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क्लस्टर योजना का अफसरों ने किया सत्यापन
Updated Mon, 06 Nov 2017 11:49 PM IST
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फिरोजाबाद।एमएसएमई योजना के तहत स्वीकृत कलस्टर के सत्यापन के लिए सोमवार को केवीआईसी मेरठ के अफसरों ने दोबारा दस्तक दी। उद्योग विभाग के सहायक आयुक्त के साथ मैनपुरी और घिरोर स्थित कार्यालय के साथ तीन गांवों का स्थलीय निरीक्षण किया।
घिरोर की संस्था मनीष सर्वोदय ग्रामोद्योग सेवा संस्थान द्वारा ग्लास टॉयल का कलस्टर स्थापित कर रही है। संस्था द्वारा कलस्टर का प्रस्ताव केवीआईसी मेरठ में प्रस्तुत किया है। कलस्टर के सत्यापन के लिए आयोग के उपनिदेशक ने कमेटी गठित की है।
कमेटी में शामिल खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) मेरठ के एक्जीक्यूटिव आफीसर सीपी सिंह सोमवार को कलस्टर योजना के सत्यापन के लिए फिरोजाबाद पहुंचे। खादी ग्रामोद्योग अधिकारी राकेश कुमार, जिला उद्योग केंद्र के सहायक आयुक्त अरुण त्रिपाठी के साथ एमएसएमई योजना के तहत स्वीकृत कलस्टर का सत्यापन करने के लिए पहले गांव दौंकेली, अंगदपुर, गोविंदपुर में दस्तक दी। इन गांवों में अधिकांश हस्तशिल्पी कार्य करते मिले।
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अफसरों ने गांव में करीब 350 हस्तशिल्पियों का मौके पर सत्यापन किया। संस्था द्वारा सभी हस्तशिल्पियों को प्रशिक्षण देने के साथ ग्लास टॉयल बनाने के लिए कच्चा माल, औजार उपलब्ध कराए जाएंगे। हस्तशिल्पियों द्वारा तैयार माल बाजार में बेचा जाएगा। अफसरों ने मैनपुरी और घिरोर स्थित कार्यालय का निरीक्षण किया। देर शाम टीम कलस्टर योजना का सत्यापन कर वापस लौटी।
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घिरोर की संस्था मनीष सर्वोदय ग्रामोद्योग सेवा संस्थान द्वारा ग्लास टॉयल का कलस्टर स्थापित कर रही है। संस्था द्वारा कलस्टर का प्रस्ताव केवीआईसी मेरठ में प्रस्तुत किया है। कलस्टर के सत्यापन के लिए आयोग के उपनिदेशक ने कमेटी गठित की है।
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कमेटी में शामिल खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) मेरठ के एक्जीक्यूटिव आफीसर सीपी सिंह सोमवार को कलस्टर योजना के सत्यापन के लिए फिरोजाबाद पहुंचे। खादी ग्रामोद्योग अधिकारी राकेश कुमार, जिला उद्योग केंद्र के सहायक आयुक्त अरुण त्रिपाठी के साथ एमएसएमई योजना के तहत स्वीकृत कलस्टर का सत्यापन करने के लिए पहले गांव दौंकेली, अंगदपुर, गोविंदपुर में दस्तक दी। इन गांवों में अधिकांश हस्तशिल्पी कार्य करते मिले।
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अफसरों ने गांव में करीब 350 हस्तशिल्पियों का मौके पर सत्यापन किया। संस्था द्वारा सभी हस्तशिल्पियों को प्रशिक्षण देने के साथ ग्लास टॉयल बनाने के लिए कच्चा माल, औजार उपलब्ध कराए जाएंगे। हस्तशिल्पियों द्वारा तैयार माल बाजार में बेचा जाएगा। अफसरों ने मैनपुरी और घिरोर स्थित कार्यालय का निरीक्षण किया। देर शाम टीम कलस्टर योजना का सत्यापन कर वापस लौटी।