राजधानी पहुंची रेड रिबन एक्सप्रेस

Lucknow Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। जागरूकता से ही एचआईवी-एड्स के मामलों में कमी लायी जा सकती है। ये छुआछूत की बीमारी नहीं है। एचआईवी-एड्स संक्रमण के साथ जी रहे लोगों को समाज से अलग न समझा जाए। एचआईवी संक्रमण के बारे में फैली भ्रांतियों को दूर करना सबसे जरूरी काम है जो सबके सहयोग से ही हो सकता है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने ये बात शुक्रवार को चारबाग में रेड रिबन एक्सप्रेस के उद्घाटन के समय कही।
चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एचआईवी-एड्स के प्रसार को रोकने के लिए ट्रक ड्राइवरों, उनके हेल्परों, दूसरे शहरों में जाकर नौकरी, मजदूरी करने वालों, सेक्स वर्कर्स को जागरूक करना जरूरी है। जिससे इस संक्रमण के फैलाव को रोका जा सके। चिकित्सा राज्य मंत्री शंखलाल मांझी ने कहा कि देश में 0.31 फीसदी एचआईवी संक्रमित लोग है। प्रतिशत में ये कम लगता है लेकिन ये संख्या लगभग 24 लाख है। प्रदेश में एचआईवी-एड्स के साथ जी रहे लोगों की संख्या लगभग 1.08 लाख है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में ये बीमारी तेजी से फैल रही है। नाको और यूपी एड्स कंट्रोल सोसाइटी ने इस तथ्य को स्वीकार किया है और वहां आने वाले लोगों को जागरूक किया जा रहा है। अपर सचिव नाको आराधना जौहरी ने बताया कि विश्व में हमारा देश अफ्रीका, नाइजीरिया के बाद तीसरा देश है जहां एचआईवी-एड्स संक्रमित लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। चिंता का विषय है ये है कि एचआईवी एड्स का प्रसार हाई रिस्क ग्रुप से सामान्य लोगों में हो रहा है। अभी तक सबसे ज्यादा 89 फीसदी संक्रमण असुरक्षित यौन संबंधों से होता है। इसके बाद मां से बच्चे को, इंजेक्शन से नशा करने वालों को, इसके बाद असुरक्षित रक्त चढ़ाने से एचआईवी संक्रमण होता है। अब ये दूसरे प्रदेशों में कार्य करने वाले कामगारों में हो रहा है। पूर्वांचल के जिलों से बड़ी संख्या में लोग मुंबई कार्य करने जाते हैं। जब वे वापस आते हैं तो अपने साथ एचआईवी संक्रमण लाते हैं। इस संक्रमण को वो अपनी पत्नी को देते हैं और फिर होने वाले बच्चे संक्रमण के साथ पैदा होते हैं। अब इसे रोकने के लिए जागरूकता फैलायी जा रही है। यूपी एड्स कंट्रोल सोसाइटी के परियोजना निदेशक आशीष गोयल ने बताया कि प्रदेश में 1.08 लाख एचआईवी-एड्स के साथ जी रहे लोग हैं। इनमें से 65 हजार एंट्री रिट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर से जुड़े हैं। कार्यक्रम में चिकित्सा स्वास्थ्य राज्य मंत्री शंखलाल मांझी, प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य संजय अग्रवाल, डीजी हेल्थ डॉ. रमा सिंह, एनआरएचएम के निदेशक अमित घोष, अपर सचिव नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गेनाइजेशन आराधना जौहरी, यूपी एड्स कंट्रोल सोसाइटी के परियोजना निदेशक आशीष गोयल, सीडीओ अदिति सिंह, एडीआरएम उत्तर रेलवे आर.के.लाल, सीएमओ डॉ.एस.एन.एस. यादव मौजूद थे।

