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एटा- खसरे का बढ़ा प्रकोप, लोगों में दहशत
Updated Tue, 10 Apr 2018 09:57 PM IST
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एटा- खसरे का बढ़ा प्रकोप, लोगों में दहशत
- फोटो : अमर उजाला
एटा। जिले के गांव ककरावली में खसरे ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आलम यह है कि गांव के 12 बच्चों में खसरे के लक्षण सामने आने के बाद गांव में दहशत है। लोगों ने बच्चों को घर से बाहर भेजना बंद कर दिया है। साथ ही लोगों ने गांव में फैली गंदगी को लेकर आक्रोश जताया है। उधर, बाल कल्याण समिति ने बीमारी को लेकर चिंता व्यक्त की है।
गांव ककरावली में 12 बच्चों में खसरे के लक्षण सामने आने के बाद चिंता बढना लाजिमी है। लोग बीमारी के फैलने को लेकर तमाम तरह के उपाय कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि गांव में बीमारी फैलने का कारण गंदगी है। महीनों तक गांव में सफाई कर्मी आता नहीं है। ऐसे में नालियां चोक पड़ी हैं और गंदगी के चलते बीमारियां पनप रही हैं। शान मोहम्मद बताते हैं कि गांव में महीनों सफाई नहीं होती। इसके चलते बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। सोमवार को गांव में आई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इलाज दिया, लेकिन दवा का कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। लोगों ने प्रशासन से गांव की सफाई के साथ बच्चों को बेहतर उपचार मुहैया कराने की मांग की है। उधर, बाल कल्याण समिति ने गांव में बच्चों की सेहत बिगडने के बाद चिंता जाहिर की है। मंगलवार को हुई समिति की बैठक में सदस्यों ने मुद्दे को लेकर चिंतन किया। समिति के अध्यक्ष डा. प्रेमपाल पथरिया ने कहा कि समिति पीड़ित बच्चों के परिवारों से मुलाकात करेगी। साथ ही उनको बेहतर उपचार दिलाने की मांग करेगी। सदस्य प्रदीप रघुनंदन ने कहा कि प्रत्येक बच्चे का टीकाकरण बेहद आवश्यक है। चिकित्सा प्रशासन को इसके लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे। बैठक में डा. अनिल कुमार सिंह, निधि आमौरिया, संरक्षण अधिकारी सुखवीर सिंह, परामर्शदाता यतेंद्र सिंह मौजूद रहे।
पड़ोसी गांव में बेचैनी
ककरावली में खसरा फैलने के बाद पड़ोसी गांवों में भी बेचैनी का आलम है। गांव विरामपुर, बमनई, चौथामील समेत कई गांवों में बच्चों का घरों से निकलना बंद है। लोग बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए तमाम उबडय डञरते नजर आ रहे हैं।
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गांव ककरावली में 12 बच्चों में खसरे के लक्षण सामने आने के बाद चिंता बढना लाजिमी है। लोग बीमारी के फैलने को लेकर तमाम तरह के उपाय कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि गांव में बीमारी फैलने का कारण गंदगी है। महीनों तक गांव में सफाई कर्मी आता नहीं है। ऐसे में नालियां चोक पड़ी हैं और गंदगी के चलते बीमारियां पनप रही हैं। शान मोहम्मद बताते हैं कि गांव में महीनों सफाई नहीं होती। इसके चलते बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। सोमवार को गांव में आई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इलाज दिया, लेकिन दवा का कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। लोगों ने प्रशासन से गांव की सफाई के साथ बच्चों को बेहतर उपचार मुहैया कराने की मांग की है। उधर, बाल कल्याण समिति ने गांव में बच्चों की सेहत बिगडने के बाद चिंता जाहिर की है। मंगलवार को हुई समिति की बैठक में सदस्यों ने मुद्दे को लेकर चिंतन किया। समिति के अध्यक्ष डा. प्रेमपाल पथरिया ने कहा कि समिति पीड़ित बच्चों के परिवारों से मुलाकात करेगी। साथ ही उनको बेहतर उपचार दिलाने की मांग करेगी। सदस्य प्रदीप रघुनंदन ने कहा कि प्रत्येक बच्चे का टीकाकरण बेहद आवश्यक है। चिकित्सा प्रशासन को इसके लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे। बैठक में डा. अनिल कुमार सिंह, निधि आमौरिया, संरक्षण अधिकारी सुखवीर सिंह, परामर्शदाता यतेंद्र सिंह मौजूद रहे।
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पड़ोसी गांव में बेचैनी
ककरावली में खसरा फैलने के बाद पड़ोसी गांवों में भी बेचैनी का आलम है। गांव विरामपुर, बमनई, चौथामील समेत कई गांवों में बच्चों का घरों से निकलना बंद है। लोग बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए तमाम उबडय डञरते नजर आ रहे हैं।
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