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राजधानी में परिवार नियोजन के नाम पर हो रही खानापूर्ति
Lucknow
Updated Wed, 10 Jul 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। ‘नसबंदी कराई तो भारी काम नहीं कर पाऊंगा’। पुरुष नसबंदी पर ऐसी भ्रांतियां दूर करने में स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह फेल रहा है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक लखनऊ में केवल 0.5 प्रतिशत पुरुष नसबंदी हो रही है। परिवार नियोजन के दूसरे माध्यमों की भी बुरी स्थिति है। इसकी वजह से अब लखनऊ जनपद की जनसंख्या 46 लाख के करीब पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों की मानें तो यही हालात रहे तो 2030 तक लखनऊ में रहने की जगह नहीं बचेगी।
जिला स्तरीय स्वास्थ्य सर्वे (डीएलएचएस-3) के आंकड़ों में यह खतरनाक स्थिति सामने आई है। जनसंख्या विस्फोट रोकने के लिए पिछले दस वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद स्थिति खराब ही है। डीएलएचएस-3 की रिपोर्ट बताती है कि लखनऊ में अब भी 99.5 प्रतिशत पुरुष नसबंदी का तरीका नहीं अपना रहे। परिवार नियोजन का अस्थाई उपाय कंडोम की पहुंच भी केवल 11.3 प्रतिशत लोगों तक ही है। 35 प्रतिशत से ज्यादा माता-पिता के तीन से ज्यादा बच्चे पैदा हुए हैं। वहीं, 20 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिनके तीन बच्चे हैं। ऐसे में 55 प्रतिशत परिवार में तीन या उससे ज्यादा बच्चे जनसंख्या बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
परिवार नियोजन पर काम कर रही संस्था यूएचआई की राज्य निदेशक डॉ. मीनाक्षी जैन ने बताया कि अब भी लोगों के मन से भ्रांतियां नहीं निकल रही हैं। उन्हें लगता है कि नसबंदी करवाई तो वे भारी काम नहीं कर पाएंगे। यह गंभीर मुद्दा है क्योंकि हमारे यहां भारी काम करने वालों की तादाद ज्यादा है। महिलाएं भी इसी भ्रंाति की शिकार हैं और उनमें भी नसबंदी का आंकड़ा केवल 18.9 प्रतिशत है जबकि असल में ऐसा नहीं है। नसबंदी करवाने के 24 घंटे बाद से ही सामान्य काम किया जा सकता है। दूसरी ओर धार्मिक वजहें भी परिवार नियोजन के उपायों को अपनाने में आड़े आती हैं। यह भी हकीकत है कि पिछले 8-10 वर्षों में हमारी सरकार परिवार नियोजन पर प्रभावी काम नहीं कर सकी है। इस दौरान बढ़ रही आबादी का ध्यान भी नहीं रखा गया। 19.2 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें न चाहते हुए भी गर्भवती होना पड़ रहा है।
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सर्वे रिपोर्ट : आंकड़ों की जुबानी
- 19.2 प्रतिशत महिलाओं की 18 साल से कम उम्र में शादी हुई
- 52.2 प्रतिशत महिलाओं ने 20-24 साल के बीच दो बच्चों को जन्म दिया
- 47.3 प्रतिशत प्रसव ही अस्पताल में हुए
- 54.5 प्रतिशत तक किसी परिवार नियोजन माध्यम की पहुंच नहीं
- 18.9 प्रतिशत ही महिला नसबंदी हो रही
- 0.5 प्रतिशत पुरुष ही करवा रहे नसबंदी
- 2.8 प्रतिशत में कॉपर-टी या दूसरी आईयूडी लगी
- 11.3 प्रतिशत ने कंडोम का उपयोग किया
स्वास्थ्य सुविधाओं पर एक नजर
04 जिला संयुक्त और दूसरे अस्पताल
03 महिला अस्पताल
09 सीएचसी
09 बाल एवं महिला अस्पताल
01 मेडिकल कॉलेज
05 ईएसआई अस्पताल
लखनऊ में जनसंख्या विस्फोट
जनगणना 1991 : 27,62,801
जनगणना 2001 : 36,47,834
जनगणना 2011 : 45,89,838
वर्जन
