{"_id":"5cb21d50bdec22145e482f54","slug":"111555176784-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चुनावी मुद्दा न बन सकीं बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं, लोग मायूस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चुनावी मुद्दा न बन सकीं बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं, लोग मायूस
विज्ञापन
चुनावी मुद्दा न बन सकीं बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं, लोग मायूस
- फोटो : amar ujala
मैनपुरी। जिले की बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं चुनाव में मुद्दा नहीं बन सकीं। पिछले पांच वर्षों में डॉक्टरों की कमी से जूझते रहे अस्पतालों को लेकर किसी भी पार्टी ने आवाज तक नहीं उठाई। लोग परेशान होकर अपनी किस्मत पर कोस रहे हैं।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो एक जिला अस्पताल, एक जिला महिला अस्पताल, एक 100 शैय्या अस्पताल के अतिरिक्त नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 50 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं। कई बार विधायक, सांसद और अन्य नेताओं से डॉक्टरों की तैनाती की मांग की गई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
इसके चलते लोगों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। हृदय रोग विभाग, सीटी स्कैन मशीन आदि में ताला पड़ा रहता है। इसके अतिरिक्त रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने के कारण मेडिकोलीगल जांच आदि के लिए भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना, जिसमें गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को पांच लाख तक के निशुल्क उपचार की व्यवस्था है। स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल को इस योजना से जोड़ा है। जब यहां डॉक्टर ही नहीं हैं तो मरीजों को बेहतर उपचार क्या देंगे। इसके अतिरिक्त जिन पांच अन्य अस्पताल जिन्हें इस योजना से जोड़ा गया है वहां भी प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी है।
विज्ञापन
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो एक जिला अस्पताल, एक जिला महिला अस्पताल, एक 100 शैय्या अस्पताल के अतिरिक्त नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 50 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं। कई बार विधायक, सांसद और अन्य नेताओं से डॉक्टरों की तैनाती की मांग की गई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
विज्ञापन
इसके चलते लोगों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। हृदय रोग विभाग, सीटी स्कैन मशीन आदि में ताला पड़ा रहता है। इसके अतिरिक्त रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने के कारण मेडिकोलीगल जांच आदि के लिए भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना, जिसमें गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को पांच लाख तक के निशुल्क उपचार की व्यवस्था है। स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल को इस योजना से जोड़ा है। जब यहां डॉक्टर ही नहीं हैं तो मरीजों को बेहतर उपचार क्या देंगे। इसके अतिरिक्त जिन पांच अन्य अस्पताल जिन्हें इस योजना से जोड़ा गया है वहां भी प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी है।