प्रवासी कामगारों में बढ़ाई जा रही जागरूकता : यूपी एड्स कंट्रोल सोसाइटी के परियोजना निदेशक आशीष गोयल और नाको की अपर सचिव आराधना जौहरी ने बताया कि प्रवासी लोगों और कामगारों को संक्रमण से बचाने के लिए अब उनके बीच जाकर कार्य किया जाएगा। इसमें एनजीओ की मदद ली जा रही है। उत्तर प्रदेश में 32 जिले चिह्नित किए गए हैं जहां के लोग सबसे ज्यादा दूसरे प्रदेशों में जाकर काम करते हैं। इनमें से 14 जिलों में जागरूकता कार्यक्रम शुरू कर दिया गया है। गांव सभा में भी एचआईवी से बचाव के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश में गोरखपुर, वाराणसी और इलाहाबाद ट्रांजिट प्वाइंट चिह्नित किए गए हैं। जहां से प्रवासी कामगार सबसे ज्यादा बाहर जाते हैं। पूर्वांचल में एचआईवी संक्रमित लोगों की बढ़ती संख्या का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बस्ती में रेड रिबन एक्सप्रेस में 1000 लोगों ने अपनी जांच कराई। इनमें से 25 में एचआईवी संक्रमण निकला। प्रवासी कामगारों को एक प्रवासी सुरक्षा किट उपलब्ध करायी जा रही है । जिसमें कंडोम से लेकर एचआईवी संक्रमण से बचाव के लिए जागरूकता की जानकारी भी दी गई है।

एआरटी लेने वालों को फ्री यात्रा सुविधा की मांग : अपर सचिव नाको आराधना जौहरी ने एंटी रिट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) रहे मरीजों को यात्रा के लिए फ्री पास उपलब्ध कराने की मांग प्रदेश सरकार से की है, जिससे वे अपने करीब के एआरटी सेंटर पहुंच सकें। सामाजिक बहिष्कार झेल रहे एचआईवी-एड्स के साथ जी रहे लोगों के लिए एआरटी सेंटर पहुंचना मुश्किल होता है। क्योंकि बहिष्कार के कारण उनके लिए जीवन यापन भी कठिन हो जाता है। आराधना जौहरी ने बताया कि यूपी में एआरटी सेंटर काफी कम हैं। ऐसे में एक जिले से दूसरे जिले के सेंटर पर जाने के लिए काफी किराया खर्च होता है। यदि एड्स के साथ जी रहे मरीज को फ्री यात्रा सुविधा मिलेगी तो वो दवा समय पर ले सकेगा। इसके अलावा एचआईवी संक्रमित विधवा को पेंशन की सुविधा भी देना चाहिए। क्योंकि पति की मौत के बाद ऐसी महिलाएं परिवार और समाज सभी जगह बहिष्कार झेल रही हैं।

जागरूकता स्टाल भी लगे : पुनरीक्षित टीबी नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम, शरणम् संस्थान, केजीएमयू ब्लड बैंक, विकलांग कल्याण विभाग आदि के स्टालों को देखने के लिए भी लोगों की भीड़ उमड़ी। जिसमें छात्र, छात्राएं, पुलिस, सेना, एनसीसी के कैडेट भी शामिल थे। इमरजेंसी स्थिति से निपटने के लिए लोकबंधु राजनारायण अस्पताल के डॉ. आनंद यादव, फार्मासिस्ट सुभाष श्रीवास्तव की टीम को लगाया गया है।

ये है कोच में : कोच नंबर एक में देश में एचआईवी की स्थिति को एलईडी लाइटों से दर्शाया गया है। इसके बाद एचआईवी का देश में इतिहास, शरीर में एचआईवी वायरस कैसे संक्रमण फैलाता है इसको वीडियो फिल्म से दिखाया जा रहा था। कंडोम के इस्तेमाल, एचआईवी संक्रमण के तरीके, फोन बूथ के माध्यम से से यौन रोगों, एचआईवी और टीबी के साथ चलने की जानकारी भी दी जा रही थी। स्कूलों के लिए रेड रिबन क्लब, एचआईवी-एड्स संक्रमित लोगों के अधिकार भी जानकारी भी पोस्टर्स के माध्यम से प्रदर्शित की गई थी। कोच नंबर पांच में प्रशिक्षण की व्यवस्था और कोच नंबर छह में एचआईवी-एड्स, यौन रोग की काउंसलिंग व जांच की सुविधा दी गई है।

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