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हिन्दी संस्थान कराएगा कवि सम्मेलन
Lucknow
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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लखनऊ। अगले सप्ताह शुरू होने वाले नगर के सालाना उत्सव लखनऊ महोत्सव में कवि सम्मेलन उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ही कराएगा। कवि और सपा सुप्रीमो के करीबी माने जाने वाले उदय प्रताप सिंह की अगुवाई वाले उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की नाराजगी के बाद अन्तत: महोत्सव का कवि समेलन निजी संस्थान से लेकर हिन्दी संस्थान को सौंप दिया गया है। हालांकि इसको लेकर चली उठा-पटक ने महोत्सव समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
लखनऊ महोत्सव में हर साल कवि सम्मेलन और मुशायरा किया जाता है। इनके आयोजन की जिम्मेदारी प्राय: भाषा विभाग के संस्थानों, अकादमियों को दी जाती है। कवि सम्मेलन उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान या उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के संयोजन में होता है तो मुशायरा की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी या फखरुद्दीन अली अहमद कमेटी को मिलती है। प्रदेश सरकार ने कुछ महीने पहले हिन्दी संस्थान में उदय प्रताप सिंह और भाषा संस्थान में गोपाल दास नीरज को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर मंत्री का दर्जा दिया है। दोनो कवि हैं और कवि सम्मेलनों का इन्हें लंबा अनुभव है। माना जा रहा था कि कवि सम्मेलन के आयोजन की जिमेदारी इन्हें ही मिलेगी। आरंभ में इसकी प्रक्रिया भी हुई। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान से कवि सम्मेलन के आयोजन के लिए परामर्श किया गया और प्रस्तावित कवियों की सूची मांगी गई। संस्थान ने कवि सम्मेलन की तैयारी भी शुरू कर दी लेकिन कुछ रोज पहले अचानक यह जिमेदारी एक निजी संस्था अट्टहास को दे दी गयी। जिस पर हिन्दी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने नाराजगी जताई।
महोत्सव में दो दिसंबर को मुशायरा और तीन दिसंबर को कवि सम्मेलन होना है। मुशायरा की जिम्मेदारी तो फखरुद्दीन अली अहमद कमेटी को ही मिली है लेकिन कवि सम्मेलन की जिम्मेदारी निजी संस्था और हिन्दी संस्थान के बीच झूलती रही। संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष की नाराजगी के बाद सोमवार को अट्टहास के पदाधिकारियों ने उनसे भेंट की। आखिरकार कवि सम्मेलन की जिम्मेदारी फिर हिन्दी संस्थान को दे दी गई।
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सरकारी विभागों पर भरोसा नहीं करता
प्रदेश सरकार के विभिन्न विशेषज्ञ विभाग हैं लेकिन लखनऊ महोत्सव में उनकी मदद लेने की जगह निजी इवेंट कंपनियों पर भरोसा किया जाता है और उन्हें जिम्मेदारी दी जाती है। महोत्सव के मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रम निजी इवेंट मैनेजरों की मदद से कराए जाते हैं जबकि यह जिम्मेदारी संस्कृति विभाग को दी जा सकती है। इसी प्रकार इस बार हो रहे साइकिल रेस, कुश्ती, शतरंज भी अलग-अलग लोगों, निजी संस्थाओं की मदद से कराए जा रहे हैं जबकि इनके लिए खेल विभाग से मदद ली जा सकती है। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी और भारतेन्दु नाट्य अकादमी जैसी नाटकों की विशेषज्ञ सरकारी संस्थाएं होने के बावजूद लखनऊ महोत्सव का नाट्य समारोह कलाकार एसोसिएशन जैसी निजी संस्था से कराया जाता है। कवि सम्मेलन भी पहले कुछेक बार निजी संस्थाओं द्वारा कराए गए हैं। इस बार भी एक निजी संस्था ने इसके लिए काफी मशक्कत की थी। महोत्सव समिति नाट्य समारोह के लिए दो लाख रुपये, युवा महोत्सव के लिए 70 हजार रुपये तथा कवि सम्मेलन और मुशायरा के लिए चार-चार लाख रुपये देती है। इस संबंध में पूछे जाने पर जिलाधिकारी अनुराग यादव ने बताया कि महोत्सव समिति में सभी विभागों का प्रतिनिधित्व रहता है और उनके परामर्श से ही सारा काम होता है। वहीं मंडलायुक्त संजीव मित्तल ने बताया कि हम अगले वर्ष सरकारी संस्थाओं को ही जिम्मेदारी देने पर विचार करेंगे। हिन्दी संस्थान के अध्यक्ष सुधाकर अदीब ने बताया कि पहले हमसे कवियों की सूची मांगी गयी थी। इस बीच मौखिक रूप से पता चला कि इसका आयोजन अट्टहास द्वारा कराया जा रहा है लेकिन सोमवार को आयोजन समिति की ओर से मिले पत्र से स्थिति स्पष्ट हो गई। अब इसका आयोजन हिन्दी संस्थान ही कराएगा।
