है। किसान ने जब गुुरुवार को फसल की कटाई का कार्य शुरू किया तो फसल के साथ मिट्टी भी लगकर आने लगी। जिससे भूसा के खराब होने के डर से किसान ने कटाई रोक दी।
किसान को बाजार में नहीं मिलेगा पूरा दाम
आंधी व बारिश से गेहूं की लाक भीग जाने से किसान चिंतित है। किसान को दाने काले पड़ने का चिंता सताने लगी है। यदि ऐसा हुआ तो किसान को इसका नुक्सान उठाना पड़ेगा। मानक पूरा न होने पर किसान अपना गेहूं क्रय केंदों पर नहीं लगा सकेगा। बाजार में फसल की उसे पर्याप्त कीमत नहीं मिल सकेगी।
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किसान लाक सुखाने में जुटा
मौसम के बदले मिजाज ने किसान की मेहनत बढ़ा दी है। गुरुवार को मौसम खुल जाने पर किसान ने राहत की सांस ली है। धूप निकलने पर किसान ने खेतों में अपनी लाक को फैला दिया। ताकि लाक सूख जाए।
किसान को नहीं मिल पाएगा क्षति का मुआवजा
कासगंज। प्रकृति की मार से बर्बाद हुई फसल का मुआवजा मिलना भी किसान के लिए आसान नहीं होगा। शासन से 30 प्रतिशत फसल के बर्बाद होने की स्थिति में ही मुआवजा देने का प्रावधान है। जबकि प्रशासन अधिकतम पांच प्रतिशत तक फसल की बर्बादी का आंकलन कर रहा है।
क्षेत्र में आंधी व बारिश का असर अन्य जनपदों से काफी कम रहा है। अधिकतम पांच प्रतिशत तक फसल को क्षति होने का अनुमान है। देवेंद्र प्रताप सिंह एसडीएम कासगंज
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जिले में लगातार दो दिन से तेज हवा एवं बारिश ने गेहूं की फसल को चौपट कर दिया है। खेतों में कटी लाक भीग चुकी है। जबकि खेतों में खड़ी फसल बिछ गई है। फसल की बर्बादी ने किसान को चिंता में डाल रखा है। मौसम की मार के बाद कटाई व गहाई का कार्य रुक गया है, जिससे फसल के बाजार में आने में विलंब होने की उम्मीद है।
जिले में बारिश व तेज हवा का सबसे अधिक असर कासगंज तहसील क्षेत्र में हुआ है। इस क्षेत्र में 10 अप्रैल की रात को आंधी आने के साथ बारिश हुई। रात में 1.5 एमएम बारिश हुई। इसके बाद 11 अप्रैल को फिर से सुबह के समय बारिश हो गई। रात के समय भी तेज हवा के साथ बारिश हुई। करीब 2.2 एमएम बारिश हो गई। पटियाली व सहावर तहसील क्षेत्र में भी तेज हवा के साथ हल्की बूंदाबांदी हुई। खेतों में गेहूं की लाक भीग गई। जबकि खेतों में खड़ी फसल बिछ गई। फसल की बर्बादी ने किसान की नींद उड़ा दी है। किसान ने जब गुुरुवार को फसल की कटाई का कार्य शुरू किया तो फसल के साथ मिट्टी भी लगकर आने लगी। जिससे भूसा के खराब होने के डर से किसान ने कटाई रोक दी।
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किसान को बाजार में नहीं मिलेगा पूरा दाम
आंधी व बारिश से गेहूं की लाक भीग जाने से किसान चिंतित है। किसान को दाने काले पड़ने का चिंता सताने लगी है। यदि ऐसा हुआ तो किसान को इसका नुक्सान उठाना पड़ेगा। मानक पूरा न होने पर किसान अपना गेहूं क्रय केंदों पर नहीं लगा सकेगा। बाजार में फसल की उसे पर्याप्त कीमत नहीं मिल सकेगी।
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किसान लाक सुखाने में जुटा
मौसम के बदले मिजाज ने किसान की मेहनत बढ़ा दी है। गुरुवार को मौसम खुल जाने पर किसान ने राहत की सांस ली है। धूप निकलने पर किसान ने खेतों में अपनी लाक को फैला दिया। ताकि लाक सूख जाए।
किसान को नहीं मिल पाएगा क्षति का मुआवजा
कासगंज। प्रकृति की मार से बर्बाद हुई फसल का मुआवजा मिलना भी किसान के लिए आसान नहीं होगा। शासन से 30 प्रतिशत फसल के बर्बाद होने की स्थिति में ही मुआवजा देने का प्रावधान है। जबकि प्रशासन अधिकतम पांच प्रतिशत तक फसल की बर्बादी का आंकलन कर रहा है।
क्षेत्र में आंधी व बारिश का असर अन्य जनपदों से काफी कम रहा है। अधिकतम पांच प्रतिशत तक फसल को क्षति होने का अनुमान है। देवेंद्र प्रताप सिंह एसडीएम कासगंज