{"_id":"124-60171","slug":"Lucknow-60171-124","type":"story","status":"publish","title_hn":"शनैश्चरी अमावस्या, वट सावित्री व्रत आज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शनैश्चरी अमावस्या, वट सावित्री व्रत आज
Lucknow
Updated Sat, 08 Jun 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर शनिवार को नगर के मंदिरों में सुबह से शाम तक भक्त उमड़ेंगे। महिलाएं वट सावित्री का व्रत कर वट वृक्ष को रक्षासूत्र बांधकर पति की दीर्घायु की मंगलकामना करेंगी। जबकि शनि की कृपादृष्टि पाने के लिए भक्त शनि मंदिरों में जाकर उनकी विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। राणा प्रताप मार्ग स्थित शनिदेव मंदिर, कल्याण गिरि मंदिर स्थित शनि देव मंदिर, निशातगंज बंधा मार्ग स्थित शनि मंदिर समेत शहर के तमाम शनि मंदिरों में दिनभर शनि महाराज की पूजा-अर्चना के साथ तेलाभिषेक होगा।
महानगर निवासी आचार्य प्रदीप ने बताया कि शुक्रवार की शाम 6 बजे के बाद से अमावस्या का मान शुरू हो जाएगा। अमावस्या शनिवार की शाम 7 बजे के बाद तक रहेगी। उन्होंने बताया कि जेठ माह की अमावस्या पर सुहागिन महिलाएं अमर सुहाग की मंगलकामना के लिए वट सावित्री का व्रत रखेंगी। सुबह से ही निर्जल व्रत रहकर महिलाएं और नई दुल्हनें वट वृक्ष को रक्षासूत्र बांधकर 108 से अधिक फेरे कर खरबूजा, आटे के बरगद, चना, दाल चढ़ाने के बाद सावित्री की कथा सुन कर विश्वास के प्रतीक वट वृक्ष से पति की दीर्घायु की मंगलकामना करेंगी। इसके बाद बरगद, पेड़ की गटिया और मिष्ठान्न से व्रत का पारण करेंगी। आचार्य ने बताया कि इसी दिन दान-पुण्य की शनि अमावस्या भी मनाई जाएगी। मान्यता के मुताबिक शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या पर शनि मंदिर में दान-पुण्य कर शनि देव के दर्शन करना विशेष फलदायी रहता है। दर्शन के साथ ही भगवान के सामने सरसों के तेल के सात दीपक जलाने चाहिए। इसके अलावा जिनके गृह खराब चल रहे हों उन्हें कम से कम 108 दीपों की दीपमाला शनि देव को चढ़ानी चाहिए। काले तिल, काला छाता, नीले वस्त्र, पादुकाएं और लौह धातु दान करने के अलावा गरीब को भोजन कराना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस बार कई सालों बाद शनि अमावस्या पर महायोग मिल रहा है। चूंकि ज्येष्ठ माह की अमावस्या, रोहिणी नक्षत्र और शनिवार को ही शनि देव का जन्म माना जाता है। शनिवार को ये तीनों योग साथ मिल रहे हैं।
विज्ञापन
महानगर निवासी आचार्य प्रदीप ने बताया कि शुक्रवार की शाम 6 बजे के बाद से अमावस्या का मान शुरू हो जाएगा। अमावस्या शनिवार की शाम 7 बजे के बाद तक रहेगी। उन्होंने बताया कि जेठ माह की अमावस्या पर सुहागिन महिलाएं अमर सुहाग की मंगलकामना के लिए वट सावित्री का व्रत रखेंगी। सुबह से ही निर्जल व्रत रहकर महिलाएं और नई दुल्हनें वट वृक्ष को रक्षासूत्र बांधकर 108 से अधिक फेरे कर खरबूजा, आटे के बरगद, चना, दाल चढ़ाने के बाद सावित्री की कथा सुन कर विश्वास के प्रतीक वट वृक्ष से पति की दीर्घायु की मंगलकामना करेंगी। इसके बाद बरगद, पेड़ की गटिया और मिष्ठान्न से व्रत का पारण करेंगी। आचार्य ने बताया कि इसी दिन दान-पुण्य की शनि अमावस्या भी मनाई जाएगी। मान्यता के मुताबिक शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या पर शनि मंदिर में दान-पुण्य कर शनि देव के दर्शन करना विशेष फलदायी रहता है। दर्शन के साथ ही भगवान के सामने सरसों के तेल के सात दीपक जलाने चाहिए। इसके अलावा जिनके गृह खराब चल रहे हों उन्हें कम से कम 108 दीपों की दीपमाला शनि देव को चढ़ानी चाहिए। काले तिल, काला छाता, नीले वस्त्र, पादुकाएं और लौह धातु दान करने के अलावा गरीब को भोजन कराना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस बार कई सालों बाद शनि अमावस्या पर महायोग मिल रहा है। चूंकि ज्येष्ठ माह की अमावस्या, रोहिणी नक्षत्र और शनिवार को ही शनि देव का जन्म माना जाता है। शनिवार को ये तीनों योग साथ मिल रहे हैं।
विज्ञापन