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श्रीकृष् ण जन्मलीला देख मंत्रमुग् ध हुए दर्शक
Updated Mon, 18 Dec 2017 11:17 PM IST
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फिरोजाबाद। रामलीला मैदान में आयोजित श्रीमद् भागवत और विराट संत सम्मेलन के चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्म लीला का आयोजन हुआ। श्रीकृष्ण जन्म लीला देख श्रद्धालुओं ने राधे-राधे और जय श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए।
सोह्म पीठाधीश्वर स्वामी सत्यानंद महाराज ने कहा कि भगवान ने सृष्टि का निर्माण किया है। मनुष्य को सब कुछ दिया, लेकिन वह उसका उपयोग सही ढंग से नहीं करता। यही कारण है कि वो जीवन भर दुखी रहता है। उसके दुख की वजह भौतिक साधनों की कमी नहीं, बल्कि स्वभाव है।
स्वामी शिवचेतन महाराज ने कहा कि जिसके पास ज्ञान, शील, सदाचार, तप और जप नहीं, उसका जीवन व्यर्थ है। इन गुणों से विहीन मनुष्य मानव जैसी दुलर्भ योनि में जन्म लेने के बाद भी बेकार है। शुक देवानंद महाराज ने कहा कि मानव को जीवों की निष्काम सेवा करनी चाहिए। निष्काम सेवा से अंत:करण शुद्ध होता है।
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जिसका अंत:करण शुद्ध हो जाता है, वह व्यक्ति ज्ञान का अधिकारी हो जाता है। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि व्यक्ति के अंदर विद्या के साथ गुण भी होना चाहिए। जिसके अंदर गुण नहीं, वह विद्या का दुरुपयोग करता है। जिसके अंदर गुण है, वह अपना उद्धार कर लेता है।
आचार्य पं. रामगोपाल ने भगवान श्रीकृष्ण की लीला का वर्णन करते हुए कहा कि जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ने लगता है तो स्वयं भगवान विष्णु किसी न किसी रूप में अवतार लेकर अत्याचारियों का विनाश कर धर्म की स्थापना करते हैं। वे अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। जीके शर्मा ने श्रीकृष्ण जन्मलीला का मंचन करने वाले भक्तों का सम्मान किया। शाम को सामूहिक आरती उतारी गई।
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सोह्म पीठाधीश्वर स्वामी सत्यानंद महाराज ने कहा कि भगवान ने सृष्टि का निर्माण किया है। मनुष्य को सब कुछ दिया, लेकिन वह उसका उपयोग सही ढंग से नहीं करता। यही कारण है कि वो जीवन भर दुखी रहता है। उसके दुख की वजह भौतिक साधनों की कमी नहीं, बल्कि स्वभाव है।
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स्वामी शिवचेतन महाराज ने कहा कि जिसके पास ज्ञान, शील, सदाचार, तप और जप नहीं, उसका जीवन व्यर्थ है। इन गुणों से विहीन मनुष्य मानव जैसी दुलर्भ योनि में जन्म लेने के बाद भी बेकार है। शुक देवानंद महाराज ने कहा कि मानव को जीवों की निष्काम सेवा करनी चाहिए। निष्काम सेवा से अंत:करण शुद्ध होता है।
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जिसका अंत:करण शुद्ध हो जाता है, वह व्यक्ति ज्ञान का अधिकारी हो जाता है। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि व्यक्ति के अंदर विद्या के साथ गुण भी होना चाहिए। जिसके अंदर गुण नहीं, वह विद्या का दुरुपयोग करता है। जिसके अंदर गुण है, वह अपना उद्धार कर लेता है।
आचार्य पं. रामगोपाल ने भगवान श्रीकृष्ण की लीला का वर्णन करते हुए कहा कि जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ने लगता है तो स्वयं भगवान विष्णु किसी न किसी रूप में अवतार लेकर अत्याचारियों का विनाश कर धर्म की स्थापना करते हैं। वे अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। जीके शर्मा ने श्रीकृष्ण जन्मलीला का मंचन करने वाले भक्तों का सम्मान किया। शाम को सामूहिक आरती उतारी गई।