फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   बदली जीवनशैली से कमजोर हो रहे युवाओं के घुटने

बदली जीवनशैली से कमजोर हो रहे युवाओं के घुटने

Sun, 10 Mar 2013 05:30 AM IST
Lucknow
Lucknow Updated Sun, 10 Mar 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
लखनऊ। भारत में अब तक पचास या साठ वर्ष की उम्र में होने वाली आर्थराइटिस (गठिया) अब 25 से 35 वर्ष की उम्र के युवाओं को भी हो रही है। फलस्वरूप उन्हें घुटना प्रत्यारोपण कराना पड़ता है। खानपान व बदली जीवन शैली के चलते युवाओं के घुटने कमजोर हो रहे हैं। लेकिन मेडिकल साइंस में ऐसी तकनीकें आ गई हैं जिससे लोगों को काफी फायदा होगा। यह कहना है जाने-माने अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ. नीतिराज ओबेरॉय का। वे शनिवार को लखनऊ के दौरे पर थे। डॉ. ओबेरॉय ने बताया कि एक्सीडेंट्स के अलावा खेलकूद के दौरान बचपन में आई चोटों की वजह से भी युवाओं में ऑर्थराइटिस विशेषकर घुटनों की समस्याएं बढ़ रही हैं। ट्रॉमा के मामलों में जोड़ों पर आई चोट को गंभीरता से नहीं लेना भी इसकी एक बड़ी वजह है। वहीं एकल परिवार बढ़ने और प्रेशर भरी लाइफ स्टाइल की वजह से घुटनों में दर्द होने के बावजूद युवा अपने लिए समय नहीं निकाल पा रहे। घर के कामों में अक्सर चिकित्सक को दिखाने में देर हो जाती है। 2 से 4 साल पुरानी चोटों में जहां लिग्मेंट को नुकसान हो चुका होता है तो बहुत पुरानी चोटों में जोड़ घिसने तक की नौबत आ जाती है। वे बताते हैं कि इलाज के लिए बेहतर है कि जल्द अस्थिरोग विशेषज्ञ से संपर्क किया जाए। उन्हाेंने बताया कि आर्थराइटिस कोई एक बीमारी नहीं है बल्कि अस्थियों से जुड़ी 100 से अधिक समस्याओं का समूह है।
विज्ञापन

नया उपयोगी इलाज ः 30 साल तक चलने वाली मोजेक प्लास्टी : अस्थियों के जोड़ में मौजूद पॉलिश के घिसने पर हाईलाइन कार्टिलेज खत्म होने लगते हैं। ऐसे में सिर्फ इन्हें बदलकर काम चलाया जा सकता है। इनका काम वजन संभालना है। हम जब बैठे होते हैं तब इन पर हमारे शरीर के वजन का सात गुना जोर पड़ता है और खड़े होने पर 14 गुना। लेकिन इनमें चूंकि ये मांसपेशियां नहीं होती, इसलिए दर्द भी नहीं होता। इन्हीं कार्टिलेज की जगह पर मोजेक प्लास्टी की जाती है, जिसमें अस्थियों पर सेरेमिक कोटिंग की जाती है। ये 25 से 30 साल तक बनी रहती हैं। इसमें प्रति घुटना 40 से 50 हजार रुपये का खर्च आता है।
विज्ञापन

विस्को-सप्लीमेंट इंजेक्शन : इनके जरिए घुटनों के जोड़ में पैदा हुए गैप को ग्रीस से भरा जाता है। यह इलाज ऐसे लोगों केे लिए उपयोगी साबित हो रहा है जो अधिक उम्र या किसी अन्य समस्या की वजह से सर्जरी नहीं करवा सकते। तीन इंजेक्शन का इलाज करीब 6 हजार रुपए का आता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रोबोट बदलता है घुटना : रोबोटिक नी-सर्जरी नामक इस नए इलाज में सटीकता का फायदा मिलता है। डॉ. ओबराय के अनुसार घुटना प्रत्यारोपण और सर्जरी में सटीकता पर ही 90 प्रतिशत सफलता निर्भर करती है। रोबोट द्वारा घुटने की सर्जरी में फायदा ये है कि इससे शरीर की जरूरी नर्व और मांसपेशियां नहीं कटती जो आमतौर पर मानवीय गलती से कट सकती हैं। यह बेहद सटीकता और छोटे कट से अस्थियों को काट कर अलग करता है। इसके बाद मानव निर्मित अस्थि लगाई जाती है।

महिला पुरुष के घुटने भी अलग-अलग : सुनने पर थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन सच्चाई यही है कि महिला और पुरुष के घुटनों की बनावट अलग-अलग होती है। ऐसे में सीटी स्कैन, एमआरआई और अन्य जांचों के जरिए बनावट को जांचने परखने के बाद सर्जरी की जाती है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के लिए कृत्रिम घुटने करीब 20 प्रतिशत तक महंगे होते हैं। वहीं महिलाओं में ऑर्थराइटिस की संभावना भी तीन गुना अधिक होती है।

भोजन जो मजबूत करेगा हड्डियां
- अस्थियों की मजबूती के लिए कैल्शियम से भरपूर चीजें खाएं, जैसे दूध और सब्जियां।
- कार्टिलेज और लिग्मेंट्स की मजबूती के लिए जे़थिन तत्व की मौजूदगी वाले खाद्य पदार्थ लें। ये लाल रंग के होते हैं जैसे गाजर, शलगम, टमाटर, व अन्य फल।
- विटामिन-सी और डी से भरा भोजन अस्थियों के लिए उपयुक्त होता है जैसे नींबू, अमरूद, पपीता आदि।
- गहरे रंग वाली शराब, लाल मांस, पनीर, टमाटर के बीज आदि के सेवन से बचें।

फैक्ट्स एंड फिगर्स
- 2,000 लोगों का रोज देश में घुटना प्रत्यारोपण हो रहा है।
- माना जा रहा है कि एक दशक बाद ऑर्थराइटिस देश में सभी को कभी न कभी प्रभावित करेगा।
- इस वक्त 70 वर्ष से अधिक उम्र के 40 प्रतिशत बुजुर्ग ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित हैं।
- वहीं करीब 7 करोड़ लोगों को घुटने के जोड़ों की विभिन्न समस्याएं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed