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नौकरी गई तो बेरोजगारों ने किया कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन
Updated Sun, 17 Jun 2018 11:04 PM IST
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नौकरी गई तो बेरोजगारों ने किया कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
एटा। शहर के कासगंज रोड पर संचालित अनिक मिल्क प्रोडक्शन लिमिटेड पर रविवार को मजदूरों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कंपनी द्वारा बिना नोटिस दिए 32 मजदूरों को बाहर निकालने पर आक्रोश जताया। मजदूरों ने फैक्ट्री के गेट पर ताला बंदी करते हुए सड़क पर बैठकर धरना दिया। मौकेे पर पहुंची पुलिस और कंपनी के अधिकारियों ने मजदूरों से बात कर मामले को शांत कराया।
कासगंज रोड पर संचालित अनिल मिल्क एंड फूड प्रोडक्शन यूनिट में जिले के सैकड़ों कर्मचारी काम करते हैं। बताया जाता है कि पिछले दिनों कंपनी ने 15 साल से काम कर रहे 32 मजदूरों को बिना नोटिस दिए बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसे लेकर मजदूरों का गुस्सा फूट पड़ा। कर्मचारियों ने यूनिट के गेट पर तालाबंदी करते हुए जमकर नारेबाजी और काम ठप कर दिया। कर्मचारियों का आरोप है कि यूनिट में स्थानीय कर्मचारियों को दरकिनार कर बाहरी कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई। जबकि 15 साल से काम कर रहे मजदूरों को बाहर कर दिया गया है। साथ ही कंपनी ने दो साल से मजदूरों को कोई बोनस भी नहीं दिया है। ऐसे में मजदूरों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। प्रदर्शन की सूचना पर पहुंची पुलिस ने मजदूरों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन मजदूर नहीं माने। बाद में पहुंचे कंपनी के अधिकारियों ने सोमवार को वार्ता किए जाने का आश्वासन देकर गुस्सा शांत कराया।
इस मौके पर ओमपाल सिंह, पुष्पेंद्र कुमार, चरन सिंह, विमल कुमार, अजय बिहारी, संजय शर्मा, प्रदीप मिश्रा, भूदेव मिश्रा, रामसेवक, मानपाल, देवेंद्र सिंह, रामबाबू, कमलेश शर्मा, विनोद कुमार, शंकर पाल, श्यामबाबू, रामसेवक, धर्मेेंद्र सिंह, महेश चंद्र, नरेश चंद्र, रामकुमार, अवनीश, शिशुपाल, डोरीलाल समेत तमाम मजदूर मौजूद रहे।
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इनका कहना है
मजदूरों को सेवा प्रदाता कंपनी के जरिए रखा जाता है। मौजूदा दौर में कम उत्पादन के चलते मजदूरों की संख्या कम की गई है। मामले में बातचीत चल रही है।
आरएस तिवारी, यूनिट हेड
मजदूरों को निकाले जाने के मामले में कंपनी के अधिकारियों से बात चल रही है। जल्द ही इसका हल निकाला जाएगा।
पीडी शर्मा, ठेकेदार
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कासगंज रोड पर संचालित अनिल मिल्क एंड फूड प्रोडक्शन यूनिट में जिले के सैकड़ों कर्मचारी काम करते हैं। बताया जाता है कि पिछले दिनों कंपनी ने 15 साल से काम कर रहे 32 मजदूरों को बिना नोटिस दिए बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसे लेकर मजदूरों का गुस्सा फूट पड़ा। कर्मचारियों ने यूनिट के गेट पर तालाबंदी करते हुए जमकर नारेबाजी और काम ठप कर दिया। कर्मचारियों का आरोप है कि यूनिट में स्थानीय कर्मचारियों को दरकिनार कर बाहरी कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई। जबकि 15 साल से काम कर रहे मजदूरों को बाहर कर दिया गया है। साथ ही कंपनी ने दो साल से मजदूरों को कोई बोनस भी नहीं दिया है। ऐसे में मजदूरों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। प्रदर्शन की सूचना पर पहुंची पुलिस ने मजदूरों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन मजदूर नहीं माने। बाद में पहुंचे कंपनी के अधिकारियों ने सोमवार को वार्ता किए जाने का आश्वासन देकर गुस्सा शांत कराया।
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इस मौके पर ओमपाल सिंह, पुष्पेंद्र कुमार, चरन सिंह, विमल कुमार, अजय बिहारी, संजय शर्मा, प्रदीप मिश्रा, भूदेव मिश्रा, रामसेवक, मानपाल, देवेंद्र सिंह, रामबाबू, कमलेश शर्मा, विनोद कुमार, शंकर पाल, श्यामबाबू, रामसेवक, धर्मेेंद्र सिंह, महेश चंद्र, नरेश चंद्र, रामकुमार, अवनीश, शिशुपाल, डोरीलाल समेत तमाम मजदूर मौजूद रहे।
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इनका कहना है
मजदूरों को सेवा प्रदाता कंपनी के जरिए रखा जाता है। मौजूदा दौर में कम उत्पादन के चलते मजदूरों की संख्या कम की गई है। मामले में बातचीत चल रही है।
आरएस तिवारी, यूनिट हेड
मजदूरों को निकाले जाने के मामले में कंपनी के अधिकारियों से बात चल रही है। जल्द ही इसका हल निकाला जाएगा।
पीडी शर्मा, ठेकेदार