{"_id":"59809c424f1c1bf8588b46cd","slug":"11501600834-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"उद्योगपति के अपहरण का खुलासा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उद्योगपति के अपहरण का खुलासा
Updated Tue, 01 Aug 2017 09:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फिरोजाबाद। करोड़ों की देनदारी से बचने के लिए खुद के अपहरण का ड्रामा रचने वाले उद्योगपति संजीव गुप्ता को आखिरकार जेल जाना ही पड़ा। शासन का दबाव रहा हो या फिर खुद की गर्दन बचाने की कोशिश, पुलिस ने बरामदगी के तीसरे दिन संजीव गुप्ता के साथ उसकी पत्नी सारिका, साढ़ू के बेटे विकल्प और साले सागर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
22 जुलाई की शाम से शुरू हुआ अपहरण का ड्रामा शुरू होते ही चर्चा में आ गया। सौ करोड़ की फिरौती मांगे जाने पर सबको शक हुआ। मामला शासन तक पहुंचा तो पुलिस , एसटीएफ और क्राइम ब्रांच के साथ-साथ खुफिया विभाग की टीम ने 28 जुलाई को पानीपत के एक होटल से उसे बरामद कर लिया। इसमें बरामदगी से 24 घंटे पहले आईजी की संजीव की पत्नी से पूछताछ की भी अहम भूमिका रही।
फिर 18 घंटे पूछताछ के बाद संजीव को घर भेज दिया गया तो पुलिस पर भी उंगलियां उठने लगीं। भाजपाइयों ने मुख्यमंत्री और डीजीपी तक मामला पहुंचाया तो शासन से दबाव पड़ने लगा। इस पर तीन दिन तक चली पूछताछ के बाद मंगलवार को पुलिस ने संजीव, सारिका, सागर और विकल्प को आर्चिटग्रीन स्थित कोठी से गिरफ्तार कर लिया। चारों के खिलाफ टूंडला थाने में 419, 420, 467, 468, 469, 471, 500, 507, 120बी, 34, 182, 186 और 187 के तहत रिपोर्ट दर्ज करने के साथ ही जेल भेज दिया।
विज्ञापन
एसएसपी अजय कुमार ने बताया कि संजीव गुप्ता बीसी का धंधा करने के साथ ही सागर रत्ना, एडीफाई स्कूल के साथ दो फैक्ट्रियों में पाटर्नर भी था। उसने बीसी के माध्यम से आम लोगों से करोड़ों रुपये ले रखा था। महंगे शौक के चलते वह रुपये लौटा नहीं पा रहा था। इससे वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था।
एसएसपी ने बताया कि उसने सोचा कि अपहरण का नाटक रचने के साथ ही करोड़ों रुपये की देनदारी से कुछ समय तक बचा जा सकता है। इसके पीछे यह भी मकसद था कि यदि यह नाटक फेल हुआ तो परिवार के साथ विदेश भागकर वहीं पर बस जाएंगे। अपहरण का नाटक फर्जी लगतार देख पुलिस ने संजीव गुप्ता का पासपोर्ट पहले से ही कब्जे में लिया था। इसके चलते यह नाटक और अधिक लंबा चल गया।
विज्ञापन
22 जुलाई की शाम से शुरू हुआ अपहरण का ड्रामा शुरू होते ही चर्चा में आ गया। सौ करोड़ की फिरौती मांगे जाने पर सबको शक हुआ। मामला शासन तक पहुंचा तो पुलिस , एसटीएफ और क्राइम ब्रांच के साथ-साथ खुफिया विभाग की टीम ने 28 जुलाई को पानीपत के एक होटल से उसे बरामद कर लिया। इसमें बरामदगी से 24 घंटे पहले आईजी की संजीव की पत्नी से पूछताछ की भी अहम भूमिका रही।
विज्ञापन
फिर 18 घंटे पूछताछ के बाद संजीव को घर भेज दिया गया तो पुलिस पर भी उंगलियां उठने लगीं। भाजपाइयों ने मुख्यमंत्री और डीजीपी तक मामला पहुंचाया तो शासन से दबाव पड़ने लगा। इस पर तीन दिन तक चली पूछताछ के बाद मंगलवार को पुलिस ने संजीव, सारिका, सागर और विकल्प को आर्चिटग्रीन स्थित कोठी से गिरफ्तार कर लिया। चारों के खिलाफ टूंडला थाने में 419, 420, 467, 468, 469, 471, 500, 507, 120बी, 34, 182, 186 और 187 के तहत रिपोर्ट दर्ज करने के साथ ही जेल भेज दिया।
विज्ञापन
एसएसपी अजय कुमार ने बताया कि संजीव गुप्ता बीसी का धंधा करने के साथ ही सागर रत्ना, एडीफाई स्कूल के साथ दो फैक्ट्रियों में पाटर्नर भी था। उसने बीसी के माध्यम से आम लोगों से करोड़ों रुपये ले रखा था। महंगे शौक के चलते वह रुपये लौटा नहीं पा रहा था। इससे वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था।
एसएसपी ने बताया कि उसने सोचा कि अपहरण का नाटक रचने के साथ ही करोड़ों रुपये की देनदारी से कुछ समय तक बचा जा सकता है। इसके पीछे यह भी मकसद था कि यदि यह नाटक फेल हुआ तो परिवार के साथ विदेश भागकर वहीं पर बस जाएंगे। अपहरण का नाटक फर्जी लगतार देख पुलिस ने संजीव गुप्ता का पासपोर्ट पहले से ही कब्जे में लिया था। इसके चलते यह नाटक और अधिक लंबा चल गया।