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कर्ज के बहाने लाखों ठगे ः हत्थे चढ़े चार जालसाज
Lucknow
Updated Sun, 21 Apr 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। साइबर क्राइम सेल ने शनिवार दोपहर चार जालसाजों को गिरफ्तार कर कर्ज के बहाने लाखों की ठगी के धंधे का भंडाफोड़ किया है। जालसाजों के कब्जे से दो लग्जरी गाड़ियों समेत लाखों का माल बरामद हुआ है। गिरोह ने सिर्फ एक प्रतिशत ब्याज पर कर्ज का इश्तहार छपवाकर विभिन्न जिलों के पचास से अधिक लोगों को शिकार बनाया था। दो लाख की ठगी का शिकार बने एक व्यक्ति ने गुडंबा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सीओ हजरतगंज दिनेश यादव ने बताया कि इंदिरानगर के सेक्टर-11 निवासी हरीश कुमार से कर्ज के बहाने 1.94 लाख की ठगी की जांच कर रही साइबर क्राइम सेल व गुडंबा पुलिस की संयुक्त टीम ने कृष्णानगर के हिंदनगर निवासी अनिल कुमार सिंह, बहराइच के मोतीपुर थाने के गांव पेटरहा निवासी संजय शर्मा, धनंजय यादव व प्रतापगढ़ के मनधाता थाने के राजगढ़ निवासी सुधांशु चतुर्वेदी को गिरफ्तार कर दो लग्जरी कार, बाइक, 15 एटीएम व पैनकार्ड, विभिन्न बैंकों की नौ चेकबुक, चार पासबुक, दर्जन भर फोन व सेलफोन, सिमकार्ड सहित अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं।
ऐसे देता था झांसा ः लखनऊ विश्वविद्यालय से बीए ऑनर्स की डिग्री ले चुका संजय शर्मा गिरोह का सरगना था। उसने मैगनम फाइनेंस के नाम से विभिन्न बिजनेस प्रोजेक्टों के लिए मार्कशीट या जमीन पर कर्ज का लुभावना विज्ञापन छपवाता था। इसमें सिर्फ एक प्रतिशत ब्याज पर कर्ज दिलाने का वादा होता था। इसके अलावा एक प्रतिशत ब्याज में भी 50 प्रतिशत की छूट का जिक्र करता था। झांसे में आए व्यक्ति को अलग-अलग बहाने करके किश्तों में ठगी का शिकार बनाता था।
विश्वास जमाकर की ठगी ः 1.94 लाख की ठगी का शिकार बने हरीश कुमार ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अखबार में मैगनम फाइनेंस का वर्गीकृत विज्ञापन पढ़ा। सिर्फ एक प्रतिशत ब्याज पर कर्ज का ऑफर पढ़कर उन्होंने विज्ञापन में छपा मोबाइल नंबर डायल किया। सोमेश प्रताप नामक व्यक्ति से बात हुई। उसने एक प्रतिशत ब्याज में भी 50 प्रतिशत की छूट के ऑफर की जानकारी देते हुए रजिस्ट्रेशन कराने को कहा। इसके लिए उसने एसबीआई की मुंशी पुलिया शाखा के एक खाते का नंबर बताते हुए तीन हजार रुपए जमा करने के निर्देश दिए। हरीश ने 29 जनवरी को रकम जमा कर दी। इसके बाद 13 फरवरी को सोमेश ने उसे फोन कर फाइल तैयार होने की जानकारी दी और एग्रीमेंट के लिए एक प्रतिशत स्टांप ड्यूटी के रूप में 35 हजार रुपए जमा करने को कहा। हरीश ने सोमेश के बताए एसबीआई के दूसरे खाते में रकम जमा कर दी। इसके बाद सोमेश ने विभिन्न बहानों से एसबीआई में इमरान के खाते में 20 हजार व पीएनबी में सतीश मिश्रा के अकाउंट में 15 हजार रुपए जमा कराए। इसके साथ फोन पर लगातार संपर्क में बना रहा। हरीश के मुताबिक, 18 फरवरी को एक महिला ने फोन कर कर्ज स्वीकृत होने की जानकारी देते हुए कहा कि रकम का बीमा होना है। इसके लिए 1.5 प्रतिशत यानी 1.05 लाख रुपए जमा करने होंगे। हरीश को रकम की व्यवस्था करने में चार दिन लग गए। उन्होंने 22 फरवरी को रंजीत मिश्रा के खाते में 54500 व सतीश मिश्रा के खाते में 50 हजार रुपए जमा कर दिए। तीसरे दिन 25 फरवरी को सोमेश ने फोन कर सर्विस टैक्स के 17 हजार रुपए जमा कर कर्ज की रकम का ड्राफ्ट लेने के लिए तहसील गेट पर पहुंचने को कहा। हरीश ने आननफानन में सतीश मिश्रा के खाते में रुपए जमा किए और तहसील गेट पर जा पहुंचा। घंटों इंतजार करने के साथ जालसाजों के नंबर डायल करता रहा लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। अगले दिन सभी नंबर बंद हो गए। ठगी का अहसास होने पर हरीश कुमार ने गुडंबा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके साथ उसने साइबर क्राइम सेल में प्रार्थनापत्र दिया था।