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लखनऊ महोत्सव में हर साल कवि सम्मेलन और मुशायरा किया जाता है। इनके आयोजन की जिम्मेदारी प्राय: भाषा विभाग के संस्थानों, अकादमियों को दी जाती है। कवि सम्मेलन उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान या उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के संयोजन में होता है तो मुशायरा की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी या फखरुद्दीन अली अहमद कमेटी को मिलती है। प्रदेश सरकार ने कुछ महीने पहले हिन्दी संस्थान में उदय प्रताप सिंह और भाषा संस्थान में गोपाल दास नीरज को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर मंत्री का दर्जा दिया है। दोनो कवि हैं और कवि सम्मेलनों का इन्हें लंबा अनुभव है। माना जा रहा था कि कवि सम्मेलन के आयोजन की जिमेदारी इन्हें ही मिलेगी। आरंभ में इसकी प्रक्रिया भी हुई। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान से कवि सम्मेलन के आयोजन के लिए परामर्श किया गया और प्रस्तावित कवियों की सूची मांगी गई। संस्थान ने कवि सम्मेलन की तैयारी भी शुरू कर दी लेकिन कुछ रोज पहले अचानक यह जिमेदारी एक निजी संस्था अट्टहास को दे दी गयी। जिस पर हिन्दी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने नाराजगी जताई।
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महोत्सव में दो दिसंबर को मुशायरा और तीन दिसंबर को कवि सम्मेलन होना है। मुशायरा की जिम्मेदारी तो फखरुद्दीन अली अहमद कमेटी को ही मिली है लेकिन कवि सम्मेलन की जिम्मेदारी निजी संस्था और हिन्दी संस्थान के बीच झूलती रही। संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष की नाराजगी के बाद सोमवार को अट्टहास के पदाधिकारियों ने उनसे भेंट की। आखिरकार कवि सम्मेलन की जिम्मेदारी फिर हिन्दी संस्थान को दे दी गई।
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सरकारी विभागों पर भरोसा नहीं करता
प्रदेश सरकार के विभिन्न विशेषज्ञ विभाग हैं लेकिन लखनऊ महोत्सव में उनकी मदद लेने की जगह निजी इवेंट कंपनियों पर भरोसा किया जाता है और उन्हें जिम्मेदारी दी जाती है। महोत्सव के मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रम निजी इवेंट मैनेजरों की मदद से कराए जाते हैं जबकि यह जिम्मेदारी संस्कृति विभाग को दी जा सकती है। इसी प्रकार इस बार हो रहे साइकिल रेस, कुश्ती, शतरंज भी अलग-अलग लोगों, निजी संस्थाओं की मदद से कराए जा रहे हैं जबकि इनके लिए खेल विभाग से मदद ली जा सकती है। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी और भारतेन्दु नाट्य अकादमी जैसी नाटकों की विशेषज्ञ सरकारी संस्थाएं होने के बावजूद लखनऊ महोत्सव का नाट्य समारोह कलाकार एसोसिएशन जैसी निजी संस्था से कराया जाता है। कवि सम्मेलन भी पहले कुछेक बार निजी संस्थाओं द्वारा कराए गए हैं। इस बार भी एक निजी संस्था ने इसके लिए काफी मशक्कत की थी। महोत्सव समिति नाट्य समारोह के लिए दो लाख रुपये, युवा महोत्सव के लिए 70 हजार रुपये तथा कवि सम्मेलन और मुशायरा के लिए चार-चार लाख रुपये देती है। इस संबंध में पूछे जाने पर जिलाधिकारी अनुराग यादव ने बताया कि महोत्सव समिति में सभी विभागों का प्रतिनिधित्व रहता है और उनके परामर्श से ही सारा काम होता है। वहीं मंडलायुक्त संजीव मित्तल ने बताया कि हम अगले वर्ष सरकारी संस्थाओं को ही जिम्मेदारी देने पर विचार करेंगे। हिन्दी संस्थान के अध्यक्ष सुधाकर अदीब ने बताया कि पहले हमसे कवियों की सूची मांगी गयी थी। इस बीच मौखिक रूप से पता चला कि इसका आयोजन अट्टहास द्वारा कराया जा रहा है लेकिन सोमवार को आयोजन समिति की ओर से मिले पत्र से स्थिति स्पष्ट हो गई। अब इसका आयोजन हिन्दी संस्थान ही कराएगा।