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सर्जरी से होगा फीकल इंकान्टिनेंस का इलाज
Lucknow
Updated Mon, 04 Mar 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। महिलाओं को प्रसव के बाद फीकल इंकान्टिनेंस की दिक्कत हो सकती है। इस बीमारी में मल अपने आप निकल जाता है। हालांकि सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट ने इसे दूर करने का तरीका ढूंढ़ निकाला है। एसजीपीजीआई के सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के डॉ. अशोक कुमार और डॉ. आनंद प्रकाश ने रविवार को यह जानकारी दी। वे 18वें एसजीई वीक में प्रॉक्टोलॉजी-मलद्वार की बीमारियों पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि महिलाओं में प्रसव के बाद फीकल इंकान्टिनेंस की दिक्कत हो सकती है। प्रसव के दौरान अधिक ताकत लगाने से मलद्वार का स्फिंस्टर क्षतिग्रस्त हो जाता है। ये स्फिंस्टर ही मल को बाहर निकलने से रोकता है और क्षतिग्रस्त होने पर कार्य नहीं करता। ऐसे में हंसने, गैस पास होने या फिर खांसने, छींकने के साथ मल बाहर आ जाता है। इससे महिला की सामाजिक गतिविधियां लगभग ठप हो जाती हैं, लेकिन इसे दूर करने का तरीका ढूंढ़ निकाला गया है और सर्जरी कर इस दिक्कत से निजात दिलाई जा सकती है। डॉ. आनंद प्रकाश ने बताया कि स्फिंस्टर की स्थिति देखने के लिए महिला की मेनोमेट्री जांच की जाती है। इससे पता चल जाता है कि यह कितना क्षतिग्रस्त हुआ है। यदि स्फिंस्टर थोड़ा भी सुरक्षित होता है तो उसे ठीक किया जा सकता है। इसमें जांघ से ग्रेसलिस मसल्स लेकर उससे स्फिंस्टर बनाते हैं। इसके बाद उसे इलेक्ट्रोड से करंट देकर संकुचन करने लायक बना दिया जाता है, जिससे मसल्स असली स्फिंस्टर की तरह ही कार्य कर सके।
डॉ. आनंद प्रकाश ने बताया कि महिलाओं को एक और बीमारी ऑब्सट्रेक्टेड डिफिकेशन सिंड्रोम-ओडीएस भी हो सकती है। इसमें बच्चेदानी या मूत्राशय पेट में स्थित डायाफ्राम में दिक्कत के कारण शौच के समय ताकत लगाने से नीचे आ जाता है। ये अंग सीधे मलद्वार बंद कर देते हैं। ऐसे में मरीज को लगता है कि वो कब्ज का शिकार है और कई तरह की दवाएं करता रहता है, जबकि मल त्याग न करने का कारण अंगों का नीचे खिसक आना होता है। इसमें भी सर्जरी से अंगों को सही स्थिति में लाया जाता है। डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि प्रॉक्टोलॉजी वर्कशॉप में 75 से अधिक सर्जन ने भाग लिया, जबकि 35 विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। आठ मरीजों की लाइव सर्जरी कर अत्याधुनिक तकनीक की जानकारी दी गई।
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डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि महिलाओं में प्रसव के बाद फीकल इंकान्टिनेंस की दिक्कत हो सकती है। प्रसव के दौरान अधिक ताकत लगाने से मलद्वार का स्फिंस्टर क्षतिग्रस्त हो जाता है। ये स्फिंस्टर ही मल को बाहर निकलने से रोकता है और क्षतिग्रस्त होने पर कार्य नहीं करता। ऐसे में हंसने, गैस पास होने या फिर खांसने, छींकने के साथ मल बाहर आ जाता है। इससे महिला की सामाजिक गतिविधियां लगभग ठप हो जाती हैं, लेकिन इसे दूर करने का तरीका ढूंढ़ निकाला गया है और सर्जरी कर इस दिक्कत से निजात दिलाई जा सकती है। डॉ. आनंद प्रकाश ने बताया कि स्फिंस्टर की स्थिति देखने के लिए महिला की मेनोमेट्री जांच की जाती है। इससे पता चल जाता है कि यह कितना क्षतिग्रस्त हुआ है। यदि स्फिंस्टर थोड़ा भी सुरक्षित होता है तो उसे ठीक किया जा सकता है। इसमें जांघ से ग्रेसलिस मसल्स लेकर उससे स्फिंस्टर बनाते हैं। इसके बाद उसे इलेक्ट्रोड से करंट देकर संकुचन करने लायक बना दिया जाता है, जिससे मसल्स असली स्फिंस्टर की तरह ही कार्य कर सके।
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डॉ. आनंद प्रकाश ने बताया कि महिलाओं को एक और बीमारी ऑब्सट्रेक्टेड डिफिकेशन सिंड्रोम-ओडीएस भी हो सकती है। इसमें बच्चेदानी या मूत्राशय पेट में स्थित डायाफ्राम में दिक्कत के कारण शौच के समय ताकत लगाने से नीचे आ जाता है। ये अंग सीधे मलद्वार बंद कर देते हैं। ऐसे में मरीज को लगता है कि वो कब्ज का शिकार है और कई तरह की दवाएं करता रहता है, जबकि मल त्याग न करने का कारण अंगों का नीचे खिसक आना होता है। इसमें भी सर्जरी से अंगों को सही स्थिति में लाया जाता है। डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि प्रॉक्टोलॉजी वर्कशॉप में 75 से अधिक सर्जन ने भाग लिया, जबकि 35 विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। आठ मरीजों की लाइव सर्जरी कर अत्याधुनिक तकनीक की जानकारी दी गई।
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