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इन्हें भी बनाया शिकार ः जालसाजों से पूछताछ व बरामद दस्तावेजों की पड़ताल के बाद पुलिस ने बताया कि गिरोह ने हरीश कुमार की तरह जौनपुर के चंद्रभान, आजमगढ़ के विजय शंकर पांडेय, फरहत हुसैन, महाराजगंज के हीरालाल यादव, कवींद्रनाथ यादव, कलक्टर यादव, बाराबंकी के गौरव, बिहारी लाल, अमरेंद्र कुमार, आलोक कुमार, प्रतापगढ़ के राजेंद्र प्रताप, सुल्तानपुर के विजय शुक्ला, सतीश शुक्ला, मेंहदी हसन, अंबेडकरनगर के राकेश यादव, गोरखपुर के सचिन सिंह, भागवत गुप्ता, उन्नाव के उमाशंकर, सरीला गुप्ता, अमर सिंह, देवरिया के राहुल पांडेय, कानपुर के राजेंद्र शंखवार, अशोक यादव, रायबरेली की सावित्री सिंह, एटा के जितेंद्र पाल, बांदा के राम नारायण, वाराणसी के सुरेश वर्मा, सुल्तानपुर के सरोज विश्वकर्मा व फर्रुखाबाद के मनोज कुमार को भी एक प्रतिशत ब्याज पर कर्ज का झांसा देकर ठगी का शिकार बनाया था। इन लोगों से संपर्क किया जा रहा है।
शानदार फ्लैट में रह रहा था सरगना ः गिरोह का सरगना संजय शर्मा हुसैनगंज के लालकुआं स्थित एक अपार्टमेंट में शानदार फ्लैट में रह रहा था। उसने फर्जी आईडी तैयार कर अपने साथियों के नाम से पैनकार्ड बनवाकर खाते खुलवा रखे थे। एक फाइनेंस कंपनी में नौकरी के दौरान उसने जालसाजी के गुर सीखे थे। इस दौरान उसने एक एनजीओ में नौकरी करने वाले अनिल सिंह से दोस्ती की और गिरोह बनाकर ठगी करने लगा।
पुलिस टीम को इनाम ः सीओ हजरतगंज ने बताया कि एसएसपी ने चार जालसाजों को गिरफ्तार करके गिरोह का पर्दाफाश करने वाली टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है। टीम में साइबर क्राइम सेल के एसआई परमहंस गुप्ता, विजयवीर सिरोही, रत्नेश पांडेय, कांस्टेबल फिरोज व अखिलेश के साथ एसओ गुडंबा जगदीश यादव व विवेचक कुंवर बहादुर सिंह शामिल हैं।
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ऐसे देता था झांसा ः लखनऊ विश्वविद्यालय से बीए ऑनर्स की डिग्री ले चुका संजय शर्मा गिरोह का सरगना था। उसने मैगनम फाइनेंस के नाम से विभिन्न बिजनेस प्रोजेक्टों के लिए मार्कशीट या जमीन पर कर्ज का लुभावना विज्ञापन छपवाता था। इसमें सिर्फ एक प्रतिशत ब्याज पर कर्ज दिलाने का वादा होता था। इसके अलावा एक प्रतिशत ब्याज में भी 50 प्रतिशत की छूट का जिक्र करता था। झांसे में आए व्यक्ति को अलग-अलग बहाने करके किश्तों में ठगी का शिकार बनाता था।
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विश्वास जमाकर की ठगी ः 1.94 लाख की ठगी का शिकार बने हरीश कुमार ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अखबार में मैगनम फाइनेंस का वर्गीकृत विज्ञापन पढ़ा। सिर्फ एक प्रतिशत ब्याज पर कर्ज का ऑफर पढ़कर उन्होंने विज्ञापन में छपा मोबाइल नंबर डायल किया। सोमेश प्रताप नामक व्यक्ति से बात हुई। उसने एक प्रतिशत ब्याज में भी 50 प्रतिशत की छूट के ऑफर की जानकारी देते हुए रजिस्ट्रेशन कराने को कहा। इसके लिए उसने एसबीआई