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शीतगृह संचालक आलू फेंकने को मजबूर
Updated Tue, 26 Dec 2017 11:28 PM IST
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- फोटो : getty images
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कासगंज। आलू की मंदी ने न केवल आलू उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी, बल्कि शीतगृह संचालकों के सामने भी तमाम परेशानियां खड़ी कर दीं हैं। शीतगृह संचालक जिले भर में 50 हजार बोरी आलू शीतगृह से आलू निकालकर फेंक चुके हैं।
आलू पर पूरे साल ही मंदी की मार छाई रही। करीब 11 लाख बोरी का जिले के शीतगृहों में भंडारण किया गया था, लेकिन आलू की कीमतें नहीं बढ़ी। शुरूआती दौर में ही कुछ बाजार स्थिर रहा तो निकासी चलती रही, लेकिन बाहरी मंडियों में आलू की मांग न निकलने के कारण बाजार गिरता चला गया। परिणामस्वरूप किसान ने आलू की निकासी बंद कर दी।
31 नवंबर को कोल्ड स्टोर का सत्र भी समाप्त हो जाता है। शीतगृह संचालक सत्र समाप्त होने तक आलू की निकासी करने के लिए किसानों को बार-बार सूचना देते रहे, लेकिन किसान आलू निकालने नहीं पहुंचे। क्योंकि आलू की कीमत भंडारण के किराए से आधी थी। ऐसी स्थिति में किसानों ने कोल्डस्टोर में ही अपना आलू छोड़ दिया। आलू न निकलने के कारण शीतगृह संचालक परेशान होने लगे।
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उन्होंने रखे आलू को बेचना शुरू किया तो उन्हें भी पहले 100 रुपये बोरी की कीमत उठाई, लेकिन बाद में यह कीमत 50-60 रुपये बोरी की पहुंच गई। इतनी कम कीमत के बावजूद भी शीतगृहों में 50 हजार बोरी आलू रह गया। जिससे शीतगृह संचालक आलू को इधर उधर फेंकने को मजबूर हो गए। शीतगृह एसोसिएशन के मुकेश शर्मा का कहना है कि जिले में 50 हजार बोरी आलू फेंका गया। इससे शीतगृह संचालकों और किसानों को काफी क्षति हुई है। आलू की ऐसी बर्बादी पहले कभी नहीं हुई थी।
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आलू पर पूरे साल ही मंदी की मार छाई रही। करीब 11 लाख बोरी का जिले के शीतगृहों में भंडारण किया गया था, लेकिन आलू की कीमतें नहीं बढ़ी। शुरूआती दौर में ही कुछ बाजार स्थिर रहा तो निकासी चलती रही, लेकिन बाहरी मंडियों में आलू की मांग न निकलने के कारण बाजार गिरता चला गया। परिणामस्वरूप किसान ने आलू की निकासी बंद कर दी।
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31 नवंबर को कोल्ड स्टोर का सत्र भी समाप्त हो जाता है। शीतगृह संचालक सत्र समाप्त होने तक आलू की निकासी करने के लिए किसानों को बार-बार सूचना देते रहे, लेकिन किसान आलू निकालने नहीं पहुंचे। क्योंकि आलू की कीमत भंडारण के किराए से आधी थी। ऐसी स्थिति में किसानों ने कोल्डस्टोर में ही अपना आलू छोड़ दिया। आलू न निकलने के कारण शीतगृह संचालक परेशान होने लगे।
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उन्होंने रखे आलू को बेचना शुरू किया तो उन्हें भी पहले 100 रुपये बोरी की कीमत उठाई, लेकिन बाद में यह कीमत 50-60 रुपये बोरी की पहुंच गई। इतनी कम कीमत के बावजूद भी शीतगृहों में 50 हजार बोरी आलू रह गया। जिससे शीतगृह संचालक आलू को इधर उधर फेंकने को मजबूर हो गए। शीतगृह एसोसिएशन के मुकेश शर्मा का कहना है कि जिले में 50 हजार बोरी आलू फेंका गया। इससे शीतगृह संचालकों और किसानों को काफी क्षति हुई है। आलू की ऐसी बर्बादी पहले कभी नहीं हुई थी।