बच्चा पैदा करने के लिए योग्य माता-पिता का जिलेवार रजिस्टर बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। सभी सीएमओ की यह जिम्मेदारी होगी कि इसकी जानकारी अपडेट की जाए। इसी आधार पर परिवार नियोजन की योजना को प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा।
- डॉ. वीपी गुप्ता, महानिदेशक, परिवार कल्याण निदेशालय
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जिला स्तरीय स्वास्थ्य सर्वे (डीएलएचएस-3) के आंकड़ों में यह खतरनाक स्थिति सामने आई है। जनसंख्या विस्फोट रोकने के लिए पिछले दस वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद स्थिति खराब ही है। डीएलएचएस-3 की रिपोर्ट बताती है कि लखनऊ में अब भी 99.5 प्रतिशत पुरुष नसबंदी का तरीका नहीं अपना रहे। परिवार नियोजन का अस्थाई उपाय कंडोम की पहुंच भी केवल 11.3 प्रतिशत लोगों तक ही है। 35 प्रतिशत से ज्यादा माता-पिता के तीन से ज्यादा बच्चे पैदा हुए हैं। वहीं, 20 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिनके तीन बच्चे हैं। ऐसे में 55 प्रतिशत परिवार में तीन या उससे ज्यादा बच्चे जनसंख्या बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
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परिवार नियोजन पर काम कर रही संस्था यूएचआई की राज्य निदेशक डॉ. मीनाक्षी जैन ने बताया कि अब भी लोगों के मन से भ्रांतियां नहीं निकल रही हैं। उन्हें लगता है कि नसबंदी करवाई तो वे भारी काम नहीं कर पाएंगे। यह गंभीर मुद्दा है क्योंकि हमारे यहां भारी काम करने वालों की तादाद ज्यादा है। महिलाएं भी इसी भ्रंाति की शिकार हैं और उनमें भी नसबंदी का आंकड़ा केवल 18.9 प्रतिशत है जबकि असल में ऐसा नहीं है। नसबंदी करवाने के 24 घंटे बाद से ही सामान्य काम किया जा सकता है। दूसरी ओर धार्मिक वजहें भी परिवार नियोजन के उपायों को अपनाने में आड़े आती हैं। यह भी हकीकत है कि पिछले 8-10 वर्षों में हमारी सरकार परिवार नियोजन पर प्रभावी काम नहीं कर सकी है। इस दौरान बढ़ रही आबादी का ध्यान भी नहीं रखा गया। 19.2 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें न चाहते हुए भी गर्भवती होना पड़ रहा है।
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सर्वे रिपोर्ट : आंकड़ों की जुबानी
- 19.2 प्रतिशत महिलाओं की 18 साल से कम उम्र में शादी हुई
- 52.2 प्रतिशत महिलाओं ने 20-24 साल के बीच दो बच्चों को जन्म दिया
- 47.3 प्रतिशत प्रसव ही अस्पताल में हुए
- 54.5 प्रतिशत तक किसी परिवार नियोजन माध्यम की पहुंच नहीं
- 18.9 प्रतिशत ही महिला नसबंदी हो रही
- 0.5 प्रतिशत पुरुष ही करवा रहे नसबंदी
- 2.8 प्रतिशत में कॉपर-टी या दूसरी आईयूडी लगी
- 11.3 प्रतिशत ने कंडोम का उपयोग किया
स्वास्थ्य सुविधाओं पर एक नजर
04 जिला संयुक्त और दूसरे अस्पताल
03 महिला अस्पताल
09 सीएचसी
09 बाल एवं महिला अस्पताल
01 मेडिकल कॉलेज
05 ईएसआई अस्पताल
लखनऊ में जनसंख्या विस्फोट
जनगणना 1991 : 27,62,801
जनगणना 2001 : 36,47,834
जनगणना 2011 : 45,89,838
वर्जन
बच्चा पैदा करने के लिए योग्य माता-पिता का जिलेवार रजिस्टर बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। सभी सीएमओ की यह जिम्मेदारी होगी कि इसकी जानकारी अपडेट की जाए। इसी आधार पर परिवार नियोजन की योजना को प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा।
- डॉ. वीपी गुप्ता, महानिदेशक, परिवार कल्याण निदेशालय