{"_id":"124-54720","slug":"Lucknow-54720-124","type":"story","status":"publish","title_hn":"ग्रीन टी और गाजर-चुकंदर खाएं दिमाग को स्वस्थ रखें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ग्रीन टी और गाजर-चुकंदर खाएं दिमाग को स्वस्थ रखें
Lucknow
Updated Mon, 18 Mar 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। दुर्घटना में घायल मरीज के लिए शुरुआती एक घंटा ‘गोल्डेन ऑवर’ बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान मरीज की गंभीर चोटों का पता लगाकर तुरंत इलाज उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण सिर की चोट है। यदि सिर के चोट के मरीज को एक घंटे के अंदर समुचित इलाज मिल जाए तो उसकी जान बचायी जा सकती है। मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज के डॉ. संजीव दुआ ने यह जानकारी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में चल रहे न्यूरोकॉन-2013 में दी।
डॉ. संजीव दुआ ने बताया कि सिर की चोट में सीटी स्कैन से अंदर की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। इसके बाद ही इसमें न्यूरो सर्जन की भूमिका तय की जा सकती है। ओपोलो हॉस्पिटल के डॉ. मुकुल वर्मा ने बताया कि एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थों का प्रयोग करने से पर्किसन से बचा जा सकता है। रंग-बिरंगे फलों, गाजर व चुकंदर में एंटी ऑक्सीडेंट की उपलब्धता सबसे अधिक होती है। ग्रीन-टी भी पार्किंसन रोग पर काबू पाने में अपनी भूमिका रखती है। क्वांच की फली में भी डोपामीन अधिक मात्रा में होता है। इसलिए इलाज के लिए विशेषज्ञ क्वांच की फली का प्रयोग अधिक करने की सलाह देते हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल की पैथोलॉजी विभाग की हेड प्रो. नुजहर हुसैन ने बताया कि मिर्गी बीमारी फीताकर्मी के अंडे के दिमाग में पहुंच जाने के कारण हो जाती है। गंदा पानी पीने और सुअर का अधपका मांस खाने से फीताकृमि पेट में चला जाता है। शाकाहारी लोगों में ये इस कीड़े का अंडा सलाद के साथ पेट में पहुंचता है। सलाद में शमिल सब्जियां और बंद गोभी इस कीड़े के अंडे को शाकाहारी लोगों तक पहुंचने का सबसे आसान कारण हैं। पेट से फीताकृति का अंडा दिमाग में चला जाता है। जहां अंडा कैल्सिफिकेशन पैदा करता है। उस हिस्से में संक्रमण हो जाता है। इसी के बाद मरीज को मिर्गी के दौरे पड़ने लगते हैं। इस बीमारी का इलाज वर्तमान में संभव है। इस मौके पर कुलपति प्रो. डीके गुप्ता ने न्यूरोलॉजी विभाग की स्थापना करने वाली प्रो. देविका नाग को सम्मानित किया। कार्यक्रम में न्यूरोलॉजी विभाग के हेड प्रो. आर.के. गर्ग, डॉ. मनीष सिंह आदि भी मौजूद थे।
विज्ञापन
डॉ. संजीव दुआ ने बताया कि सिर की चोट में सीटी स्कैन से अंदर की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। इसके बाद ही इसमें न्यूरो सर्जन की भूमिका तय की जा सकती है। ओपोलो हॉस्पिटल के डॉ. मुकुल वर्मा ने बताया कि एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थों का प्रयोग करने से पर्किसन से बचा जा सकता है। रंग-बिरंगे फलों, गाजर व चुकंदर में एंटी ऑक्सीडेंट की उपलब्धता सबसे अधिक होती है। ग्रीन-टी भी पार्किंसन रोग पर काबू पाने में अपनी भूमिका रखती है। क्वांच की फली में भी डोपामीन अधिक मात्रा में होता है। इसलिए इलाज के लिए विशेषज्ञ क्वांच की फली का प्रयोग अधिक करने की सलाह देते हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल की पैथोलॉजी विभाग की हेड प्रो. नुजहर हुसैन ने बताया कि मिर्गी बीमारी फीताकर्मी के अंडे के दिमाग में पहुंच जाने के कारण हो जाती है। गंदा पानी पीने और सुअर का अधपका मांस खाने से फीताकृमि पेट में चला जाता है। शाकाहारी लोगों में ये इस कीड़े का अंडा सलाद के साथ पेट में पहुंचता है। सलाद में शमिल सब्जियां और बंद गोभी इस कीड़े के अंडे को शाकाहारी लोगों तक पहुंचने का सबसे आसान कारण हैं। पेट से फीताकृति का अंडा दिमाग में चला जाता है। जहां अंडा कैल्सिफिकेशन पैदा करता है। उस हिस्से में संक्रमण हो जाता है। इसी के बाद मरीज को मिर्गी के दौरे पड़ने लगते हैं। इस बीमारी का इलाज वर्तमान में संभव है। इस मौके पर कुलपति प्रो. डीके गुप्ता ने न्यूरोलॉजी विभाग की स्थापना करने वाली प्रो. देविका नाग को सम्मानित किया। कार्यक्रम में न्यूरोलॉजी विभाग के हेड प्रो. आर.के. गर्ग, डॉ. मनीष सिंह आदि भी मौजूद थे।
विज्ञापन