की मुंशी पुलिया शाखा के एक खाते का नंबर बताते हुए तीन हजार रुपए जमा करने के निर्देश दिए। हरीश ने 29 जनवरी को रकम जमा कर दी। इसके बाद 13 फरवरी को सोमेश ने उसे फोन कर फाइल तैयार होने की जानकारी दी और एग्रीमेंट के लिए एक प्रतिशत स्टांप ड्यूटी के रूप में 35 हजार रुपए जमा करने को कहा। हरीश ने सोमेश के बताए एसबीआई के दूसरे खाते में रकम जमा कर दी। इसके बाद सोमेश ने विभिन्न बहानों से एसबीआई में इमरान के खाते में 20 हजार व पीएनबी में सतीश मिश्रा के अकाउंट में 15 हजार रुपए जमा कराए। इसके साथ फोन पर लगातार संपर्क में बना रहा। हरीश के मुताबिक, 18 फरवरी को एक महिला ने फोन कर कर्ज स्वीकृत होने की जानकारी देते हुए कहा कि रकम का बीमा होना है। इसके लिए 1.5 प्रतिशत यानी 1.05 लाख रुपए जमा करने होंगे। हरीश को रकम की व्यवस्था करने में चार दिन लग गए। उन्होंने 22 फरवरी को रंजीत मिश्रा के खाते में 54500 व सतीश मिश्रा के खाते में 50 हजार रुपए जमा कर दिए। तीसरे दिन 25 फरवरी को सोमेश ने फोन कर सर्विस टैक्स के 17 हजार रुपए जमा कर कर्ज की रकम का ड्राफ्ट लेने के लिए तहसील गेट पर पहुंचने को कहा। हरीश ने आननफानन में सतीश मिश्रा के खाते में रुपए जमा किए और तहसील गेट पर जा पहुंचा। घंटों इंतजार करने के साथ जालसाजों के नंबर डायल करता रहा लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। अगले दिन सभी नंबर बंद हो गए। ठगी का अहसास होने पर हरीश कुमार ने गुडंबा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके साथ उसने साइबर क्राइम सेल में प्रार्थनापत्र दिया था।
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इन्हें भी बनाया शिकार ः जालसाजों से पूछताछ व बरामद दस्तावेजों की पड़ताल के बाद पुलिस ने बताया कि गिरोह ने हरीश कुमार की तरह जौनपुर के चंद्रभान, आजमगढ़ के विजय शंकर पांडेय, फरहत हुसैन, महाराजगंज के हीरालाल यादव, कवींद्रनाथ यादव, कलक्टर यादव, बाराबंकी के गौरव, बिहारी लाल, अमरेंद्र कुमार, आलोक कुमार, प्रतापगढ़ के राजेंद्र प्रताप, सुल्तानपुर के विजय शुक्ला, सतीश शुक्ला, मेंहदी हसन, अंबेडकरनगर के राकेश यादव, गोरखपुर के सचिन सिंह, भागवत गुप्ता, उन्नाव के उमाशंकर, सरीला गुप्ता, अमर सिंह, देवरिया के राहुल पांडेय, कानपुर के राजेंद्र शंखवार, अशोक यादव, रायबरेली की सावित्री सिंह, एटा के जितेंद्र पाल, बांदा के राम नारायण, वाराणसी के सुरेश वर्मा, सुल्तानपुर के सरोज विश्वकर्मा व फर्रुखाबाद के मनोज कुमार को भी एक प्रतिशत ब्याज पर कर्ज का झांसा देकर ठगी का शिकार बनाया था। इन लोगों से संपर्क किया जा रहा है।
शानदार फ्लैट में रह रहा था सरगना ः गिरोह का सरगना संजय शर्मा हुसैनगंज के लालकुआं स्थित एक अपार्टमेंट में शानदार फ्लैट में रह रहा था। उसने फर्जी आईडी तैयार कर अपने साथियों के नाम से पैनकार्ड बनवाकर खाते खुलवा रखे थे। एक फाइनेंस कंपनी में नौकरी के दौरान उसने जालसाजी के गुर सीखे थे। इस दौरान उसने एक एनजीओ में नौकरी करने वाले अनिल सिंह से दोस्ती की और गिरोह बनाकर ठगी करने लगा।
पुलिस टीम को इनाम ः सीओ हजरतगंज ने बताया कि एसएसपी ने चार जालसाजों को गिरफ्तार करके गिरोह का पर्दाफाश करने वाली टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है। टीम में साइबर क्राइम सेल के एसआई परमहंस गुप्ता, विजयवीर सिरोही, रत्नेश पांडेय, कांस्टेबल फिरोज व अखिलेश के साथ एसओ गुडंबा जगदीश यादव व विवेचक कुंवर बहादुर सिंह शामिल हैं।