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दस करोड़ खर्च फिर भी नहीं हो सका कूड़े का निस्तारण
Updated Sat, 10 Nov 2018 08:21 PM IST
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मथुरा। पिछले 12 साल की मशक्कत के बाद भी नगर निगम प्रशासन कूड़े का निस्तारण नहीं कर सका है। कहीं कूड़ा जलाया जा रहा है तो कहीं सड़क किनारे डाल रहे हैं। एक बड़े क्षेत्र से तो कूड़ा उठ भी नहीं पा रहा है। हालांकि कूड़ा निस्तारण के लिए अब तक दस करोड़ से ज्यादा की धनराशि ठिकाने लग चुकी है।
कूड़े की समस्या के निस्तारण के लिए जमुनापार में डंपिंग ग्राउंड बना हुआ है। यहां एकत्रित होने वाला कूड़ा क्षेत्रीय लोगों के लिए बड़ी समस्या है। आए दिन इस कूड़े में आग लगाकर निस्तारण कर दिया जाता है। निगम के आंकलन के मुताबिक प्रतिदिन लगभग 200 टन कूड़ा यहां डाला जा रहा है। इससे यहां तीन मंजिल से ऊंचे पहुंच चुके कूड़े के ढेर लग चुके हैं।
हालांकि इसके कूड़े के निस्तारण के लिए निगम ने कई कंपनियों से बातचीत भी की, परंतु कोई समाधान नहीं निकल सका। शुरूआत में इस कूड़े के निस्तारण के लिए एमडब्लूपी कंपनी ने काम शुरू किया। करीब दस करोड़ की लागत से यहां कूड़े निस्तारण के लिए प्लांट लगाया गया। लेकिन, इसका संचालन नहीं हो सका। संयुक्त नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि इसके लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। जल्द ही कूड़ा निस्तारण के लिए कंपनी को ठेका दिया जाएगा।
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अधिकतर कूड़ा बन चुका मिट्टी
छह सात वर्ष से कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा था। इसके चलते बहुत सा ऐसा कूड़ा जिससे कंपनी प्रयोग की वस्तुएं बनाने का दावा कर रही थी मिट्टी हो चुका है। अब यह कूड़ा वहां से उठाया नहीं जा सकता। सिर्फ मिट्टी का टीला ही बन सकता है।
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कूड़े की समस्या के निस्तारण के लिए जमुनापार में डंपिंग ग्राउंड बना हुआ है। यहां एकत्रित होने वाला कूड़ा क्षेत्रीय लोगों के लिए बड़ी समस्या है। आए दिन इस कूड़े में आग लगाकर निस्तारण कर दिया जाता है। निगम के आंकलन के मुताबिक प्रतिदिन लगभग 200 टन कूड़ा यहां डाला जा रहा है। इससे यहां तीन मंजिल से ऊंचे पहुंच चुके कूड़े के ढेर लग चुके हैं।
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हालांकि इसके कूड़े के निस्तारण के लिए निगम ने कई कंपनियों से बातचीत भी की, परंतु कोई समाधान नहीं निकल सका। शुरूआत में इस कूड़े के निस्तारण के लिए एमडब्लूपी कंपनी ने काम शुरू किया। करीब दस करोड़ की लागत से यहां कूड़े निस्तारण के लिए प्लांट लगाया गया। लेकिन, इसका संचालन नहीं हो सका। संयुक्त नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि इसके लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। जल्द ही कूड़ा निस्तारण के लिए कंपनी को ठेका दिया जाएगा।
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अधिकतर कूड़ा बन चुका मिट्टी
छह सात वर्ष से कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा था। इसके चलते बहुत सा ऐसा कूड़ा जिससे कंपनी प्रयोग की वस्तुएं बनाने का दावा कर रही थी मिट्टी हो चुका है। अब यह कूड़ा वहां से उठाया नहीं जा सकता। सिर्फ मिट्टी का टीला ही बन सकता है।